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जशपुर के चार वन परिक्षेत्रों में 32 हाथियों का दल सक्रिय, कई गांवों में अलर्ट,डीएफओ ने की ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील

 

 

 

 

जशपुर वनमंडल के चार वन परिक्षेत्रों में लगभग 32 हाथियों का दल सक्रिय रूप से विचरण कर रहा है। हाथियों की लगातार आवाजाही को देखते हुए वन विभाग ने प्रभावित गांवों में सतर्कता बढ़ा दी है। विभाग की रैपिड रिस्पांस टीम और मैदानी अमला चौबीसों घंटे हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं तथा ग्रामीणों को समय-समय पर सूचना देकर सतर्क किया जा रहा है।

डीएफओ शशि कुमार ने बताया कि वर्तमान में दुलदुला, पत्थलगांव, कांसाबेल और बगीचा वन परिक्षेत्र के कई गांवों के आसपास हाथियों का दल विचरण कर रहा है। दुलदुला वन परिक्षेत्र के धुरीआम्बा, करडेगा, केंदापानी, धांधआम्बा, बुकना, मधुटोली और कोहड़ा पहरी,पत्थलगांव वन परिक्षेत्र के खाडामाचा,हरदीझरिया, पीटाआमा,राजाआमा, खमरगड़ा, महेशपुर, काडरो और झिमकी, कांसाबेल वन परिक्षेत्र के चेटबा, नारायण बहली, मड़ियाझरिया और सोनाजोरी तथा बगीचा वन परिक्षेत्र के झिकी, खंताडांड़, टटकेला, परसाडांड़, पेटा, कुरडेग, बिमड़ा, सामरबार, दुर्गापारा, सुईकोना, मैनी, बुचीडांड, जुजगु और कुरडेग के आसपास हाथियों की गतिविधियां दर्ज की गई हैं।

डीएफओ शशि कुमार ने बताया कि हाथियों की लोकेशन का नियमित रूप से पता लगाकर आसपास के गांवों में तत्काल सूचना पहुंचाई जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों में लगातार मुनादी कर ग्रामीणों को हाथियों की मौजूदगी और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथियों के विचरण वाले क्षेत्रों में लकड़ी, चारा या अन्य कार्यों के लिए जंगल में अनावश्यक प्रवेश न करें। किसी भी परिस्थिति में हाथियों के पास जाने, उन्हें उकसाने, उनका पीछा करने अथवा सेल्फी और वीडियो बनाने का प्रयास न करें। विशेष रूप से रात के समय हाथियों के विचरण वाले क्षेत्रों में जाने से बचें।

डीएफओ ने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी दिखाई दे या उनकी गतिविधियों की जानकारी मिले तो इसकी सूचना तत्काल निकटस्थ वन अधिकारी, वन कर्मचारी या आरआरटी को दें। अफवाहों पर विश्वास न करें और केवल वन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं का ही पालन करें।

वन विभाग का कहना है कि ग्रामीणों की सतर्कता, समय पर सूचना और विभाग के साथ सहयोग से हाथी-मानव द्वंद्व की घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।

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शाला प्रवेश उत्सव में नवप्रवेशी बच्चों का आत्मीय स्वागत, मंत्री राजेश अग्रवाल ने बांटी अध्ययन सामग्री।

 

 

 

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने शनिवार को स्वामी आत्मानंद गवर्नमेंट अंग्रेजी माध्यम स्कूल, उदयपुर में आयोजित विकासखंड स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव में शामिल होकर नवप्रवेशी विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने बच्चों को मिठाई खिलाकर नए शैक्षणिक सत्र की शुभकामनाएं दीं तथा अध्ययन सामग्री वितरित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर, संस्कारित और सशक्त समाज की मजबूत नींव है। प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी प्रतिभा निखारने और सपनों को साकार करने के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलना चाहिए।

उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित विद्यालय आने, मन लगाकर अध्ययन करने और जीवन में ऊंचे लक्ष्य निर्धारित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व निर्माण की पाठशाला भी है।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिनकी मंत्री ने सराहना की। इस अवसर पर मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन की प्रशंसा की गई तथा भविष्य में भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया गया।

मंत्री राजेश अग्रवाल ने नए शैक्षणिक सत्र के लिए विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में परिवार और शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके संयुक्त प्रयासों से ही शिक्षित, जागरूक और सशक्त समाज का निर्माण संभव है।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, शिक्षक, अभिभावक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जारी की महतारी वंदन योजना की 29वीं किश्त, 66 लाख महिलाओं के खातों में पहुंचे 626.25 करोड़ रुपये

 

 

 

 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शनिवार को मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से महतारी वंदन योजना की 29वीं किश्त जारी करते हुए प्रदेश की 66 लाख से अधिक महिलाओं के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से 626.25 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े भी उपस्थित रहीं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के सम्मान, आत्मनिर्भरता और आर्थिक स्वावलंबन की नई पहचान बन चुकी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। आज जारी की गई किश्त के साथ योजना के तहत अब तक 29 किश्तों में कुल 18,805.83 करोड़ रुपये सीधे हितग्राही महिलाओं के बैंक खातों में पहुंचाए जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में महिला सशक्तिकरण के लिए चलाए जा रहे अभियान को छत्तीसगढ़ सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों के दौरे के दौरान अनेक महिलाओं ने उन्हें बताया कि योजना से मिलने वाली राशि से उन्होंने छोटे व्यवसाय शुरू किए, सिलाई-कढ़ाई एवं स्वरोजगार अपनाया, जबकि कई परिवारों ने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में इस राशि का उपयोग किया है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महतारी वंदन योजना के साथ-साथ 'लखपति दीदी' जैसी योजनाओं के माध्यम से भी महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ई-केवाईसी की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कर सभी पात्र महिलाओं तक योजना का लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। विशेष रूप से बस्तर संभाग में इस कार्य को प्राथमिकता के साथ पूरा करने पर जोर दिया गया।

उल्लेखनीय है कि महतारी वंदन योजना 1 मार्च 2024 से प्रदेश में लागू है। इसके तहत 21 वर्ष या उससे अधिक आयु की पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाती है। योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान करने के साथ परिवार के पोषण, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, कुपोषण एवं एनीमिया की रोकथाम तथा स्वरोजगार को बढ़ावा देना है।

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बारिश के मौसम में करंट से होने वाली दुर्घटनाओं से बचने विद्युत कंपनी ने जारी की एडवाइजरी।

 

 

 

 बारिश का मौसम शुरू होते ही विद्युत करंट से होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। बिजली के खंभों, एचटी लाइनों, टूटे तारों तथा विद्युत उपकरणों के संपर्क में आने से हर वर्ष कई हादसे होते हैं, जिनमें कई बार लोगों की जान तक चली जाती है। इन दुर्घटनाओं से बचाव के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने आम नागरिकों के लिए सुरक्षा संबंधी एडवाइजरी जारी करते हुए विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।

 कंपनी ने कहा है कि थोड़ी-सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसलिए विद्युत लाइनों, ट्रांसफार्मरों एवं अन्य विद्युत उपकरणों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें तथा किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करें। यदि आंधी-तूफान या बारिश के दौरान बिजली के खंभे, तार अथवा अन्य उपकरण क्षतिग्रस्त दिखाई दें, तो इसकी सूचना तत्काल कंपनी के टोल-फ्री नंबर 1912, मोर बिजली ऐप अथवा निकटतम वितरण केंद्र या जोन कार्यालय में दें।

 बारिश के दौरान बिजली के खंभों, तारों और ट्रांसफार्मरों से दूर रहें। जहां विद्युत तार या उपकरण मौजूद हों, वहां पानी में करंट फैलने की संभावना रहती है। ऐसे स्थानों पर पानी में चलने या तैरने से बचें। विद्युत उपकरणों का उपयोग करते समय हाथ-पैर सूखे रखें तथा रबर या प्लास्टिक के जूते-चप्पलों का उपयोग करें। विभाग ने बताया कि बारिश से पहले सभी फीडरों, ट्रांसफार्मरों एवं विद्युत लाइनों का निरीक्षण और आवश्यक रखरखाव किया जा चुका है। इसके बावजूद नागरिकों की सतर्कता अत्यंत आवश्यक है।

*दुर्घटनाओं से बचने के लिए इन सावधानियों का रखें-*

 घरों, खेतों एवं अन्य स्थानों पर केवल गुणवत्तापूर्ण विद्युत उपकरणों का उपयोग करें। खेत या बाड़ी की बाड़ तथा कंटीले तारों में बिजली प्रवाहित न करें। यह अवैध होने के साथ-साथ जानलेवा भी हो सकता है तथा संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। 

 विद्युत लाइनों, ट्रांसफार्मरों या अन्य उपकरणों में खराबी आने पर स्वयं सुधार करने का प्रयास न करें। बिजली की लाइनों के नीचे अथवा उनके समीप स्थायी या अस्थायी निर्माण न करें तथा सुरक्षित दूरी बनाए रखें। यदि कोई विद्युत तार टूटकर जमीन, नदी, नाले या तालाब में गिरा हुआ मिले, तो उससे पर्याप्त दूरी बनाए रखें और तत्काल संबंधित लाइनमैन, कनिष्ठ अभियंता अथवा टोल-फ्री नंबर 1912 पर सूचना देकर विद्युत प्रवाह बंद कराएं।

 बिजली की लाइनों से हुकिंग कर अनाधिकृत रूप से बिजली का उपयोग न करें। कपड़े सुखाने के लिए बिजली के खंभों या स्टे वायर का उपयोग न करें तथा कपड़े सुखाने वाले तार को विद्युत लाइनों से पर्याप्त दूरी पर रखें। अस्थायी विद्युत कनेक्शन के लिए कटे-फटे तारों का उपयोग न करें तथा बच्चों को विद्युत उपकरणों एवं लाइनों के आसपास खेलने से रोकें।

*यदि कोई व्यक्ति करंट की चपेट में आ जाए तो यह करें-*

सबसे पहले मुख्य स्विच बंद कर विद्युत प्रवाह तत्काल रोकें। यदि स्विच बंद करना संभव न हो, तो सूखी लकड़ी, सूखी रस्सी या सूखे कपड़े की सहायता से पीड़ित को बिजली के स्रोत से अलग करें। सीधे हाथ लगाने का प्रयास न करें। पीड़ित को सूखी जगह पर लिटाकर प्राथमिक उपचार दें, आवश्यकता होने पर कृत्रिम श्वास दें तथा तत्काल निकटतम अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था करें।

 छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड, बिलासपुर क्षेत्र के कार्यपालक निदेशक श्री ए.के. अंबस्थ ने कहा कि भीषण गर्मी, आंधी-तूफान और बारिश के दौरान विद्युत व्यवस्था बनाए रखना बिजली कर्मियों के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। ऐसे मौसम में फॉल्ट ढूंढ़ने और उसे सुधारने के लिए कर्मचारियों को प्रतिकूल परिस्थितियों में लगातार कार्य करना पड़ता है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि बिजली आपूर्ति बाधित होने पर घबराने के बजाय 5 से 10 मिनट प्रतीक्षा करें और आवश्यकता होने पर टोल-फ्री नंबर 1912 पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही, लाइन कर्मचारियों को सुधार कार्य में सहयोग दें तथा विद्युत लाइनों एवं उपकरणों से किसी प्रकार की छेड़छाड़ न करें।

 उन्होंने कहा कि विद्युत व्यवस्था के सुरक्षित एवं सुचारु संचालन में उपभोक्ताओं का सहयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है। थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर न केवल दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है, बल्कि लोगों के जीवन और संपत्ति की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है जान है तो जहान है।

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मानसून में भी पर्यटन का आनंद: बारनावापारा अभयारण्य 31 अक्टूबर तक बंद बफर क्षेत्रों में शुरू हुआ नया पर्यटन सर्किट

 

 

 

 

 वन्यजीवों की सुरक्षा और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए बारनावापारा वन्यजीव अभयारण्य 1 जुलाई से 31 अक्टूबर 2026 तक पर्यटकों के लिए बंद रहेगा। हर वर्ष मानसून के दौरान वन्यजीवों के प्रजनन काल को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया जाता है।

हालांकि, इस दौरान पर्यटकों को प्रकृति और संस्कृति से जोड़ने के लिए बलौदाबाजार वनमंडल ने "बारनावापारा–सिरपुर पर्यटन सर्किट : द सेक्रेड गारलैंड" की शुरुआत की है। इस पहल के माध्यम से राजधानी रायपुर के आसपास स्थित प्राकृतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को एक पर्यटन परिपथ के रूप में विकसित किया जा रहा है।

इस पर्यटन सर्किट में सिरपुर, धसकुंड जलप्रपात, तुरतुरिया ईको कल्चरल सेंटर, गिरौदपुरी धाम, सिद्धखोल जलप्रपात, सोनाखान, शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक, देवपुर नेचर कैंप, अचानकपुर का देव हिल्स ईको एथनिक स्टे, कोडार जलाशय सहित कई प्रमुख पर्यटन स्थल शामिल हैं। यहां पर्यटक हरियाली, झरनों, पहाड़ियों, वन क्षेत्र, धार्मिक स्थलों, पुरातात्विक धरोहरों और जनजातीय संस्कृति का अनूठा अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।

मानसून के मौसम में पूरा क्षेत्र हरियाली से भर जाता है, जिससे इसकी प्राकृतिक सुंदरता और भी बढ़ जाती है। देवपुर नेचर कैंप, देव हिल्स ईको एथनिक स्टे, सिद्धखोल जलप्रपात, तुरतुरिया धाम, धामनी ईको विलेज, धसकुंड फॉल और सिरपुर इस मौसम के प्रमुख आकर्षण होंगे।

इस पर्यटन सर्किट को देशभर में पहचान दिलाने के लिए टूर ऑपरेटरों, ट्रैवल एजेंसियों, ट्रैवल इन्फ्लुएंसर्स, कंटेंट क्रिएटर्स और नेचर फोटोग्राफर्स को भी जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य जिम्मेदार और सतत पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है।

वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने बताया कि वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार यह पहल प्रकृति, संस्कृति, विरासत और स्थानीय समुदायों को एक मंच पर लाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि अभयारण्य बंद रहने के दौरान भी पर्यटक बारनावापारा–सिरपुर बफर क्षेत्रों के प्राकृतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों का आनंद ले सकेंगे। साथ ही स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाकर सतत पर्यटन और रोजगार सृजन को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।

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पद्म विभूषण स्व. तीजन बाई को 8 जुलाई को मुक्ताकाशी मंच से छत्तीसगढ़ के लोक कलाकार देंगे श्रद्धांजलि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं मंत्रीगण, सांसद व विधायकगण होंगे शामिल

 

 

 

 पंडवानी की अप्रतिम साधिका, पद्मविभूषण एवं डी.लिट. से सम्मानित डॉ. श्रीमती तीजन बाई को 8 जुलाई को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। संस्कृति विभाग द्वारा स्व. तीजन बाई को संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पण का यह कार्यक्रम दोपहर 2 बजे महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, स्थित मुक्ताकाशी मंच से आयोजित होगा। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल सहित मंत्रीगण, सांसद, विधायक एवं जनप्रतिनिधियों के साथ छत्तीसगढ़ के पद्मश्री एवं राज्य अलंकरण से सम्मानित कलाकार, साहित्यकार, संस्कृति कर्मी तथा बड़ी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित रहेंगे।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित लोक कलाकार अपनी-अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उस महान विभूति को श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे, जिन्होंने पंडवानी जैसी लोकवाचिक परंपरा को गांव के चौपाल से उठाकर विश्व के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मंचों तक पहुंचाया। गीत, संगीत, पंडवानी, लोकगायन और अन्य लोककलाओं की प्रस्तुतियों के माध्यम से उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व का स्मरण किया जाएगा। यह आयोजन केवल एक श्रद्धांजलि समारोह नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना के उस स्वर्णिम अध्याय को नमन है, जिसे डॉ. श्रीमती तीजन बाई ने अपने संपूर्ण जीवन की साधना से रचा।

पद्मविभूषण श्रीमती तीजन बाई का निधन 5 जुलाई 2026 को हुआ। उनके निधन से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश और विश्व के कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उनके साथ भारतीय लोककला का एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय समाप्त हुआ, जिसने पंडवानी को नई प्रतिष्ठा, नई पहचान और वैश्विक सम्मान दिलाया।

24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मी पद्मविभूषण श्रीमती तीजन बाई का बचपन अत्यंत साधारण परिस्थितियों में बीता। महज 13 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना पहला सार्वजनिक मंच प्रदर्शन किया और उसी समय यह संकल्प लिया कि वे पंडवानी को ही अपने जीवन का लक्ष्य बनाएंगी। उस दौर में महिलाओं द्वारा पारंपरिक वेदमती शैली में बैठकर पंडवानी प्रस्तुत करने की परंपरा थी, लेकिन उन्होंने साहस के साथ कपालिक शैली में खड़े होकर पंडवानी प्रस्तुत की। अपनी दमदार आवाज, सशक्त अभिनय और प्रभावशाली भावाभिव्यक्तियों से उन्होंने पंडवानी को नई पहचान दिलाई और इसे जन-जन तक पहुंचाया।

प्रख्यात रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उनकी असाधारण प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद डॉ. तीजन बाई ने 17 से अधिक देशों में पंडवानी की प्रस्तुति देकर न केवल इस लोककला को वैश्विक पहचान दिलाई। वे विश्व मंच पर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान बन गईं।

पांच दशक से अधिक समय तक उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी अनूठी शैली में जीवंत किया। उनके मंचन में गायन, अभिनय, संवाद, भावाभिव्यक्ति और लोकभाषा का अद्भुत समन्वय था। उन्होंने सिद्ध किया कि लोककला किसी क्षेत्र विशेष की धरोहर नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता की सांस्कृतिक विरासत है।

उनकी अनुपम कला साधना के लिए उन्हें पद्मश्री (1988), संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995), पद्मभूषण (2003), जापान का प्रतिष्ठित फुकुओका पुरस्कार (2018), पद्मविभूषण (2019) तथा डी.लिट. (मानद उपाधि) सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले। इन सम्मानों ने उनके गौरवशाली सांस्कृतिक योगदान को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्रदान की।

संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह सांगीतिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम वास्तव में उनके अमूल्य योगदान का स्मरण है। लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उनकी कला साधना, संघर्ष और पंडवानी की गौरवशाली परंपरा को साकार करेंगे।

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कोसा बीज केंद्र मोदकपाल से 5,700 तसर स्वस्थ डिम्ब समूहों का वितरण रेशम विभाग की योजना से हितग्राहियों को 79,800 रुपए की सब्सिडी, तसर पालन से बढ़ेगी आय

 

 

 

 

 राज्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत बीजापुर जिले में रेशम विभाग द्वारा संचालित कोसा बीज केंद्र, मोदकपाल में तसर पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हितग्राहियों को 5,700 तसर स्वस्थ डिम्ब समूहों का वितरण किया गया।

इन डिम्ब समूहों की कुल लागत 91,200 रुपए रही। इसमें राज्य शासन ने 79,800 रुपए की सब्सिडी प्रदान की, जबकि हितग्राहियों से केवल 11,400 रुपए का अंशदान लिया गया। इससे कम लागत में गुणवत्तायुक्त तसर बीज उपलब्ध कराकर तसर पालन को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के लोगों की आय बढ़ाना तथा उन्हें स्वरोजगार से जोड़ना है। विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए गुणवत्तायुक्त स्वस्थ डिम्ब समूहों से बेहतर उत्पादन की संभावना है। इससे हितग्राही वैज्ञानिक तरीके से तसर पालन कर अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

रेशम विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, वितरित डिम्ब समूहों से लगभग 2 लाख कोसों का उत्पादन होने का अनुमान है। इससे न केवल हितग्राहियों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि जिले में तसर उत्पादन को भी नई गति मिलेगी।

रेशम विभाग ने बताया कि राज्य शासन की अनुदान आधारित योजनाओं के माध्यम से हितग्राहियों को कम लागत पर गुणवत्तायुक्त तसर बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और आवश्यक सहयोग भी लगातार दिया जाएगा, ताकि तसर पालन को बढ़ावा मिले और ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर सृजित हों।

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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्रनिष्ठा, त्याग और संकल्प का प्रेरक उदाहरण : वित्त मंत्री ओपी चौधरी।

 

 

 

 

देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रखर पुरोधा, प्रखर शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय में व्याख्यान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने भारत माता एवं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर दीप प्रज्वलित किया तथा उनके राष्ट्रनिर्माण में योगदान को नमन किया।

वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्रभक्ति, त्याग, शिक्षा, सिद्धांतों के प्रति अटूट निष्ठा और अदम्य साहस का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने व्यक्तिगत हितों से ऊपर राष्ट्रहित को सर्वोच्च स्थान दिया और भारतीय लोकतंत्र तथा राष्ट्रीय एकता को नई दिशा प्रदान की। उनका जीवन आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है। इस अवसर पर उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के राष्ट्र के प्रति योगदान का भी स्मरण किया।

*सकारात्मक सोच, स्पष्ट लक्ष्य और अनुशासन ही सफलता की कुंजी*

युवाओं को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि स्पष्ट लक्ष्य, अनुशासन, निरंतर परिश्रम और सकारात्मक सोच से प्राप्त होती है। व्यक्ति जैसा सोचता है, वैसा ही बनता है। उन्होंने कहा कि किसी भी निर्णय से पहले उसके परिणामों पर विचार करना चाहिए तथा अपने निर्णयों की जिम्मेदारी स्वयं स्वीकार करनी चाहिए। असफलताओं के लिए दूसरों को दोष देने के बजाय आत्ममंथन और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति अपनानी चाहिए। उन्होंने युवाओं से आधुनिकता के साथ अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं पर गर्व करने का भी आह्वान किया।

*युवा संवाद में विद्यार्थियों के सवालों का दिया जवाब*

कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री श्री चौधरी ने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए प्रशासनिक सेवा, प्रतियोगी परीक्षाओं, महिला सशक्तिकरण, व्यक्तित्व विकास एवं स्वास्थ्य से जुड़े प्रश्नों के उत्तर दिए। प्रशासनिक सेवा में करियर संबंधी प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवा केवल रोजगार नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा का प्रभावी माध्यम है। इसके लिए दृढ़ संकल्प, अनुशासित अध्ययन और निरंतर परिश्रम आवश्यक है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को संघ लोक सेवा आयोग की तैयारी के लिए विशेष योजना के तहत दिल्ली भेज रही है, जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा का बेहतर अवसर मिल सके।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर उन्होंने कहा कि सफलता के लिए लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए। समय का सदुपयोग, गुणवत्तापूर्ण अध्ययन, आत्मअनुशासन और निरंतर प्रयास ही सफलता की कुंजी हैं। उन्होंने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियां भी मजबूत संकल्प रखने वाले व्यक्ति की राह नहीं रोक सकतीं।

*बेटियों को आगे बढ़ने के लिए अवसरों का लाभ उठाना होगा*

महिला सशक्तिकरण पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में वित्त मंत्री ने कहा कि बेटियों की शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देने के लिए सरकार अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि बेटियां आत्मविश्वास के साथ उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाते हुए अपने सपनों को साकार करें।

*स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन सफलता की पहली शर्त*

स्वास्थ्य संबंधी प्रश्नों का उत्तर देते हुए श्री चौधरी ने युवाओं को नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और व्यायाम अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन ही किसी भी बड़ी सफलता की पहली शर्त हैं।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विनय चौहान, महापौर श्री जीवर्धन चौहान, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हेमलता चौहान, नगर निगम सभापति श्री डिग्री लाल साहू, कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशिमोहन सिंह, विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय सेवा योजना के उत्कृष्ट स्वयंसेवकों को सम्मानित किया गया तथा विश्वविद्यालय परिवार द्वारा अतिथियों का शाल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर अभिनंदन किया गया।

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर किया नमन।

 

 

 

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में आयोजित प्रदेश स्तरीय समारोह में उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन राष्ट्रभक्ति, शिक्षा, त्याग और अखंड भारत के संकल्प का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आज डॉ. मुखर्जी के सपनों को साकार करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। धारा 370 का हटना, अंत्योदय की भावना पर आधारित विकास तथा राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने वाले अनेक निर्णय उनके विचारों को मूर्त रूप देने वाले ऐतिहासिक कदम हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए राज्य के सभी संभागीय एवं जिला मुख्यालयों में उनकी प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इसके लिए 10 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी केवल एक दूरदर्शी राजनेता ही नहीं, बल्कि विलक्षण शिक्षाविद भी थे। मात्र 33 वर्ष की आयु में विश्वविद्यालय के कुलपति बनने का गौरव प्राप्त करने वाले डॉ. मुखर्जी ने स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग मंत्री के रूप में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। राष्ट्रहित सर्वोपरि रखने की उनकी प्रतिबद्धता ऐसी थी कि उन्होंने सिद्धांतों से समझौता करने के बजाय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना स्वीकार किया।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में 'एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान' की व्यवस्था के विरुद्ध डॉ. मुखर्जी ने ऐतिहासिक संघर्ष किया और राष्ट्र की एकता एवं अखंडता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। आज पूरा देश उनके त्याग और राष्ट्रनिष्ठा को कृतज्ञतापूर्वक स्मरण करता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश के गौरवशाली इतिहास और भूले-बिसरे स्वतंत्रता सेनानियों को उचित सम्मान दिलाने का कार्य किया है। हर घर तिरंगा जैसे जनआंदोलन ने राष्ट्रभक्ति की भावना को नई ऊर्जा दी है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने भी नया रायपुर स्थित शहीद वीरनारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय में छत्तीसगढ़ के 14 वीर स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति में विशेष दीर्घा स्थापित की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के अंत्योदय के विचारों को आधार बनाकर कार्य कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में मोदी की गारंटी के अधिकांश संकल्प पूरे किए गए हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार जैसी मूलभूत सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं। 500 से अधिक गांवों तक आधारभूत सुविधाओं का विस्तार हुआ है, 700 से अधिक मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं तथा बस्तर अंचल में व्यापक स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार अभियान संचालित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रसेवा, शिक्षा, त्याग और समर्पण के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें तथा विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

इस अवसर पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल, कुलसचिव डॉ. शैलेन्द्र कुमार पटेल, प्रबुद्धजन, शिक्षक, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर सहकारिता के भविष्य पर हुआ मंथन विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में सहकारिता की भूमिका पर हुई पैनल चर्च

 

 

 अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर राजधानी स्थित कृषि मंडपम, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, लाभांडी में सहकारिता क्षेत्र की चुनौतियों, उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं पर केंद्रित एक विशेष पैनल चर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में सहकारिता की भूमिका पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी श्री केदारनाथ गुप्ता, मार्कफेड के प्राधिकृत अधिकारी श्री शशिकांत द्विवेदी तथा जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अंबिकापुर के अध्यक्ष श्री रामकिशुन सिंह ने किया।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के गठन के पाँच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रदेशभर में 29 जून से 6 जुलाई तक सहकारी सप्ताह मनाया जा रहा है। इसी श्रृंखला में विगत 4 जून को अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर यह विशेष आयोजन किया गया।

पैनल चर्चा में विकसित भारत-2047 के लिए सहकारिता क्षेत्र से अपेक्षाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने वनांचल क्षेत्रों में लघु वनोपज सहकारी समितियों की भूमिका, दुग्ध सहकारिता के विस्तार, महिला सशक्तिकरण में दुग्ध सहकारी संस्थाओं के योगदान, ग्रामीण रोजगार सृजन में मत्स्य सहकारी समितियों की भूमिका तथा नाबार्ड, अपेक्स बैंक और जिला सहकारी बैंकों की जिम्मेदारियों पर अपने विचार रखे।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि सहकारिता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने का प्रभावी माध्यम है। सहकारिता के माध्यम से विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को गति देने के लिए सभी संस्थाओं के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।

कार्यक्रम में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायपुर के उपाध्यक्ष श्री अभिनेष कश्यप, राज्य सहकारी संघ के अध्यक्ष श्री सौरभ शर्मा, अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक एवं अपर आयुक्त श्री के.एन. कांडे, मत्स्य विभाग के संचालक श्री नाग, अपर आयुक्त श्रीमती सावित्री भगत, उपायुक्त श्रीमती किरण गुप्ता, संयुक्त आयुक्त श्री बसंत कुमार, श्री मुकेश ध्रुव, श्री तिग्गा, श्री बुनकर, श्री गौरीशंकर शर्मा, उपायुक्त श्री युगल किशोर तथा अपेक्स बैंक के डीजीएम श्री भूपेश चंद्रवंशी सहित सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इसके अलावा अपेक्स बैंक, जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों, लघु वनोपज संघ, दुग्ध महासंघ, सहकारी शक्कर कारखानों, एनसीडीसी तथा विभिन्न सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) के प्रतिनिधि और किसान उपस्थित रहे।

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"गुरु माँ, अब मंच पर आपकी जगह खाली रहेगी..."पद्म विभूषण तीजन बाई को उनकी शिष्या की अश्रुपूरित श्रद्धांजलि

 

 

 

 

विश्वविख्यात पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण तीजन बाई पंचतत्व में विलीन हो गईं, लेकिन उनके जाने के बाद उनके शिष्यों के मन में जो खालीपन है, उसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं है। उनकी शिष्या तरुणा साहू ने सोशल मीडिया पर एक अत्यंत भावुक संस्मरण साझा किया है, जो गुरु-शिष्य परंपरा, स्नेह और संस्कार का जीवंत दस्तावेज बन गया है।

 

तरुणा साहू लिखती हैं कि धमतरी जिले के छोटे से गांव गिधावा की एक साधारण बच्ची होने के नाते उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन उनका जीवन पंडवानी की विश्वविख्यात साधिका तीजन बाई से जुड़ जाएगा। जवाहर नवोदय विद्यालय में कक्षा छठवीं के दौरान आयोजित एक प्रशिक्षण शिविर में करीब 200 बच्चों के बीच से तीजन बाई ने उन्हें अपनी शिष्या के रूप में चुना। यही पल उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य बन गया।

 

उनके अनुसार, गुरु माँ ने उन्हें केवल पंडवानी की कला ही नहीं सिखाई, बल्कि अनुशासन, समर्पण, मेहनत, विनम्रता और जीवन जीने की सीख भी दी। समय के साथ उनका रिश्ता गुरु-शिष्या से आगे बढ़कर माँ-बेटी जैसा हो गया। जब भी वे गुरु माँ के घर जातीं, तीजन बाई अपने हाथों से खाना खिलातीं, बाल संवारतीं, मेकअप करतीं और अपने पास सुलातीं।

 

संस्मरण में बचपन की एक मासूम याद भी है। तरुणा बताती हैं कि गुरु माँ को पान खाना बहुत पसंद था। उन्हें लगता था कि शायद पान खाए बिना पंडवानी नहीं गाई जा सकती, इसलिए वे प्रस्तुति से पहले गुरु माँ से पान मांगती थीं। गुरु माँ मुस्कुराकर उन्हें पान देतीं और फिर वे पूरे उत्साह से पंडवानी गाती थीं। आज वही छोटी-सी याद उनकी सबसे बड़ी धरोहर बन गई है।

 

गुरु माँ के साथ उन्हें दिल्ली, भोपाल, उज्जैन के कालिदास समारोह, रायपुर सहित देश के कई प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुति देने का अवसर मिला। कई बार तीजन बाई एक प्रसंग का आधा भाग स्वयं गातीं और शेष भाग अपनी शिष्या को सौंप देतीं। यह विश्वास और स्नेह तरुणा के लिए जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा।

बाद में तरुणा साहू ने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) में निरीक्षक के रूप में सेवा का दायित्व संभाला, लेकिन उन्होंने पंडवानी और लोकसंस्कृति से अपना रिश्ता कभी नहीं तोड़ा। उनका कहना है कि वर्दी पहनकर देश की सेवा करना और मंच पर अपनी संस्कृति की सेवा करना—दोनों ही उन्हें गुरु माँ की प्रेरणा से मिले।

गुरु माँ की अंतिम विदाई के बाद भावुक शब्दों में उन्होंने लिखा कि आज ऐसा लगता है जैसे जीवन का एक मजबूत स्तंभ टूट गया हो। लेकिन उनकी आवाज, उनकी सीख, उनके संस्कार और उनकी पंडवानी हमेशा जीवित रहेंगे। जब भी वे मंच पर पंडवानी प्रस्तुत करेंगी, उन्हें महसूस होगा कि गुरु माँ सामने बैठकर मुस्कुरा रही हैं और उन्हें आशीर्वाद दे रही हैं।

अपने संस्मरण का समापन तरुणा साहू इन शब्दों के साथ करती हैं—

"मैं जीवन भर गर्व से कहती रहूँगी— मैं पद्म विभूषण तीजन बाई जी की शिष्या हूँ। यही मेरी सबसे बड़ी पहचान है, यही मेरा सबसे बड़ा सम्मान है।"

यह संस्मरण केवल एक शिष्या की श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि उस गुरु-शिष्य परंपरा का भावनात्मक दस्तावेज है, जिसने छत्तीसगढ़ की लोककला को विश्वभर में पहचान दिलाई।

साभार : तरुणा साहू की सार्वजनिक फेसबुक पोस्ट पर आधारित संस्मरण

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मानदेय, विकास निधि और पेंशन की मांग को लेकर एकजुट हुए जनपद सदस्य, राजधानी भेजा जाएगा प्रतिनिधिमंडल

 

 

 जिले के जनपद सदस्यों (बीडीसी) की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर रविवार को कैलाश गुफा स्थित सामुदायिक भवन में जिला स्तरीय बीडीसी संघ की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलेभर से पहुंचे जनपद सदस्यों ने मानदेय, भत्ता, जनपद विकास निधि और 15वें वित्त आयोग की राशि में बढ़ोतरी सहित कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में इन मांगों को शासन के समक्ष रखने के लिए संघ के पदाधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल राजधानी रायपुर भेजने का निर्णय लिया गया।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि जनपद सदस्य पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन उन्हें मिलने वाला मानदेय और विकास के लिए उपलब्ध संसाधन पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए जनपद सदस्यों के मानदेय एवं भत्ते में वृद्धि के साथ जनपद विकास निधि बढ़ाने की मांग शासन से की जाएगी।

बैठक को संबोधित करते हुए बीडीसी संघ के जिला अध्यक्ष गंगा राम भगत ने कहा कि जनपद सदस्यों की समस्याओं और मांगों को सरकार तक मजबूती से पहुंचाने के लिए संघ संगठित होकर कार्य करेगा। उन्होंने बताया कि जल्द ही प्रतिनिधिमंडल रायपुर जाकर शासन के समक्ष मांगपत्र प्रस्तुत करेगा।

बैठक का नेतृत्व कर रहीं कुनकुरी जनपद अध्यक्ष सुशीला साय ने कहा कि जनपद सदस्यों को अपने क्षेत्र के विकास के लिए पर्याप्त अधिकार और संसाधन मिलना जरूरी है। उन्होंने विधायक और सांसदों की तरह जनपद सदस्यों के लिए भी पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई। उनका कहना था कि इससे जनप्रतिनिधियों को सामाजिक सुरक्षा मिलेगी और पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को भी गति मिलेगी।

जिला पंचायत सदस्य गेंद बिहारी ने भी जनपद सदस्यों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि ये मांगें पूरी तरह न्यायसंगत हैं और सरकार को इस दिशा में सकारात्मक पहल करनी चाहिए।

बैठक में बीडीसी संघ के जिला उपाध्यक्ष विश्वनाथ सिदार, जिला सचिव कलम विश्वकर्मा, जिला मीडिया प्रभारी राकेश गुप्ता सहित कुनकुरी, पत्थलगांव, फरसाबहार और बगीचा जनपद पंचायतों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष तथा जिलेभर के सैकड़ों जनपद सदस्य मौजूद रहे। बैठक के समापन के बाद सभी जनप्रतिनिधियों ने सामूहिक भोजन भी किया।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को दी भावभीनी श्रद्धांजलि, कहा– छत्तीसगढ़ ने खो दी अपनी सांस्कृतिक धरोहर

 

 

 

 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पद्म विभूषण एवं पद्मश्री से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। डॉ. तीजन बाई का रविवार को रायपुर में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 70 वर्ष की थीं। 

मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला, संघर्ष और आजीवन साधना से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाई। पंडवानी जैसी लोककला को उन्होंने देश-विदेश तक पहुंचाकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया। उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा, "पद्म विभूषण और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. तीजन बाई का निधन हम सभी के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने पूरे देश और विश्व में छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। हम उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।"

मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करने तथा शोकाकुल परिजनों और उनके असंख्य प्रशंसकों को यह दुःख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।

डॉ. तीजन बाई ने पंडवानी की पारंपरिक शैली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और अपनी ओजस्वी प्रस्तुति के माध्यम से भारतीय लोककला को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्थापित किया। उनके निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश के कला एवं संस्कृति जगत में शोक की लहर है।

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छत्तीसगढ़ में शिक्षकों को बड़ी राहत, शिक्षा सत्र 2026-27 के अंत तक मिलेगी पुनर्नियुक्ति।

 

 

 

 

 छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने शासकीय एवं शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक संवर्ग (सहायक शिक्षक से प्राचार्य तक) को शिक्षा सत्र 2026-27 के अंत तक पुनर्नियुक्ति प्रदान करने की प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी है।

मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर से जारी आदेश के अनुसार यह स्वीकृति लोक शिक्षण संचालनालय के प्रस्ताव पर प्रदान की गई है। शासन ने संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय को निर्देश दिए हैं कि जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप पात्र शिक्षकों को शिक्षा सत्र 2026-27 के अंत तक पुनर्नियुक्ति देने की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए।

सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के शासकीय एवं शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था की निरंतरता बनी रहेगी। साथ ही विद्यार्थियों की पढ़ाई बिना किसी व्यवधान के जारी रखने में मदद मिलेगी।

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रामगढ़ महोत्सव में पहुंचे मुख्यमंत्री साय, सीताबेंगरा-जोगीमारा गुफाओं की विरासत को बताया विश्वस्तरीय धरोहर

 

 

 

 

 

 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड स्थित ऐतिहासिक रामगढ़ में आयोजित दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 के समापन समारोह में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला मानी जाने वाली सीताबेंगरा गुफा, जोगीमारा गुफा के प्राचीन शिलालेख और भित्तिचित्रों तथा प्राकृतिक सुरंग हाथीपोल का अवलोकन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रामगढ़ हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक चेतना, कला, आस्था और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह स्थल संस्कृति, इतिहास, साहित्य और पर्यटन का अद्भुत संगम है तथा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत को विश्व स्तर पर पहचान दिलाता है।

उन्होंने कहा कि रामगढ़ जैसी ऐतिहासिक धरोहरें हमारी सांस्कृतिक अस्मिता की अमूल्य निधि हैं। इनका संरक्षण और संवर्धन सामूहिक जिम्मेदारी है। राज्य सरकार इन धरोहरों को संरक्षित करने और पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।

कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री रामविचार नेताम, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

रामगढ़ की ऐतिहासिक पहचान

रामगढ़ पर्वत की पश्चिमी ढलान पर स्थित सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाएं भारतीय इतिहास, स्थापत्य, शिलालेख और चित्रकला की अनमोल धरोहर मानी जाती हैं। मान्यता है कि महाकवि कालिदास ने यहीं अपनी प्रसिद्ध कृति 'मेघदूतम्' की रचना की थी। इसी स्मृति में हर वर्ष आषाढ़ के प्रथम दिवस पर रामगढ़ महोत्सव आयोजित किया जाता है।

करीब 44 फीट लंबी सीताबेंगरा गुफा का प्राकृतिक रंगमंच, जोगीमारा गुफा के दूसरी-तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के भित्तिचित्र और प्राचीन शिलालेख इसे विश्वस्तरीय पुरातात्विक महत्व प्रदान करते हैं। वहीं लगभग 180 फीट लंबी हाथीपोल प्राकृतिक सुरंग अपनी अनूठी संरचना और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज सरगुजा और रायगढ़ के दौरे पर, रामगढ़ महोत्सव में होंगे शामिल

 

 

 

 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मंगलवार को सरगुजा और रायगढ़ जिले के दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री सुबह 11:00 बजे मुख्यमंत्री निवास, सिविल लाइन रायपुर में खेल एवं युवा कल्याण विभाग की बैठक लेंगे।

बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से सरगुजा जिले के उदयपुर पहुंचेंगे। दोपहर 1:00 बजे से 2:00 बजे तक वे रामगढ़, उदयपुर में आयोजित "रामगढ़ महोत्सव-2026" में शामिल होंगे। इसके बाद उनका आरक्षित कार्यक्रम रहेगा।

दोपहर बाद मुख्यमंत्री रायगढ़ जिले के खरसिया पहुंचेंगे, जहां 3:35 बजे से 4:05 बजे तक उनका आरक्षित कार्यक्रम निर्धारित है। इसके बाद वे हेलीकॉप्टर से रायपुर लौटेंगे और शाम 5:15 बजे मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर दिनभर के कार्यक्रम का समापन करेंगे।

मुख्यमंत्री के इस दौरे को लेकर सरगुजा और रायगढ़ जिला प्रशासन ने सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। सुरक्षा व्यवस्था और कार्यक्रम स्थल पर प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित की गई है।

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