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राज्यपाल श्री रमेन डेका ‘द्रोणाचार्य संगम-2026’ में हुए शामिल, कहा—समय का सदुपयोग और परिश्रम ही सफलता की कुंजी
राज्यपाल श्री रमेन डेका शिक्षक दिवस के अवसर पर एसईसीएल-डीएवी पब्लिक स्कूल, वसंत विहार, बिलासपुर में आयोजित ‘द्रोणाचार्य संगम-2026’ में शामिल हुए। इस अवसर पर शिक्षकों के उत्कृष्ट योगदान का सम्मान किया गया तथा शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले शिक्षकों को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया।
*इंटरनेट और तकनीक का सदुपयोग करते हुए युवा सही दिशा में आगे बढ़े*
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि समय का सही उपयोग जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज का दौर इंटरनेट और तकनीक का दौर है तथा बच्चे तेजी से एक ऐसी दुनिया में बड़े हो रहे हैं, जहां ज्ञान और सूचनाएं आसानी से उपलब्ध हैं। ऐसे में बच्चों और युवाओं को समय का सदुपयोग करते हुए सही दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
*आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कार एवं मूल्यों का समावेश भी आवश्यक*
राज्यपाल ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद देश के शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि पुराने समय में गुरुकुल परंपरा के माध्यम से गुरु विद्यार्थियों को शिक्षा और संस्कार प्रदान करते थे। समय के साथ शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन हुए हैं और आज आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कार एवं मूल्यों का समावेश भी आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि परिश्रम करने वालों को निश्चित रूप से सफलता मिलती है। जीवन में निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए और चुनौतियों से घबराना नहीं चाहिए।
*देशभक्ति और संस्कारों के महत्व पर जोर*
राज्यपाल ने वरिष्ठ नागरिकों से भी जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ जीने की अपील की। उन्होंने कहा कि जीवन में जो कुछ मिला है, उसके प्रति संतोष और कृतज्ञता का भाव रखना चाहिए तथा वर्तमान में रहकर जीवन का आनंद लेना चाहिए। उन्होंने देशभक्ति और संस्कारों के महत्व पर जोर दिया। बच्चों में देशभक्ति की भावना विकसित होने से देश को जागरूक और राष्ट्रभक्त नागरिक मिलेंगे। उन्होंने कहा कि समाज के निर्माण में परिवार और शिक्षकों दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शिक्षक केवल विद्यार्थियों को पढ़ाने का कार्य नहीं करते, बल्कि समाज को शिक्षित और जागरूक बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
*शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय एवं उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित*
इस अवसर पर आयोजित ‘द्रोणाचार्य संगम-2026’ में शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय एवं उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित शिक्षकों के समर्पण और उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की। कार्यक्रम में एसईसीएल और डीएवी के बीच शिक्षा के क्षेत्र में स्थापित सहयोग और साझेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया गया। ‘द्रोणाचार्य संगम-2026’ शिक्षकों के सम्मान, उनके अनुभवों के आदान-प्रदान और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
कार्यक्रम में संभागायुक्त श्री सुनील जैन, कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल, एसईसीएल के डायरेक्टर श्री बिरंची दास, श्री हिमांशु जैन, एसईसीएल के अन्य अधिकारी-कर्मचारी, डीएवी प्रबंधन, विभिन्न प्रोजेक्ट स्कूलों के प्रतिनिधि, शिक्षक-शिक्षिकाएं, विद्यार्थी एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
युवा किसान अंकित लकड़ा ने मछली पालन, मुर्गी पालन और बागवानी को जोड़कर तैयार किया एकीकृत कृषि मॉडल प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मिली 8 लाख रुपये की अनुदान सहायता
खेती में बदलाव केवल नई तकनीक से नहीं, बल्कि नई सोच से भी आता है। जशपुर जिले के ग्राम रतबा के युवा किसान अंकित लकड़ा ने इस बात को अपनी मेहनत और नवाचार से साबित किया है। कभी केवल बारिश के भरोसे धान की खेती करने वाले अंकित ने आज अपने खेत को मछली पालन, मुर्गी पालन, बागवानी और बहुफसली खेती से जोड़कर आय के कई स्रोत तैयार कर लिए हैं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय के अवसर बढ़ाने के लिए संचालित योजनाओं का लाभ अंकित को भी मिला है। योजनाओं से मिली सहायता और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने पारंपरिक खेती को आधुनिक और बहुआयामी कृषि मॉडल में बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
*धान की खेती से शुरू हुआ सफर, अब खेत में कई गतिविधियां*
अंकित लकड़ा बताते हैं कि पहले वे मुख्य रूप से बरसात के मौसम में धान की खेती करते थे। खेती से होने वाली आय को बढ़ाने के लिए उन्होंने कृषि और मत्स्य विभाग से जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने अपने खेत में दो तालाब तैयार कराए और मछली पालन शुरू किया।
तालाब बनने के बाद उनके खेत की तस्वीर ही बदल गई। तालाब के पानी का उपयोग गर्मी के मौसम में सिंचाई के लिए होने लगा। इससे वे अब वर्षा ऋतु के अलावा गर्मी में भी खेती कर पा रहे हैं। साथ ही खेत में आम और लीची सहित विभिन्न फलदार पौधे लगाए गए हैं, जिससे आने वाले समय में बागवानी भी उनकी अतिरिक्त आय का माध्यम बनेगी।
*एक ही संसाधन से मछली और मुर्गी पालन का नवाचार*
अंकित ने अपने दोनों तालाबों के ऊपर मुर्गी पालन के लिए शेड तैयार किया है। शेड की क्षमता करीब 1,000 से 1,200 मुर्गियों की है। उन्होंने मुर्गी पालन और मछली पालन को आपस में जोड़कर संसाधनों का बेहतर उपयोग करने का तरीका अपनाया है।
मुर्गियों से निकलने वाला अपशिष्ट तालाब में पहुंचकर मछलियों के लिए प्राकृतिक आहार के रूप में उपयोगी होता है। इससे मछली पालन में बाहरी आहार पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिलती है। इस तरह एक ही स्थान पर संचालित दो गतिविधियां एक-दूसरे को सहारा देती हैं और किसान को अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराती हैं।
*तालाब की मेड़ पर फलदार पौधे, दोहरा लाभ*
अंकित ने तालाब की मेड़ों पर आम सहित अन्य फलदार पौधे भी लगाए हैं। तालाब के पानी से इन पौधों की सिंचाई की जाती है। उनका कहना है कि मेड़ पर पेड़ लगाने से मिट्टी को मजबूती मिलती है और मेड़ के कटाव को रोकने में भी मदद मिलती है। वहीं आम और लीची जैसे फलदार पौधे भविष्य में अतिरिक्त आमदनी का जरिया बनेंगे।
इस प्रकार अंकित ने खेत के प्रत्येक हिस्से का उपयोग उत्पादन और आय बढ़ाने के लिए किया है। तालाब उनके लिए केवल मछली पालन का साधन नहीं, बल्कि सिंचाई, बागवानी और मुर्गी पालन से जुड़ी गतिविधियों का आधार बन गया है।
*8 लाख रुपये की अनुदान सहायता से मिला नवाचार को विस्तार*
अंकित को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मत्स्य पालन के लिए शासकीय सहायता मिली। मत्स्य विभाग से उन्हें करीब 8 लाख रुपये की अनुदान राशि प्राप्त हुई। इसके साथ पॉन्ड लाइनर, पॉलीथिन, बोर, मोटर और मछली आहार जैसी आवश्यक सामग्री की सुविधा भी मिली।
शासकीय योजना से मिली सहायता ने उनके लिए मछली पालन को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने का रास्ता आसान किया। अंकित बताते हैं कि विभागीय अधिकारियों से मिली जानकारी और मार्गदर्शन से उन्हें आधुनिक तरीके से मत्स्य पालन करने में काफी मदद मिली।
*बहुफसली खेती से बढ़े आमदनी के अवसर*
अंकित अब अपने खेत को केवल एक फसल तक सीमित नहीं रखते। मछली पालन और मुर्गी पालन के साथ वे अलग-अलग मौसम में विभिन्न फसलों की खेती और बागवानी कर रहे हैं। तालाब के पानी की उपलब्धता ने उन्हें गर्मी में भी खेती करने का अवसर दिया है।
इस बहुआयामी मॉडल से उन्हें सालभर अपने खेत से उत्पादन प्राप्त करने और आय के अलग-अलग स्रोत विकसित करने का अवसर मिल रहा है। उनके खेत में कृषि के साथ पशु एवं मत्स्य आधारित गतिविधियों का समन्वय ग्रामीण क्षेत्रों में एकीकृत कृषि प्रणाली की उपयोगिता को भी दर्शाता है।
*युवाओं के लिए खेती बना रहे हैं आकर्षक विकल्प*
अंकित लकड़ा की कहानी उन ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो खेती को केवल पारंपरिक तरीके से करने के बजाय इसे आधुनिक व्यवसाय के रूप में अपनाना चाहते हैं। उनका अनुभव बताता है कि उपलब्ध भूमि और पानी जैसे संसाधनों का बेहतर नियोजन, शासकीय योजनाओं की जानकारी और मेहनत के साथ खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
अंकित की पहल यह संदेश देती है कि खेती में नवाचार, योजनाओं का सही उपयोग और विभिन्न कृषि गतिविधियों का समन्वय किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में प्रभावी कदम साबित हो सकता है। उनका खेत अब सिर्फ फसल उत्पादन की जगह नहीं, बल्कि ग्रामीण उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक मिसाल बन गया है।
लोकधुनों और लोकनृत्यों से सजा ‘लोकरंग पर्व’, भरथरी गाथा ने बांधा समां
छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, लोकगायन और लोकनृत्य की विविध परंपराओं को संरक्षित करने और कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘लोकरंग पर्व’ का रविवार को रायपुर स्थित मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर में भव्य शुभारंभ हुआ। 6 से 8 सितंबर तक चलने वाले इस आयोजन में प्रदेश की पारंपरिक लोकविधाओं की विविध रंगत देखने को मिल रही है।
कार्यक्रम के पहले दिन मुक्ताकाशी मंच पर छत्तीसगढ़ी लोकधुनों और पारंपरिक लोकगाथाओं ने ऐसा समां बांधा कि दर्शक लोकसंस्कृति की जीवंत दुनिया से जुड़ते नजर आए। आयोजन की शुरुआत भरथरी गाथा की प्रस्तुति से हुई। इसके बाद कलाकारों ने पंडवानी, देवार गीत और भरथरी गाथा सहित विभिन्न लोकविधाओं की प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं।
*लोककलाओं की विविधता ने मोहा मन*
लोकरंग पर्व में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोकविधाओं से जुड़े कलाकारों को अपनी कला प्रस्तुत करने का अवसर दिया जा रहा है। आयोजन में भरथरी गाथा, देवार गीत, करमा नृत्य, सरहुल, लोरिक-चंदा, ददरिया, पंडवानी और पंथी जैसी विविध लोककलाओं की प्रस्तुतियां शामिल हैं।
पहले दिन सुश्री दुर्गा साहू ने पंडवानी, श्रीमती पूनम तिवारी ने देवार गीत तथा सुश्री अरुणिमा शर्मा ने भरथरी गाथा की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। कलाकारों की प्रस्तुतियों में छत्तीसगढ़ की लोकजीवन की संवेदना, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई दी।
*स्थानीय कलाकारों को मंच देना आयोजन का प्रमुख उद्देश्य*
कार्यक्रम के संचालक एवं संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि स्थानीय मंचों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोकविधाओं से जुड़े कलाकारों को प्रोत्साहन मिलता है और उन्हें अपनी कला के प्रदर्शन का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन प्रदेश की ‘सुघर’ संस्कृति, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने के साथ युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोककलाएं केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनमें प्रदेश के इतिहास, सामाजिक जीवन, लोकविश्वास और सामुदायिक परंपराओं की गहरी छाप दिखाई देती है। ऐसे आयोजनों के जरिए इन परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
*कला-संस्कृति प्रेमियों की रही मौजूदगी*
लोकरंग पर्व के शुभारंभ अवसर पर संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, उपसंचालक श्री उमेश मिश्रा, छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कवि मीर अली मीर, बॉलीवुड अभिनेत्री श्वेता पड्डा , वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार श्री दीपेंद्र दीवान, साहित्यकार श्री विजय मिश्रा सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं कला-संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।
*8 सितंबर तक जारी रहेगा लोकसंस्कृति का उत्सव*
तीन दिवसीय लोकरंग पर्व 8 सितंबर तक चलेगा। आगामी दिनों में भी छत्तीसगढ़ की विभिन्न लोकविधाओं से जुड़े कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। आयोजन के माध्यम से रायपुरवासियों को प्रदेश की पारंपरिक लोककलाओं, लोकसंगीत, लोकगाथाओं और लोकनृत्यों की विविधता को करीब से देखने और सुनने का अवसर मिल रहा है।
मुक्ताकाशी मंच पर सजी यह सांस्कृतिक संध्या छत्तीसगढ़ की उस लोकपरंपरा की तस्वीर प्रस्तुत कर रही है, जिसमें माटी की महक, लोकजीवन की सहजता और पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत एक साथ दिखाई देती है।
जशपुर के डॉ. धीरेंद्र अग्रवाल पर कथित रिश्वत का वायरल वीडियो, जिला जांच समिति ने जुटाए डिजिटल साक्ष्य, शपथपूर्वक बयान में मुकेश्वर ने कहा फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए मांगे एक हजार ....
जिला चिकित्सालय जशपुर में पदस्थ डॉ. धीरेंद्र कुमार अग्रवाल पर चिकित्सा फिटनेस प्रमाण पत्र बनाने के एवज में कथित रूप से रिश्वत मांगने और लेने के आरोपों की जांच अब दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्यों तक पहुंच गई है। मामले में सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने जांच समिति गठित की। समिति के समक्ष शिकायतकर्ता मुकेश्वर राम का शपथपूर्वक बयान दर्ज किया गया, वहीं कथित घटना से संबंधित वीडियो को भी डिजिटल साक्ष्य के रूप में रिकॉर्ड पर लिया गया है।
फिटनेस प्रमाण पत्र के लिए ₹1 हजार मांगने का दावा
मुकेश्वर राम ने जांच समिति के समक्ष दिए अपने शपथपूर्वक कथन में बताया कि 4 जुलाई 2026 को वह अपने दोस्त सहिन्द्र राम और करिश्मा बाई के साथ जिला अस्पताल जशपुर पहुंचे थे। करिश्मा बाई को पोस्ट मैट्रिक छात्रावास में प्रवेश के लिए चिकित्सा फिटनेस प्रमाण पत्र की आवश्यकता थी।
मुकेश्वर के बयान के अनुसार, डॉ. धीरेंद्र अग्रवाल से फिटनेस प्रमाण पत्र बनाने के लिए संपर्क किया गया। आरोप है कि डॉक्टर ने प्रमाण पत्र बनाने के बदले ₹1,000 की मांग की। जब उनके द्वारा तत्काल पैसे नहीं होने की बात कही गई तो कथित रूप से प्रमाण पत्र नहीं बनाने की बात कही गई।
बयान में मुकेश्वर ने आगे बताया कि छात्रावास में प्रवेश के लिए प्रमाण पत्र आवश्यक होने के कारण उनके साथ मौजूद सहिन्द्र राम के पास रखे ₹500 दिए गए, जिसके बाद डॉक्टर ने फिटनेस प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर किए।
घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग का भी दावा
शपथपूर्वक बयान में मुकेश्वर राम ने दावा किया कि उन्होंने पूरी घटना को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड किया था। उन्होंने इस वीडियो रिकॉर्डिंग को जांच के दौरान साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करने की बात कही है।
मामले से संबंधित सामने आए इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रमाण-पत्र में वीडियो फाइल का नाम दर्ज है। दस्तावेज में फाइल का आकार और उसके विवरण भी दर्ज किए गए हैं। दस्तावेज में मुकेश्वर राम को इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रस्तुत करने वाला व्यक्ति बताया गया है।
इससे यह सामने आता है कि जांच में कथित वायरल वीडियो को केवल सोशल मीडिया सामग्री के तौर पर नहीं, बल्कि डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेजों के साथ जांच प्रक्रिया में शामिल किया गया है।
10 जुलाई को सीएम हेल्पलाइन में शिकायत
मुकेश्वर राम ने अपने शपथपूर्वक कथन में बताया है कि घटना के बाद उन्होंने 10 जुलाई 2026 को शाम लगभग 5:30 बजे सीएम हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत की थी।
इसके बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय, जशपुर की ओर से 29 जुलाई 2026 को पत्र जारी कर मुकेश्वर राम और सेन्द्रा राम को जांच समिति की बैठक में उपस्थित होने के लिए कहा गया।
पत्र में डॉ. धीरेंद्र कुमार अग्रवाल के विरुद्ध की गई शिकायत की विस्तृत जांच के लिए जांच समिति गठित किए जाने का उल्लेख है।
जांच समिति की बैठक 31 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजे कलेक्टर कार्यालय, जशपुर के कक्ष क्रमांक 37 में आयोजित की गई। इसी जांच प्रक्रिया में मुकेश्वर राम का शपथपूर्वक कथन दर्ज किया गया।
जीरो टॉलरेंस की नीति के बीच प्रशासन की कार्रवाई पर नजर
प्रदेश सरकार की ओर से भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति पर लगातार जोर दिया जाता रहा है। ऐसे में जिला अस्पताल के डॉक्टर से जुड़े कथित रिश्वतखोरी के इस मामले में शिकायत के बाद जांच समिति का गठन, शिकायतकर्ता का शपथपूर्वक बयान और डिजिटल रिकॉर्ड से संबंधित दस्तावेज जुटाया जाना जांच की गंभीरता को दर्शाता है।
अब जांच समिति के सामने चुनौती वीडियो की वास्तविकता, उसमें दर्ज घटनाक्रम, शिकायतकर्ता के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण कर निष्कर्ष तक पहुंचने की है।
फिलहाल डॉ. धीरेंद्र कुमार अग्रवाल पर लगाए गए रिश्वत के आरोप जांच के अधीन हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच समिति की रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी। मामले में डॉक्टर का पक्ष और जांच समिति का अंतिम निष्कर्ष भी महत्वपूर्ण होगा।
बड़ा सवाल यह है कि क्या वायरल वीडियो और शपथपूर्वक बयान में किए गए दावे जांच में सही साबित होंगे? क्या डिजिटल साक्ष्य के परीक्षण के बाद डॉ. अग्रवाल पर कार्रवाई होगी?अब नजर जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट और प्रशासन के अगले कदम पर है।
CGPSC घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, उत्कर्ष चंद्राकर गिरफ्तार,जशपुर,रायपुर समेत 4 जिलों में 5 ठिकानों पर छापेमारी।
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की वर्ष 2020 और 2021 की परीक्षाओं में कथित अनियमितता, प्रश्नपत्र लीक और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है। ED के रायपुर जोनल कार्यालय ने 1 सितंबर को रायपुर, दुर्ग, धमतरी और जशपुर जिलों में पांच ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।
ED के मुताबिक यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 के तहत की गई। जांच CGPSC के तत्कालीन चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी के खिलाफ EOW-ACB रायपुर और CBI/ACB रायपुर में दर्ज दो FIR के आधार पर आगे बढ़ी।
प्रश्नपत्र लीक कर रिश्तेदारों और चयनित अभ्यर्थियों को पहुंचाने का आरोप
ED की जांच में कथित तौर पर सामने आया कि CGPSC परीक्षाओं के प्रश्नपत्र आरोपियों के रिश्तेदारों और चुनिंदा अभ्यर्थियों तक निजी बिचौलियों के माध्यम से पहुंचाए गए। इसके बदले अवैध तरीके से रकम लेने और वरिष्ठ सरकारी पदों, जिसमें डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी एसपी जैसे पद शामिल हैं, पर चयन प्रभावित करने के आरोप हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने CGPSC-2021 के लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के आश्वासन के बदले नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों से नकद राशि एकत्र की। ED ने दावा किया है कि इस प्रक्रिया में 3 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से अर्जित रकम सामने आई, जिसमें से लगभग 2.80 करोड़ रुपये अनिल चंद्राकर को दिए जाने की बात जांच में सामने आई है।
पूर्व मुख्यमंत्री कार्यालय के नाम और प्रभाव के इस्तेमाल का भी आरोप
ED के अनुसार उत्कर्ष चंद्राकर ने नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों से प्रभाव डालने और पैसे लेने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री के निजी सहायक रहे के.के. चंद्रवंशी के नाम, पद और प्रभाव का इस्तेमाल किया। एजेंसी ने यह भी कहा है कि उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (OSD) के पद पर रहे अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया।
1 सितंबर को उत्कर्ष चंद्राकर गिरफ्तार
ED ने बताया कि मामले में इससे पहले 3 जून 2026 को भी तलाशी ली गई थी। मोबाइल फोन से मिले डिजिटल साक्ष्यों, बैंक खातों के विश्लेषण और PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों के आधार पर एजेंसी का दावा है कि उत्कर्ष चंद्राकर अपराध से अर्जित धन के निर्माण, अधिग्रहण, कब्जे, छिपाने, लेयरिंग, हस्तांतरण और उपयोग जैसी गतिविधियों में कथित रूप से शामिल थे।
इसके बाद उन्हें 1 सितंबर 2026 को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया।
दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त
ED की तलाशी में कथित तौर पर मामले से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्ति संबंधी दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए गए हैं।
ED ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है।
नक्सलवाद के अंधेरे से निकलकर विकास की नई इबारत लिख रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि दशकों तक नक्सलवाद की चुनौती का सामना करने वाला छत्तीसगढ़ आज शांति, विश्वास और विकास के एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। नक्सलवाद के अंधेरे से बाहर निकलकर प्रदेश अब विकास की नई इबारत लिख रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, अधोसंरचना, पर्यटन और आजीविका सहित सर्वांगीण विकास के प्रत्येक क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम धरातल पर दिखाई देने लगे हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी रायपुर में टाइम्स नाउ नवभारत डॉट कॉम द्वारा आयोजित ‘विकसित भारत-समृद्ध छत्तीसगढ़ : विकास का नया अध्याय’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प देश के सामने रखा है। इसी संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ ने भी विकसित राज्य बनने का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। प्रदेश के विजन डॉक्यूमेंट के अंतर्गत 10 प्रमुख मिशन निर्धारित किए गए हैं और उन्हें धरातल पर उतारने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ संभावनाओं से भरपूर राज्य है। प्रदेश का लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है और यहां लोहा, बॉक्साइट, लिथियम, सोना सहित अनेक महत्वपूर्ण खनिज संसाधन उपलब्ध हैं। छत्तीसगढ़ देश का एकमात्र टिन उत्पादक राज्य भी है। प्राकृतिक संसाधनों की इस समृद्धि के साथ प्रदेश की मेहनतकश मानव शक्ति हमारी सबसे बड़ी ताकत है। इन क्षमताओं का समुचित उपयोग कर छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में देश के विकास में और बड़ी भूमिका निभाएगा।
*सुरक्षा और विकास की समन्वित रणनीति से बदली बस्तर की तस्वीर*
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि लंबे समय तक नक्सलवाद प्रदेश, विशेषकर बस्तर के विकास में सबसे बड़ी बाधा बना रहा। वर्ष 2023 में राज्य में सरकार बनने के बाद जनवरी 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की स्थिति की समीक्षा की। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकार ने समन्वय के साथ नई रणनीति पर काम शुरू किया। पड़ोसी राज्यों के साथ बेहतर तालमेल और सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई ने नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान को निर्णायक गति दी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक सफलता मिली है। नई रणनीति की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि सुरक्षा बलों ने पूरी मजबूती से अभियान चलाते हुए पहले की तुलना में अपने जवानों की क्षति को कम रखा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर की जनता ने लगभग चार दशकों तक नक्सल हिंसा का दंश झेला है। नक्सली स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया और संचार सुविधाओं जैसे विकास कार्यों का विरोध करते थे, जिसके कारण अनेक दूरस्थ क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से कटे रहे। इसलिए सरकार ने नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई के साथ-साथ विकास को भी समान प्राथमिकता दी।
*‘नियद नेल्लानार’ ने दूरस्थ गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा*
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार शुरू से स्पष्ट थी कि केवल नक्सल समस्या को समाप्त करना पर्याप्त नहीं होगा। स्थायी शांति के लिए बस्तर के प्रत्येक गांव और प्रत्येक परिवार तक विकास का लाभ पहुंचाना आवश्यक है। इसी सोच के साथ ‘नियद नेल्लानार’ योजना शुरू की गई। गोंडी भाषा में इसका अर्थ है - ‘आपका अच्छा गांव’।
उन्होंने बताया कि इस योजना के माध्यम से दूरस्थ और संवेदनशील गांवों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और दूरसंचार जैसी बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं। क्षेत्र में 421 से अधिक स्कूल खोले गए हैं और दूरसंचार नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। विकास को और गति देने के लिए सरकार ने ‘नियद नेल्लानार 2.0’ भी प्रारंभ किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने बस्तर को देश का सबसे सुंदर आदिवासी संभाग बनाने का संकल्प व्यक्त किया है और राज्य सरकार इसी लक्ष्य के अनुरूप बस्तर के समग्र विकास पर काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है और लगभग 40 हजार लोगों का उपचार किया गया है। ‘बस्तर मुन्ने’ कार्यक्रम के माध्यम से शासकीय अमला गांवों में पहुंचकर और वहां ठहरकर लोगों को योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ उपलब्ध करा रहा है।
*शांति लौटने के साथ बस्तर में आजीविका और पर्यटन की नई संभावनाएं*
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर में शांति स्थापित होने के साथ अब रोजगार, आजीविका और पर्यटन के नए अवसर भी तेजी से विकसित हो रहे हैं। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के साथ समझौता किया गया है। बकरी पालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और जीवनशैली पूरी दुनिया को आकर्षित कर रही है। बस्तर के धुड़मारास गांव को दुनिया के श्रेष्ठ पर्यटन गांवों में शामिल किया गया है। यहां आने वाले देश-विदेश के पर्यटक होम-स्टे में रहकर स्थानीय जनजातीय जीवन और संस्कृति को निकट से अनुभव कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में होम-स्टे को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ऋण एवं अनुदान की सुविधा दे रही है। पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से नई औद्योगिक नीति में पर्यटन को भी शामिल किया गया है। नक्सलवाद की समाप्ति के बाद खाली हो रहे लगभग 70 सुरक्षा कैंपों को ‘सेवा डेरा’ के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
*हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों के लिए खोले पुनर्वास के द्वार*
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार की रणनीति केवल सुरक्षा कार्रवाई तक सीमित नहीं रही। हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों के लिए बेहतर आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति तैयार की गई। सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया कि हिंसा छोड़कर लौटने वालों के साथ न्याय होगा और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार ने हिंसा की जगह संवाद और पुनर्वास को प्राथमिकता दी, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए और बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा का रास्ता चुना। मुख्यमंत्री ने कहा कि सशस्त्र नक्सलवाद समाप्त होने के बाद भी वैचारिक स्तर पर भ्रम फैलाने की कोशिश करने वाले कुछ तत्व मौजूद हैं, लेकिन बस्तर में तेजी से पहुंचता विकास और लोगों के जीवन में आ रहा सकारात्मक परिवर्तन ऐसे भ्रम का सबसे प्रभावी उत्तर है।
*युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा और रोजगार पर विशेष जोर*
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। प्रत्येक विकासखंड तक उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ी है और आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपल आईटी जैसे राष्ट्रीय महत्व के प्रतिष्ठित संस्थान प्रदेश में संचालित हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। दिल्ली में यूथ हॉस्टल के माध्यम से युवाओं को यूपीएससी की तैयारी में सहयोग दिया जा रहा है। प्रदेश में 34 नालंदा परिसरों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को अध्ययन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों की शिक्षा और उनके बेहतर भविष्य के लिए भी सरकार अनेक सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। सरकार का प्रयास है कि आर्थिक परिस्थितियां किसी प्रतिभाशाली बच्चे के सपनों की राह में बाधा न बनें।
*नई औद्योगिक नीति से निवेश और रोजगार को मिल रही नई गति*
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नई औद्योगिक नीति के माध्यम से छत्तीसगढ़ में उद्योग, निवेश और रोजगार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और इनका असर धरातल पर भी दिखाई देने लगा है।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि उसके माध्यम से प्रदेश के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार करना है। इसी उद्देश्य से एक हजार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने वाले उद्यमों के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।
*“किसान परिवार से मिली मेहनत और जिम्मेदारी की सीख”*
कार्यक्रम में अपनी जीवनयात्रा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वे किसान परिवार से आते हैं और खेती उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रही है। दस वर्ष की आयु में पिता के निधन के बाद परिवार के बड़े बेटे के रूप में कम उम्र में ही उन्हें जिम्मेदारियां संभालनी पड़ीं। बचपन से खेती करते हुए उन्होंने परिश्रम, धैर्य और जिम्मेदारी का महत्व सीखा।
उन्होंने कहा कि राजनीति में आने की उनकी कोई पूर्व योजना नहीं थी। गांव के लोगों के आग्रह पर पहली बार वार्ड पंच का चुनाव लड़ा और जनप्रतिनिधि के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरुआत हुई। पांच वर्ष तक पंच के रूप में किए गए कार्यों के आधार पर गांववासियों ने उन्हें निर्विरोध सरपंच चुना। इसके बाद वर्ष 1990 में तपकरा विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बने। अविभाजित मध्यप्रदेश में दो बार विधायक और रायगढ़ से चार बार सांसद के रूप में जनता की सेवा का अवसर मिला।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर मिला और आज छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा का महत्वपूर्ण दायित्व मिला है। सार्वजनिक जीवन में जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाने का प्रयास किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ के सामने संभावनाओं का नया आकाश है। नक्सलवाद की बाधा दूर होने के साथ बस्तर सहित पूरा प्रदेश विकास की नई गति पकड़ रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध छत्तीसगढ़ मानव विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग और पर्यटन में भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो तथा वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण में ‘विकसित छत्तीसगढ़’ अपनी सशक्त भूमिका निभाए।
कार्यक्रम में टाइम्स नाउ नवभारत डॉट कॉम के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
कटिंग-पॉलिशिंग के आधुनिक प्रशिक्षण के लिए पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय बनेगा नॉलेज पार्टनर, ‘बस्तर ब्रांड’ को मिलेगा बढ़ावा
नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के अनुरूप छत्तीसगढ़ में खनिज संसाधनों के दोहन के साथ-साथ उनके स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (CMDC) द्वारा बीजापुर जिले के कुचनूर क्षेत्र में लगभग 25 वर्षों के अंतराल के बाद कोरंडम खदान का पुनः संचालन किया गया है। कोरंडम के खनन से लेकर उसकी कटिंग, पॉलिशिंग, आभूषण निर्माण, ब्रांडिंग और विपणन तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने के उद्देश्य से CMDC और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के बीच मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी में नया रायपुर स्थित मेफेयर रिज़ॉर्ट में यह महत्वपूर्ण एमओयू सम्पन्न हुआ। विश्वविद्यालय को नॉलेज पार्टनर के रूप में चयनित किया गया है, जिसके माध्यम से स्थानीय युवाओं और शिल्पकारों को आधुनिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा।
*वैज्ञानिक पद्धति से हो रहा उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम का उत्खनन*
प्रदेश में कोरंडम खनिज के दोहन एवं विपणन के लिए CMDC और संयुक्त उपक्रम साझेदार मेसर्स एन.सी. नाहर के मध्य गठित छत्तीसगढ़ कोरंडम माइन्स लिमिटेड के माध्यम से बीजापुर जिले के भोपालपट्टनम क्षेत्र के ग्राम कुचनूर में कोरंडम खदान संचालित की जा रही है। लगभग 25 वर्षों के अंतराल के बाद फरवरी 2025 से खदान का पुनः संचालन करते हुए उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम का वैज्ञानिक पद्धति से उत्खनन किया जा रहा है। वर्तमान में खदान से उत्खनित कोरंडम का लगभग 240 किलोग्राम भंडारण है, जिसमें से 157.643 किलोग्राम का परिवहन किया जा चुका है। परिवहन किए गए कोरंडम में 107.989 किलोग्राम बी-ग्रेड तथा 49.654 किलोग्राम औद्योगिक ग्रेड कोरंडम शामिल है।
*खनन के साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार*
कुचनूर कोरंडम खदान के संचालन से बीजापुर जिले के 14 स्थानीय युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार और CMDC का प्रयास है कि खनिज आधारित गतिविधियों का लाभ केवल खनन तक सीमित न रहे, बल्कि स्थानीय समुदायों, युवाओं, शिल्पकारों, स्वयं सहायता समूहों और उद्यमियों की भागीदारी से आय के नए अवसर सृजित हों।
*कटिंग-पॉलिशिंग के प्रशिक्षण से बढ़ेगा मूल्य संवर्धन*
कोरंडम से अधिकतम मूल्य प्राप्त करने के लिए स्थानीय स्तर पर जेम्स्टोन हैंडलिंग, कटिंग, पॉलिशिंग और अन्य वैल्यू एडिशन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय को नॉलेज पार्टनर बनाया गया है। आधुनिक तकनीक पर आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से स्थानीय युवाओं को रत्नों की पहचान और कौशल गतिविधियों में दक्ष बनाया जाएगा। इससे उन्हें रोजगार के साथ स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के अवसर भी मिलेंगे।
*‘बस्तर ब्रांड’ के तहत आभूषण और रत्न उत्पादों को मिलेगा बाजार*
कुचनूर से प्राप्त उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम को ‘बस्तर ब्रांड’ के तहत स्थानीय डिजाइन, गुणवत्ता और प्रमाणिकता से जोड़ने की योजना है। कोरंडम से आभूषण एवं रत्न उत्पाद तैयार कर उनकी ब्रांडिंग और मार्केटिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे बस्तर की स्थानीय कला, शिल्प और प्राकृतिक खनिज संपदा को एक साथ बाजार से जोड़ने में मदद मिलेगी। स्थानीय इकाइयों, स्टार्टअप्स, शिल्पकारों और निवेशकों की भागीदारी से कोरंडम आधारित नए उद्यम विकसित किए जा सकेंगे।
*नए कोरंडम क्षेत्रों की पहचान और अन्वेषण जारी*
बीजापुर जिले में कोरंडम से जुड़े नए संभावित क्षेत्रों की पहचान, अन्वेषण एवं पूर्वेक्षण का कार्य भी जारी है। भोपालपट्टनम क्षेत्र में ग्राम कुचनूर सहित अन्य संभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर खनन गतिविधियों के विस्तार की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। धनगोल सहित विभिन्न इलाकों में क्षेत्र आरक्षित कर आवेदन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।
*पारदर्शी नीलामी से सरकार को राजस्व, बस्तर को मिलेगी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान*
उत्खनित कोरंडम की पारदर्शी तरीके से नीलामी से राज्य सरकार के राजस्व में वृद्धि के साथ बस्तर क्षेत्र के कोरंडम को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की संभावनाएं बढ़ेंगी। खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक एवं सतत उपयोग के साथ स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन होने से खनिज की वास्तविक आर्थिक क्षमता का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। CMDC की यह पहल ‘खनन से मूल्य संवर्धन, मूल्य संवर्धन से रोजगार और रोजगार से आर्थिक सशक्तिकरण’ की अवधारणा को जमीन पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य केवल कोरंडम का उत्खनन करना नहीं, बल्कि स्थानीय युवाओं और समुदायों को पूरी वैल्यू चेन का भागीदार बनाकर बस्तर की खनिज संपदा को स्थानीय समृद्धि और आत्मनिर्भरता का आधार बनाना है।
शहीद उप निरीक्षक युगल किशोर वर्मा की धर्मपत्नी माधुरी वर्मा ने बांधी राखी तो भावुक हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
रायपुर, 25 अगस्त 2026/ रक्षाबंधन से पहले राजधानी रायपुर में आज राखी की एक ऐसी डोर बंधी, जिसमें भाई-बहन का निश्छल स्नेह भी था, शहादत का सम्मान भी और वर्षों तक नक्सल हिंसा का दंश झेलने वाले परिवारों के प्रति आत्मीयता भी। बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित ‘स्नेह की डोर’ कार्यक्रम में नक्सली मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त उप निरीक्षक श्री युगल किशोर वर्मा की धर्मपत्नी श्रीमती माधुरी वर्मा ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की कलाई पर राखी बांधी। इस आत्मीय क्षण में मुख्यमंत्री भावुक हो उठे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने भावुक स्वर में कहा, “मेरी कोई सगी बहन नहीं है। हम लोग भाई ही भाई हैं। आज माधुरी जी ने मेरी कलाई पर राखी बांधी है। मुझे सगी बहन से भी बढ़कर बहन मिली है।”
मुख्यमंत्री के इन शब्दों के साथ पूरा वातावरण भावुक हो उठा। एक ओर वह बहन थी, जिसने मातृभूमि और प्रदेश की सुरक्षा के लिए अपने जीवनसाथी को खोया था, दूसरी ओर प्रदेश का मुखिया था, जिसने उसकी राखी को केवल रक्षा सूत्र नहीं, बल्कि जीवनभर निभाए जाने वाले भाई-बहन के आत्मीय रिश्ते के रूप में स्वीकार किया।
मुख्यमंत्री ने श्रीमती माधुरी वर्मा को भरोसा दिलाया कि शहीद श्री युगल किशोर वर्मा का परिवार उनका अपना परिवार है। उन्होंने कहा कि शहीदों के परिवार कभी अकेले नहीं हैं। उनके सुख-दुःख, सम्मान और भविष्य की चिंता करना सरकार का दायित्व ही नहीं, बल्कि हम सभी का आत्मीय कर्तव्य है। आज बहन माधुरी ने राखी बांधी है तो एक भाई के रूप में उनके परिवार के प्रति जिम्मेदारी और भी गहरी हो गई है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने शहीद उप निरीक्षक श्री युगल किशोर वर्मा के सर्वोच्च बलिदान को नमन करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ अपने वीर जवानों और उनके परिवारों का सदैव ऋणी रहेगा। हमारे जवानों ने अपना आज इसलिए न्योछावर किया, ताकि छत्तीसगढ़ की आने वाली पीढ़ियों का कल सुरक्षित हो सके।
त्रिकुंडा जलाशय हादसा: लापरवाही के आरोपों के बीच बुजुर्ग का शव बरामद, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग।
बलरामपुर। त्रिकुंडा जलाशय में तेज बहाव में बहे बुजुर्ग का शव आखिरकार बरामद कर लिया गया है। एनडीआरएफ और रेस्क्यू टीम की कड़ी मशक्कत के बाद शव मिलने से तलाश अभियान समाप्त हुआ, लेकिन हादसे के बाद जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि बुजुर्ग स्लूज गेट से निकल रहे तेज बहाव की चपेट में आकर बह गए थे। आरोप है कि मौके पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी और बिना सेफ्टी बेल्ट तथा लाइफ जैकेट के तेज बहाव वाले क्षेत्र में उतरने की स्थिति बनी। हादसे के बाद विभागीय अधिकारियों की भूमिका को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है।
मामले को लेकर जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता एन.पी. डहरिया के कथित बयान—“शायद नशे में था व्यक्ति”—पर भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। मृतक के परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि घटना की गंभीरता के बजाय जिम्मेदारी से बचने वाला रवैया अपनाया गया।
पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह भी मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात कर ढांढस बंधाया। उन्होंने घटना को गंभीर लापरवाही बताते हुए मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने, दोषी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में यह पहली गंभीर घटना नहीं है। चनान नदी और लुत्ती बांध की पूर्व घटनाओं का हवाला देते हुए ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि लगातार हादसों के बावजूद जल संसाधन विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ठोस कदम क्यों नहीं उठाए।
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि यदि जलाशय का क्षेत्र प्रतिबंधित और संवेदनशील था, तो आम नागरिक वहां तक कैसे पहुंचा? सुरक्षा घेरा, चेतावनी बोर्ड, निगरानी और मौके पर तैनात अमले की भूमिका को लेकर भी जांच की मांग उठ रही है।
घटना के बाद क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल है। ग्रामीणों ने शासन से रामानुजगंज जल संसाधन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच, दोषियों पर कार्रवाई और भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
अब निगाह इस बात पर है कि हादसे के लिए जिम्मेदारी तय होती है या मामला सिर्फ जांच और कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाता है।
मुख्यमंत्री ने पंडरीपानी में 24.70 लाख रुपए की लागत से निर्मित महतारी सदन का किया लोकार्पण मुख्यमंत्री ने 64.49 लाख रुपए के लागत के 6 विकासकार्यों का किया लोकार्पण-भूमिपूजन
जशपुरनगर, 26 अगस्त 2026/ भाई-बहन के अटूट और निश्छल प्रेम के पर्व रक्षाबंधन के पूर्व मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज विकासखंड फरसाबहार के ग्राम पंचायत पंडरीपानी में 24.70 लाख रुपए की लागत से निर्मित महतारी सदन का लोकार्पण कर इसे क्षेत्र की माताओं-बहनों को उपहारस्वरूप समर्पित किया। महतारी सदन में हॉल, किचन, स्टोर, कार्यालय कक्ष तथा दुकान संचालन के लिए पृथक स्थान सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह केंद्र महिलाओं के प्रशिक्षण, बैठकों, उत्पादन, विपणन एवं विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के संचालन के लिए एक स्थायी और सुसज्जित स्थल के रूप में उपयोगी साबित होगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी सदन गांव की माताओं-बहनों के लिए केवल एक भवन नहीं, बल्कि उनके सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। इसके माध्यम से महिलाओं को अपनी बैठकों, प्रशिक्षण, स्व-सहायता समूहों की गतिविधियों तथा विभिन्न आर्थिक कार्यों के संचालन के लिए स्थायी, सुविधाजनक और बेहतर स्थान उपलब्ध होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 481 महतारी सदनों की स्वीकृति दी गई है। हमारी माताएं-बहनें घर-परिवार की जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन करने के साथ-साथ स्व-सहायता समूहों से जुड़कर गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि पण्डरीपानी का यह महतारी सदन महिलाओं की बैठकों, प्रशिक्षण, उत्पाद निर्माण, विपणन और अन्य आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनेगा। यह सदन महिलाओं को एक-दूसरे से सीखने, अपने कौशल को निखारने और नई आर्थिक संभावनाओं से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जब हमारी माताएं-बहनें सशक्त और आत्मनिर्भर होंगी, तो परिवार मजबूत होगा, गांव समृद्ध होगा और इसी से विकसित एवं समृद्ध छत्तीसगढ़ का निर्माण होगा। महिलाओं की प्रगति ही प्रदेश की प्रगति का आधार है।
*मुख्यमंत्री ने 6 विकासकार्यों का किया लोकार्पण-भूमिपूजन*
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने ग्राम पंचायत पंडरीपानी के विकास के लिए 64.49 लाख रुपए की लागत के 6 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इनमें 24.70 लाख रुपए की लागत से निर्मित महतारी सदन, 10 लाख रुपए की लागत से सिसरिंगा बस्ती में सीसी सड़क निर्माण, 7.80 लाख रुपए की लागत से महलीटोली पहुंच मार्ग में सीसी रोड निर्माण तथा 3.99 लाख रुपए की लागत से मंच सह छज्जा निर्माण कार्य का लोकार्पण शामिल है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने 12 लाख रुपए की लागत से मुडराटोली से बलुआटोली पहुंच मार्ग में सीसी रोड निर्माण तथा 5.99 लाख रुपए की लागत से मुक्तिधाम निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया।
*मुख्यमंत्री ने महतारी सदन में लगाए गए स्टॉलों का किया अवलोकन*
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने महतारी सदन में स्वास्थ्य विभाग, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन एवं महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया। स्वास्थ्य विभाग के स्टॉल में चिकित्सकों ने मुख्यमंत्री को बताया कि छोटे बच्चों, किशोरी बालिकाओं एवं गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की जा रही है। जांच के दौरान कुपोषित पाए जाने वाले बच्चों को आवश्यकता के अनुसार पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने सीएमएचओ डॉ. जी. एस. जात्रा सहित अन्य चिकित्सकों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने तथा माताओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने को कहा
*बहनों ने स्नेहपूर्वक भेंट की स्वनिर्मित टोपी, शॉल और गुलदस्ता*
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के स्टॉल के अवलोकन के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से आत्मीयता से बातचीत की और उनके कार्यों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर महिलाएं काफी प्रसन्न नजर आई। इस दौरान लक्ष्मी स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने अपने हाथों से निर्मित टोपी और शॉल भेंट कर मुख्यमंत्री के प्रति स्नेह व्यक्त किया। वहीं राजधानी स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने स्वनिर्मित गुलदस्ता भेंट किया।
*मुख्यमंत्री ने बच्चों का कराया अन्नप्राशन, गर्भवती महिलाओं को दी पोषण टोकरी*
महिला एवं बाल विकास विभाग के स्टॉल पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने गर्भवती महिलाओं को पोषण टोकरी प्रदान की। उन्होंने महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने तथा चिकित्सकों की सलाह के अनुसार आवश्यक उपचार एवं पौष्टिक आहार लेने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने 6 एवं 7 माह के तीन बच्चों वान्या, श्रेया और साहिल का अन्नप्राशन भी कराया। उन्होंने बच्चों की माताओं से बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण का विशेष ध्यान रखने तथा उनकी उम्र के अनुसार संतुलित एवं पौष्टिक आहार देने को कहा। इस अवसर पर विधायक श्रीमती गोमती साय, पूर्व विधायक श्री भरत साय, श्री भरत सिंह, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, ग्रामीणजन एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
मंत्री राजेश अग्रवाल ने गिनाईं उपलब्धियां, 2028 तक नई पर्यटन पहचान का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को पर्यटन के वैश्विक नक्शे पर लाने की तैयारी।
पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने आज अपने विभागों की उपलब्धियों, योजनाओं और आगामी प्राथमिकताओं की जानकारी मीडिया के माध्यम से आम जनता तक पहुंचाई। श्री अग्रवाल आज नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस वार्ता में मीडिया से रूबरू हुए। प्रेस वार्ता में पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री सौमिल रंजन चौबे, संस्कृति विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की डीजीएम श्रीमती पूनम शर्मा प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं।
प्रेस वार्ता की शुरुआत पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन द्वारा छत्तीसगढ़ पर्यटन से संबंधित महत्वपूर्ण उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की विस्तृत प्रस्तुति के साथ हुई। मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने विभागीय उपलब्धियों की जानकारी देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ को प्रकृति ने चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे जलप्रपात, बस्तर और सरगुजा की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, सिरपुर जैसी ऐतिहासिक विरासत तथा मां दंतेश्वरी और मां महामाया जैसे प्रमुख आस्था केंद्रों की समृद्ध विरासत प्रदान की है। सरकार का लक्ष्य इन प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संपदाओं को देश और दुनिया के सामने नई पहचान दिलाना है।
*पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहन*
मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि पिछले लगभग ढाई वर्षों में पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। फिल्म सिटी निर्माण के लिए 203 करोड़ 53 लाख के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। फिल्म पर्यटन और बड़े आयोजनों को बढ़ावा देने के लिए फिल्म सिटी एवं कन्वेंशन सेंटर के विकास की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 350 करोड़ है।
*61 ट्रेनों से 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए अयोध्या-काशी के दर्शन*
श्री अग्रवाल ने बताया कि सरकार की महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी पहल श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के अंतर्गत आईआरसीटीसी के सहयोग से अब तक 61 ट्रेनों का सफल संचालन किया जा चुका है। इनके माध्यम से 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या और काशी के दर्शन कराए जा चुके हैं। सरकार का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के नागरिकों के लिए धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को अधिक सुगम, व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाना है।
*होमस्टे और स्थानीय रोजगार पर विशेष जोर*
पर्यटन मंत्री ने बताया कि पर्यटन का वास्तविक लाभ स्थानीय परिवारों तक पहुंचाने के उद्देश्य से होमस्टे और स्थानीय पर्यटन अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे स्थानीय भोजन, हस्तशिल्प और युवाओं को पर्यटन से जोड़ने के अवसर बढ़ेंगे। पर्यटन व्यवसाय के औपचारिक पंजीकरण में भी वृद्धि हुई है। वर्तमान में लगभग 390 से अधिक टूर ऑपरेटर एवं ट्रैवल एजेंट तथा 26 होटल पंजीकृत हैं। पर्यटक गाइड, आतिथ्य, फिल्म निर्माण, पर्यटन संचालन और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर कम से कम 500 स्थानीय युवाओं को पर्यटन आधारित रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
*चित्रकोट को विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य बनाने की तैयारी*
मंत्री ने बताया कि बस्तर को छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन आकर्षणों में से एक बताते हुए चित्रकोट को केवल जलप्रपात के रूप में नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। वहीं सिरपुर के विस्तृत पर्यटन विकास के लिए एकीकृत मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। मैनपाट और जशपुर जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन क्षेत्रों में भी पर्यटक सुविधाओं एवं अनुभव को बेहतर बनाने के प्रयास जारी हैं।
*भोरमदेव कॉरिडोर के लिए 145.99 करोड़ स्वीकृत*
धर्मस्व मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाने पर जोर दिया जा रहा है। भोरमदेव कॉरिडोर के विकास के लिए भारत सरकार द्वारा 145 करोड़ 99 लाख की स्वीकृति प्रदान की गई है। रतनपुर महामाया मंदिर क्षेत्र सहित अन्य क्षेत्रों के विकास के लिए भी प्रस्ताव भारत सरकार को भेजे गए हैं।
*डिजिटल पर्यटन को मिल रहा विस्तार*
मंत्री ने बताया कि आज का पर्यटक अपनी यात्रा की शुरुआत मोबाइल फोन से करता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पर्यटन विभाग की नई वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग, डिजिटल सूचना और पर्यटन सुविधाओं को एकीकृत किया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में ऑनलाइन बुकिंग से लगभग ₹6 करोड़ 48 लाख तथा पर्यटन इकाइयों से लगभग ₹31 करोड़ 75 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ है।
*2028 तक छत्तीसगढ़ पर्यटन की नई पहचान बनाने का लक्ष्य*
मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि 2028 तक छत्तीसगढ़ पर्यटन की नई पहचान देश और दुनिया के सामने स्थापित करने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के अंतर्गत अगले पांच वर्षों में प्रतिवर्ष 100 करोड़ के वित्तीय प्रावधान की दिशा में कार्य किया जा रहा है। प्रस्तावित पर्यटन नीति-2026 में सतत विकास, निजी निवेश, समुदाय आधारित पर्यटन और स्थानीय भागीदारी को प्राथमिकता दी जाएगी।
*18 पर्यटन संपत्तियों के विकास में निजी भागीदारी*
मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की 18 पर्यटन संपत्तियों को लीज-सह-विकास मॉडल के माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी से विकसित करने की योजना है। इससे लगभग 500 करोड़ का निवेश आकर्षित होने तथा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से 500 से 1,000 रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
*अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मंचों पर छत्तीसगढ़ की ब्रांडिंग*
पर्यटन मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ की पर्यटन पहचान को राष्ट्रीय सीमाओं से आगे ले जाने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा। इको-एथनिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन के लिए छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मंचों पर भागीदारी, फिल्म एवं ओटीटी आधारित प्रचार, अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटरीच तथा अंतरराष्ट्रीय इन्फ्लुएंसर फैम टूर जैसे प्रयास प्रस्तावित हैं।
*कलाकारों के कल्याण और संस्कृति संरक्षण पर विशेष जोर*
पर्यटन, संस्कृति मंत्री ने बताया कि संस्कृति विभाग की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि कलाकारों और साहित्यकारों के कल्याण को प्रमुखता देते हुए “कलाकार कल्याण कोष चिकित्सा अनुदान” योजना के अंतर्गत पिछले ढाई वर्षों में 70 कलाकारों को लगभग 30 लाख 3 हजार की सहायता प्रदान की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 20 कलाकारों को 15 लाख 30 हजार की सहायता दी जा चुकी है।
इसी तरह “मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना” के माध्यम से नृत्य, संगीत, लोकनाट्य, लोकगाथा, छत्तीसगढ़ी भाषा में लेखन तथा अन्य शिल्प एवं लोककलाओं से जुड़े कलाकारों और लेखकों को संरक्षण एवं आर्थिक प्रोत्साहन दिया जा रहा है। पिछले ढाई वर्षों में 87 कलाकारों को लगभग 19 लाख 8 हजार की राशि प्रदान की गई है।
*407 आर्थिक रूप से अभावग्रस्त वरिष्ठ कलाकारों और साहित्यकारों को पेंशन*
संस्कृति मंत्री ने बताया कि वरिष्ठ कलाकारों एवं साहित्यकारों की आर्थिक सुरक्षा के लिए संचालित मासिक वित्तीय सहायता योजना के तहत पिछले ढाई वर्षों में 407 आर्थिक रूप से अभावग्रस्त वरिष्ठ कलाकारों एवं साहित्यकारों को ₹82 लाख 12 हजार की राशि पेंशन के रूप में प्रदान की गई है। वर्तमान वर्ष में अब तक 121 वरिष्ठ कलाकारों एवं साहित्यकारों को योजना का लाभ दिया जा चुका है।
*संस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ने की पहल*
संस्कृति श्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में सूचीबद्ध 89 विशिष्ट मेला-मड़ई, उत्सव-महोत्सव एवं समारोहों का आयोजन जिला प्रशासन के सहयोग से पूरे वर्ष किया जा रहा है। एलडब्ल्यूई प्रभावित जिलों में जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के लिए स्थानीय परंपराओं, तीज-त्योहार, यात्रा, मेला-मड़ई तथा ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धार्मिक स्थलों पर सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन के लिए “आदि पर्व” पंचांग तैयार किया जा रहा है।
संस्कृति श्री अग्रवाल ने बताया कि बस्तर की लोकपरंपरा और जनजातीय संस्कृति को व्यापक पहचान दिलाने के लिए पिछले दो वर्षों से ग्रामीण, ब्लॉक एवं जिला स्तर पर “बस्तर पंडुम” का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष बस्तर पंडुम-2026 के विजेता कलाकार दलों, मांझी-चालकी प्रतिनिधियों तथा पद्मश्री विभूतियों सहित 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से आत्मीय भेंट एवं सम्मान का अवसर मिला।
*लोककलाओं और लोकवाद्यों के संरक्षण के लिए नए आयोजन*
संस्कृति श्री अग्रवाल ने कहा कि “पावस प्रसंग”, “रंगतरंग”, “रंगपरब” और “लोकरंग पर्व” जैसे आयोजनों के माध्यम से शास्त्रीय नृत्य-संगीत, लोकवाद्य, लोकनाट्य तथा पंडवानी, भरथरी, ददरिया, जसगीत, करमा, पंथी, बांसगीत और देवारगीत जैसी पारंपरिक लोकविधाओं को मंच प्रदान किया जा रहा है। इसका उद्देश्य कलाकारों को प्रोत्साहन देने के साथ नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ना है।
*संस्कृति का डिजिटल आर्काइव तैयार*
संस्कृति श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोककलाओं, लोकगीतों, जनजातीय परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने के उद्देश्य से विस्तृत “डिजिटल आर्काइव” तैयार किया जा रहा है। यह प्रदेश की सांस्कृतिक स्मृतियों, लोक परंपराओं और विरासत को डिजिटल स्वरूप में संरक्षित करने की महत्वपूर्ण पहल है।
*सांस्कृतिक संस्थाओं को 7.85 करोड़ से अधिक की सहायता*
संस्कृति श्री अग्रवाल ने कहा कि कला और संस्कृति के क्षेत्र में लंबे समय से कार्य कर रही अशासकीय सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्थाओं की भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। पिछले ढाई वर्षों में 363 निजी संस्थाओं को 854 सांस्कृतिक आयोजनों के लिए ₹7 करोड़ 85 लाख 3 हजार की आर्थिक अनुदान राशि स्वीकृत की गई है।
*नई फिल्म नीति की तैयारी*
पर्यटन, संस्कृति मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए “छत्तीसगढ़ फिल्म नीति-2021” में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया चल रही है। संशोधनों के साथ नवीन फिल्म नीति तैयार की जाएगी, जिससे प्रदेश के प्राकृतिक एवं खूबसूरत स्थलों पर फिल्म निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा और पात्र फिल्मों को सब्सिडी का लाभ मिल सकेगा।
*सिरपुर को विश्व धरोहर की दिशा में आगे बढ़ाने की पहल*
पर्यटन, संस्कृति मंत्री ने बताया कि पुरातत्व विभाग की उपलब्धियों में सिरपुर को विश्व धरोहर के रूप में स्थापित करने की पहल प्रमुख है। सिरपुर में बौद्ध, जैन और हिंदू स्थापत्य परंपराओं का अद्भुत सह-अस्तित्व है। सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा यूनेस्को के मानकों के अनुरूप नॉमिनेशन डोजियर तैयार कर भारत सरकार को प्रस्तुत किया गया है।
*63 संरक्षित स्मारकों के संरक्षण पर कार्य*
पर्यटन, संस्कृति मंत्री ने कहा कि प्रदेश के 63 राज्य संरक्षित स्मारकों का संरक्षण किया जा रहा है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में 12 राज्य संरक्षित स्मारकों में संरक्षण, उन्नयन और पर्यटकीय सुविधाओं के विकास के लिए फेसलिफ्टिंग की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। सरकार का दृष्टिकोण है कि धरोहर संरक्षण और संवर्धन के साथ पर्यटन तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिले।
*रायपुर संग्रहालय में नई गैलरी, पुरखौती मुक्तांगन में लाइट एंड साउंड शो*
संस्कृति मंत्री ने बताया कि महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय, रायपुर के उन्नयन के लिए नई “रियासत गैलरी” की स्थापना तथा वर्तमान गैलरियों के उन्नयन एवं विकास का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। पुरखौती मुक्तांगन में लाइट एंड साउंड शो तथा संध्याकालीन कार्यक्रम शुरू करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इसके लिए शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर जैसे जनजातीय नायकों के साथ छत्तीसगढ़ की मूर्त एवं अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं को केंद्र में रखकर स्क्रिप्ट तैयार की जा रही है।
*12 लाख पृष्ठों का डिजिटल अभिलेखीकरण*
संस्कृति मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ से संबंधित लगभग 12 लाख पृष्ठों का डिजिटलीकरण कर रायपुर लाया गया है। इन डिजिटल अभिलेखों को वेब अभिलेखागार पोर्टल के माध्यम से आम नागरिकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन उपलब्ध कराने के लिए कैटलॉग एवं मेटाडेटा तैयार किया जा रहा है।
*2750 वर्ष पुरानी मानव बसाहट के प्रमाण*
संस्कृति मंत्री ने बताया कि पुरातत्व विभाग द्वारा अब तक 11 पुरास्थलों का उत्खनन कराया जा चुका है। रायपुर जिले के आरंग तहसील में लखौली के पास रीवां के मृत्तिकागढ़ में हुए पुरातात्विक उत्खनन से लगभग 2750 साल पुरानी मानव बसाहट के प्रमाण सामने आए हैं। उत्खनन में प्रारंभिक ऐतिहासिक काल से लेकर कलचुरी काल तक के अवशेष तथा विभिन्न राजवंशों के सोने, चांदी और तांबे के सिक्के मिले हैं।
मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन और संस्कृति का विकास केवल नए पर्यटन स्थलों और आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य स्थानीय रोजगार, आर्थिक गतिविधियों, कलाकारों के कल्याण, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रदेश की पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करना है। उन्होने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक, सांस्कृतिक, इको-एथनिक और आध्यात्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में हमारी सरकार दीर्घकालिक योजना के साथ आगे बढ़ रही है।
केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों के लिए लगा निःशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर राष्ट्रीय अंधत्व एवं अल्पदृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के तहत 41वें नेत्रदान पखवाड़े का शुभारंभ।
राष्ट्रीय अंधत्व एवं अल्पदृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत केंद्रीय जेल रायपुर में मंगलवार को बंदियों के लिए निःशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का शुभारंभ केंद्रीय जेल रायपुर के अधीक्षक श्री योगेश सिंह क्षत्री ने किया। इसी के साथ रायपुर जिले में 41वें नेत्रदान पखवाड़े का भी शुभारंभ हुआ। देशभर में यह नेत्रदान पखवाड़ा 25 अगस्त से 8 सितंबर तक मनाया जा रहा है।
*नेत्रदान को लेकर भ्रांतियां दूर करने पर जोर*
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जेल अधीक्षक श्री योगेश सिंह क्षत्री ने कहा कि नेत्रदान मानवता की सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम है। कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा से, उम्र, लिंग, रक्त समूह अथवा धर्म की परवाह किए बिना नेत्रदान का संकल्प ले सकता है। मृत्यु के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में रोशनी लाने का यह एक पुनीत प्रयास है।
स्वास्थ्य विभाग के नेत्र चिकित्सक डॉ. मुकेश भगत ने नेत्रदान से जुड़ी सावधानियों और भ्रांतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नेत्रदान से केवल कॉर्निया से संबंधित दृष्टिहीनता वाले व्यक्ति ही लाभान्वित हो सकते हैं। मृत्यु के बाद निर्धारित समय-सीमा के भीतर कॉर्निया निकालना आवश्यक होता है। उन्होंने कहा कि नेत्रदान की प्रक्रिया में सामान्यतः 10 से 15 मिनट का समय लगता है और इससे चेहरे पर किसी प्रकार का निशान या विकृति नहीं आती।
नेत्रदान को बढ़ावा देने के लिए देशभर में आयोजित होने वाला यह पखवाड़ा लोगों को मृत्यु के बाद नेत्रदान के महत्व के प्रति जागरूक करने और इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने का महत्वपूर्ण अवसर है। राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत नेत्र बैंकिंग और कॉर्निया प्रत्यारोपण सेवाओं को भी सुदृढ़ किया जा रहा है।
*स्वास्थ्य विभाग की टीम ने किया नेत्र परीक्षण*
शिविर में स्वास्थ्य विभाग की ओर से नेत्र चिकित्सक डॉ. मुकेश भगत, डॉ. टिकेश्वर, महिला खंड के लिए डॉ. स्वाति शर्मा, डॉ. आकांक्षा सहित नेत्र चिकित्सा सहायक अधिकारी श्री संजय शर्मा, श्री आर.पी. यादव, श्री प्रकाश राठौर, श्री ललित पाटकर, श्री अशोक श्रीवास, श्री प्रवीण शर्मा सहित चिकित्सकों एवं नेत्र चिकित्सा सहायकों की टीम उपस्थित रही। टीम ने बंदियों का नेत्र परीक्षण किया और उन्हें आंखों की देखभाल तथा दृष्टि संबंधी समस्याओं के प्रति आवश्यक परामर्श दिया।
*बंदियों और जेल के अधिकारियों ने लिया नेत्रदान का संकल्प*
कार्यक्रम में केंद्रीय जेल रायपुर के बंदियों के साथ जेल के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने अपने परिजनों को भी मरणोपरांत नेत्रदान के लिए प्रेरित करने और नेत्रदान का संकल्प लेने की बात कही।
जिले में सड़कों के सुदृढ़ीकरण को लेकर मिली बड़ी सौगात, 12 करोड़ 63 लाख रुपये स्वीकृत क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का जताया आभार।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जिले की सड़क अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ी सौगात मिली है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत जिले की दो महत्वपूर्ण सड़कों के मजबूतीकरण एवं उन्नयन कार्य के लिए कुल 12 करोड़ 63 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस स्वीकृति से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में आवागमन बेहतर होगा और लोगों को आवागमन की सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
स्वीकृति के तहत शिवपुर से पत्थलगांव मार्ग के 9 किलोमीटर हिस्से के मजबूतीकरण के लिए 5 करोड़ 1 लाख रुपये की राशि मंजूर की गई है। वहीं दुलदुला से चटकपुर-लोटापानी मार्ग, कुनकुरी के 18.6 किलोमीटर हिस्से के मजबूतीकरण के लिए 7 करोड़ 62 लाख रुपये की स्वीकृति मिली है।इन दोनों महत्वपूर्ण मार्गों के सुदृढ़ीकरण से क्षेत्र के ग्रामीणों, किसानों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को आवागमन में सुविधा मिलेगी। सड़कें बेहतर होने से क्षेत्र में आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
*जिले में बिछ रहा सड़कों का जाल*
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले में सड़क अधोसंरचना के विस्तार और सुदृढ़ीकरण का कार्य लगातार आगे बढ़ रहा है। प्रमुख मार्गों के निर्माण, उन्नयन और मजबूतीकरण से जिले के गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी से जोड़ने का काम किया जा रहा है। इससे विकास की रफ्तार तेज होने के साथ-साथ दूरस्थ क्षेत्रों तक शासन की योजनाओं और सुविधाओं की पहुंच भी आसान होगी।सड़क मजबूतीकरण के लिए मिली इस बड़ी स्वीकृति पर क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बेहतर सड़कें क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण आधार हैं। इन मार्गों के सुदृढ़ीकरण से लंबे समय से आवागमन से जुड़ी समस्याओं का समाधान होगा और लोगों को सुरक्षित एवं सुगम यातायात की सुविधा मिलेगी।
नगरीय प्रशासन विभाग के नए प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने ली मैराथन बैठक।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के नए प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने कार्यभार ग्रहण करने के अगले ही दिन आज मंत्रालय में विभागीय अधिकारियों की मैराथन बैठक लेकर योजनाओं के क्रियान्वयन और विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने इस दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), अमृत मिशन, स्वच्छ भारत मिशन (शहरी), नालंदा परिसर, अधोसरंचना एवं अन्यो विभागीय योजनाओं के अंतर्गत निर्माणाधीन कार्यों में लक्ष्यों के अनुरूप प्रगति, मैदानी स्तर पर क्रियान्वयन तथा आगामी कार्ययोजना पर अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की।
*निगम आयुक्तों और सीएमओ को टीम के साथ रोजाना वार्ड भ्रमण के दिए निर्देश*
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने बैठक में अधिकारियों से योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ नागरिकों तक समय पर पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है। इसके लिए योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग, मैदानी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन और निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण करना जरूरी है। उन्होंने सभी नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के मुख्यर नगर पालिका अधिकारियों को अपर आयुक्तों , उपायुक्तोंव, जोन आयुक्तों एवं अन्यध अधिकारियों के साथ रोजाना वार्डों का भ्रमण कर विभागीय वाट्स-अप ग्रुप में फोटोग्राफस साझा करने के निर्देश दिए।
प्रमुख सचिव श्री बोरा ने बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत स्वीकृत और पूर्ण आवासों की घटकवार प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने आवासों के निर्माण की प्रगति, निर्धारित लक्ष्यों और शेष कार्यों की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ समय पर उपलब्ध कराने तथा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं प्रगति पर लगातार निगरानी रखते हुए कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए।
श्री बोरा ने अमृत मिशन के अंतर्गत नगरीय क्षेत्रों में चल रहे कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने कार्यों की वर्तमान स्थिति, प्रगति और आगामी चरणों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की समीक्षा केवल कार्यालय से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर नहीं होनी चाहिए, अधिकारी नियमित रूप से मौके पर जाकर कार्यों की गुणवत्ता, प्रगति और उससे नागरिकों को मिल रहे लाभों का आकलन करें। उन्होंने निर्माण एवं विकास कार्यों में निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने और सभी कार्य समय-सीमा में पूरा करने को कहा।
*प्रमुख बाजारों की नियमित साफ-सफाई और कचरा निष्पाूदन पर जोर*
श्री बोरा ने स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत संचालित गतिविधियों और कार्यों की समीक्षा के दौरान स्वच्छता व्यवस्था, कचरा प्रबंधन और नगरीय निकायों में चल रहे स्वच्छता संबंधी कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कचरे के स्रोत पर ही पृथक्करण को प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निकायों में चार डस्ट बिन व्यवस्था के व्यवस्थित क्रियान्वयन, नागरिकों में जागरूकता तथा कचरे के उचित संग्रहण एवं प्रबंधन की स्थिति की भी जानकारी ली। उन्होंने घरों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर कचरे के पृथक्करण की व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू करने और निकायों द्वारा इसकी नियमित निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने स्वच्छता व्यवस्था में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए निरंतर जन-जागरूकता गतिविधियां संचालित करने पर जोर दिया।
प्रमुख सचिव ने बाजार क्षेत्रों में नियमित सफाई, समय पर कचरा उठाव, व्यवस्थित कचरा संग्रहण और सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल अभियान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसी नियमित और सतत व्यवस्था विकसित की जाए, जिसका सकारात्मक असर जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिखाई दे। उन्होंने नगरीय निकायों और विभागीय अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए।
*नालंदा परिसर का निर्माण प्राथमिकता से पूर्ण करने कहा*
प्रमुख सचिव श्री बोरा ने राज्य शासन की महत्वाकांक्षी योजना नालंदा परिसर - सेंट्रल लाइब्रेरी-सह-रीडिंग जोन के अंतर्गत विभिन्न निकायों में निर्माणाधीन 38 नालंदा परिसरों के निर्माण कार्यों का सतत् निरीक्षण करते हुए समय-सीमा में निर्माण कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण कार्य पूर्ण होते तक परिसर में आवश्यक अन्य सामग्री यथा लाइब्रेरी के लिए पुस्तकें] कम्प्यूटर पैनल्स] लाइब्रेरियन सहित अन्य आनुषांगिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा। इससे विद्यार्थियों को परिसर की पूर्णता के तुरंत बाद लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
बैठक में श्री बोरा ने अपने पिछले कार्यकाल के दौरान किए गए महत्व पूर्ण कार्यों एवं नवाचारों के साथ ही कार्य के दौरान आने वाली समस्यादओं तथा उनके समाधान के संबंध में अपने अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंसने बताया कि शहरों के विकास और नगरीय योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए स्थाोनीय जनप्रतिनिधियों के साथ लगातार समन्वचय करने की आवश्यओकता होती है। इससे विभाग को जमीनी स्तकर पर कार्यों की जानकारी एवं प्रगति की सूचना मिलते रहती है। उन्होंने सीएम हेल्पिलाइन और सीपीग्राम्स (CPGRAMS) पोर्टल के माध्यशम से प्राप्त शिकायतों का निराकरण पूर्ण निष्ठा् एवं समय-सीमा के भीतर किए जाने के निर्देश दिए।
*’पयर्टन एवं धार्मिक महत्वत के स्थरलों में उपलब्धा कराएं मूलभूत सुविधाएं’*
श्री बोरा ने बैठक में रायपुर नगर निगम के आयुक्तक को रायपुर शहर के पर्यटन स्थ लों का चिन्हांरकन कर वहां शुध्दक पेयजल, सुगम शौचालय, डस्टपबिन तथा सफाई की पर्याप्तज व्यनवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने शहरों में अर्बन-फारेस्ट्री के विकास तथा पब्लिक गार्डन के पुनरोध्दारर की कार्ययोजना बनाकर प्राथमिकता से कार्य करने तथा पीपीपी मोड पर फण्डड की व्योवस्थार के विकल्पा तलाशने को कहा। उन्होंने नगरीय निकायों के परिसीमन के बाद शामिल नए क्षेत्रों में शुध्दक पेयजल, सफाई व्येवस्था, शहरी हरियाली तथा अरबन एग्रीकल्च र जैसे बिन्दुसओं को प्राथमिकता से शामिल करते हुए योजना तैयार करने के निर्देश दिए।
प्रमुख सचिव ने नगरीय क्षेत्रों में पूर्व निर्मित हाउसिंग प्रोजेक्स्शा की मरम्मजत, स्ल म रिडेव्हसल्पनमेंट तथा हाउसिंग प्रोजेक्टा के लिए उपलब्धर ईडब्यूकरनेएस भूमि पर वायबल कॉर्मिर्शियल प्रोजेक्टप के नवीन विकल्पि तलाशने तथा योजनाओं के क्रियान्वडयन में आउट-ऑफ-द-बॉक्सक विचार के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक श्री आर. एक्का, सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुमित अग्रवाल, नगर निगम रायपुर के आयुक्त श्री संबित मिश्रा, नगर निगम बिरगांव के आयुक्त श्री युगल किशोर उर्वशा, उप सचिव श्री भागवत जायसवाल, अपर संचालक श्री पुलक भट्टाचार्य, मुख्यल अभियंता श्री राजेश शर्मा, संयुक्त संचालक श्री मिथिलेश अवस्थी, उप संचालक श्री अरुण साहू, सूडा के उप मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील अग्रहरि, श्री सचित साहू तथा अधीक्षण अभियंता श्री रमेश सिंह भी बैठक में मौजूद थे।
मंत्री श्री नेताम की अध्यक्षता में संचालक मंडल की बैठक सम्पन्न एकलव्य विद्यालयों में गणवेश, मेस संचालन एवं अन्य व्यवस्थाओं में एकरूपता पर जोर।
आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम की अध्यक्षता में आज नवा रायपुर स्थित टीआरटीआई के सभाकक्ष में आदिम जाति कल्याण आवासीय एवं आश्रम शैक्षणिक संस्थान समिति के संचालक मंडल की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के संचालन, शैक्षणिक गुणवत्ता तथा विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की समीक्षा की गई। मंत्री श्री नेताम ने इस अवसर पर टीआरटीआई द्वारा प्रकाशित गुमनाम जननायक पुस्तक का भी विमोचन किया। उन्होंने इस दौरान शहीद वीरनारायण सिंह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सह स्मारक में दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्य कर रही सुश्री अंबिका ध्रुव का नगर सैनिक में चयनित होने पर सम्मानित भी किया।
मंत्री श्री नेताम ने एकलव्य विद्यालयों में गणवेश, मेस संचालन, भोजन व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं में एकरूपता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण एवं गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
बैठक में नेस्ट्स एवं राज्य सरकार के भर्ती नियमों के अनुरूप योग्यता रखने वाले एकलव्य विद्यालयों के पूर्व अतिथि शिक्षकों को पुनः अवसर प्रदान करने के विषय पर भी सहमति बनी।
बैठक में बताया गया कि छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 75 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित हैं। साथ ही एकलव्य विद्यालयों की चतुर्थ राष्ट्रीय क्रीड़ा प्रतियोगिता में प्रदेश के विद्यार्थियों की उपलब्धियों की जानकारी दी गई। नवंबर 2025 में ओडिशा के सुंदरगढ़ में आयोजित प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के 466 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया और प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त किया। खिलाड़ियों ने 55 स्वर्ण पदक सहित कुल 126 पदक अर्जित किए। मंत्री श्री नेताम ने इस उपलब्धि पर विद्यार्थियों, प्रशिक्षकों एवं अधिकारियों की सराहना की।
इस अवसर पर विभाग के सचिव श्री भुवनेश यादव, आयुक्त श्री डी राहुल वेंकट, टीआरटीआई की संचालक श्रीमती हिना अनिमेष नेताम, संचालक मंडल के सदस्य एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
कलेक्टर रोहित व्यास ने जनदर्शन में सुनी आमजन की समस्याएं समयबद्ध, त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के दिए निर्देश।
कलेक्टर रोहित व्यास ने आज कलेक्टोरेट में आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों की समस्याएं सुनीं। कलेक्टर श्री व्यास ने जनदर्शन में प्राप्त आवेदनों के निराकरण के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। जनदर्शन में आमजन ने अपनी व्यक्तिगत एवं सामुदायिक समस्याओं से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए। आज आयोजित जनदर्शन में कुल 20 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें मुख्य रूप से राजस्व संबंधी प्रकरण, पेयजल, सड़क, स्वच्छता, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ, अधोसंरचना विकास, आजीविका संवर्धन तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं से जुड़ी मांगें एवं समस्याएं शामिल थीं।
कलेक्टर श्री व्यास ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्राप्त सभी आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर परीक्षण कर उनका समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जनदर्शन शासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का प्रभावी माध्यम है, इसलिए प्रत्येक आवेदन पर संवेदनशीलता एवं जवाबदेही के साथ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि आवेदनों पर की गई कार्रवाई की जानकारी संबंधित आवेदकों को समय पर उपलब्ध कराएं, ताकि उन्हें अपने प्रकरण की स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिल सके। कलेक्टर ने विशेष रूप से जनसुविधाओं से जुड़े मामलों जैसे पेयजल, सड़क, स्वच्छता तथा शासकीय योजनाओं के लाभ से संबंधित प्रकरणों पर गंभीरता से कार्रवाई करने पर जोर दिया।
संस्कृति विभाग द्वारा मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 के लिए 31 अगस्त तक आवेदन आमंत्रित चयनित कलाकारों को मिलेंगे प्रतिवर्ष 12 से 24 हजार रुपये तक प्रोत्साहन राशि।
छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक कला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और कलाकारों को आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय द्वारा मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 के अंतर्गत प्रदेश के लोक कलाकारों से प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं। योजना का उद्देश्य पारंपरिक लोक कलाओं को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करना, कलाकारों का सम्मान बढ़ाना तथा कला दलों के सतत विकास को नई गति प्रदान करना है।
योजना के अंतर्गत नृत्य-संगीत, लोक नाट्य, लोकगाथा, छत्तीसगढ़ी गीतकार, वाद्ययंत्र वादक, शिल्प कलाकार, छत्तीसगढ़ी पाक कला (पारंपरिक व्यंजन) तथा छत्तीसगढ़ी सौंदर्यकला (श्रृंगार) से जुड़े कलाकार आवेदन कर सकते हैं। आवेदन निर्धारित प्रारूप में पंजीकृत डाक के माध्यम से भेजे जाएंगे। आवेदन प्रपत्र विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं तथा संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय, नया रायपुर स्थित कार्यालय से भी प्राप्त किए जा सकते हैं।
योजना के तहत पात्र कलाकारों का चिन्हारी पोर्टल में पंजीयन अनिवार्य होगा। चयनित कलाकारों को प्रतिवर्ष न्यूनतम 12 हजार रुपये से अधिकतम 24 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि ई-पेमेंट के माध्यम से प्रदान की जाएगी। यह राशि एक वित्तीय वर्ष में एक बार प्रदान की जाएगी।
योजना का लाभ केवल ऐसे कलाकारों को मिलेगा जिनकी सभी स्रोतों से वार्षिक आय 96 हजार रुपये से अधिक नहीं है। इसके लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी आय प्रमाण-पत्र संलग्न करना अनिवार्य होगा। आवेदन के साथ बैंक खाते का विवरण, आईएफएससी कोड तथा पैन कार्ड की छायाप्रति भी प्रस्तुत करनी होगी।
प्रविष्टियां भेजने का पता -
संचालक, संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय,
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल, व्यावसायिक परिसर,
द्वितीय तल, सेक्टर-27, नया रायपुर, अटल नगर (छत्तीसगढ़) - 492018
प्रविष्टियां प्राप्त होने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। आवेदन भेजते समय लिफाफे पर मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 स्पष्ट रूप से अंकित करना आवश्यक होगा। प्राप्त प्रविष्टियों का परीक्षण समिति द्वारा किया जाएगा तथा समिति का निर्णय अंतिम एवं मान्य होगा
मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना प्रदेश की समृद्ध लोक कला परंपराओं के संरक्षण, कलाकारों के सम्मान और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से लोक कलाकारों को न केवल आर्थिक सहयोग मिलेगा, बल्कि अपनी कला को व्यापक पहचान दिलाने और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी प्राप्त होगा।
कोरिया के जीराफूल चावल ने बनाई नई पहचान 832 किसान प्राकृतिक खेती से कर रहे जीराफूल धान का उत्पादन, एफपीओ के जरिए ब्रांडिंग, पैकेजिंग और विपणन को बढ़ावा।
कोरिया जिले का पारंपरिक और सुगंधित जीराफूल चावल प्राकृतिक खेती और किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के प्रभावी मॉडल से नई पहचान बना रहा है। जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा स्थानीय कृषि उत्पादों को प्रोत्साहित करने और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से जीराफूल चावल की पहुंच स्थानीय बाजार से आगे व्यापक स्तर तक बढ़ रही है।
कृषि विभाग के उप संचालक श्री राजेश भारती ने बताया कि कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव के मार्गदर्शन में कोरिया जिले में एफपीओ से जुड़े 832 किसान प्राकृतिक खेती पद्धति से जीराफूल धान का उत्पादन कर रहे हैं। किसान खेती में जीवामृत, बीजामृत जैसे जैव- आधारित इनपुट का उपयोग कर रहे हैं।प्राकृतिक खेती से उत्पादित जीराफूल धान को गुणवत्ता, प्रमाणन और बेहतर पैकेजिंग के माध्यम से बाजार में विशिष्ट पहचान दिलाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
खेत से बाजार तक एफपीओ बना मजबूत कड़ी
किसानों की उपज को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उसे संगठित बाजार से जोड़ने में एफपीओ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सोनहत गौरव एग्रोफेड कृषक उत्पादक बहुउद्देशीय सहकारी समिति मर्यादित के माध्यम से जीराफूल चावल के एकत्रीकरण, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग एवं विपणन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे किसानों को सामूहिक रूप से बाजार तक पहुंच बनाने और अपनी उपज के बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर मिल रहे हैं।
प्राकृतिक खेती से मूल्य संवर्धन तक तैयार हुई पूरी श्रृंखला
जीराफूल चावल की प्राकृतिक खेती, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, प्रमाणन, आकर्षक पैकेजिंग और एफपीओ के माध्यम से विपणन ने 'उत्पादन से मूल्य संवर्धन और बाजार तक' की पूरी श्रृंखला तैयार की है। कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से कोरिया के जीराफूल धान की प्राकृतिक खेती और एफपीओ मॉडल से जुड़े प्रयासों को सराहा गया है।
प्राकृतिक खेती से तैयार जीराफूल चावल को पीजीएस-प्राकृतिक खेती प्रमाणन के साथ बाजार तक पहुंचाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इससे कोरिया के पारंपरिक जीराफूल चावल को गुणवत्तापूर्ण और प्राकृतिक उत्पाद के रूप में नई पहचान मिल रही है।
मुख्यमंत्री ने भी किसानों के प्रयासों की सराहना की
कोरिया के जीराफूल चावल को राष्ट्रीय स्तर पर मिल रही पहचान को लेकर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भी जिले के किसानों के प्रयासों की सराहना की है। पारंपरिक कृषि उत्पाद को प्राकृतिक खेती, एफपीओ और बेहतर विपणन से जोड़ने की यह पहल किसानों के लिए नए बाजार और मूल्य संवर्धन के अवसर खोल रही है।
कृषि विभाग द्वारा किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीक, जैव-इनपुट निर्माण, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन तथा एफपीओ के माध्यम से विपणन के संबंध में निरंतर मार्गदर्शन दिया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य कोरिया के स्थानीय एवं पारंपरिक कृषि उत्पादों को संगठित बाजार उपलब्ध कराकर किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाना है।
जीराफूल की पहचान अब खेत से बाजार तक पहुंच रही है और एफपीओ इस बदलाव की महत्वपूर्ण कड़ी बनकर उभर रहा है।
श्री फलेश्वर नाथ मंदिर बगिया में तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का दूसरा दिन भक्तिमय वातावरण में संपन्न
श्रावण मास के पावन अवसर पर बगिया स्थित मैनी नदी तट के श्री फलेश्वर नाथ मंदिर में आयोजित 1 लाख 11 हजार 111 पार्थिव शिवलिंग पूजन महाअनुष्ठान के दूसरे दिन मंगलवार को करीब 53993 हजार पार्थिव शिवलिंगों का पूजन एवं अभिषेक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ।इससे पहले प्रथम में 25 हजार पार्थिव शिवलिंग का पूजन संपन्न हुआ था ।मंगलवार की सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही और पूरा क्षेत्र भगवान भोलेनाथ के जयकारों से गूंजता रहा।धार्मिक अनुष्ठान के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय एवं उपस्थित श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और भक्ति के साथ पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण कर विधि-विधान से पूजन एवं अभिषेक किया। इसके पश्चात आरती और प्रसाद वितरण हुआ। बड़ी संख्या में शिव भक्तों की सहभागिता से मंदिर परिसर में पूरे दिन भक्तिमय एवं आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।
बुधवार को होगा आयोजन का भव्य समापन
तीन दिवसीय इस विशेष धार्मिक अनुष्ठान का सोमवार को शुभारंभ हुआ,इस मौके पर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने विधिवत यहां के फलेश्वर नाथ महादेव मंदिर में पूजा अर्चना की।इस अनुष्ठान का बुधवार, 19 अगस्त को समापन होगा। अंतिम दिन पार्थिव शिवलिंग पूजन के साथ विशेष पूर्णाहुति संपन्न की जाएगी। इसके पश्चात भगवान भोलेनाथ की आरती एवं श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण किया जाएगा।आयोजन को लेकर मंदिर परिसर में आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। श्रद्धालुओं से सपरिवार मंदिर पहुंचकर अंतिम दिवस के धार्मिक अनुष्ठान में सहभागी बनने का आग्रह किया गया है।
भक्ति और आस्था से सराबोर रहा मंदिर परिसर
दूसरे दिन हुए विशाल पूजन एवं अभिषेक में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही। मंत्रोच्चार, भगवान शिव के जयघोष और धार्मिक अनुष्ठानों से श्री फलेश्वर नाथ मंदिर परिसर भक्तिमय बना रहा।बुधवार को पूर्णाहुति के साथ 1 लाख 11 हजार 111 पार्थिव शिवलिंग पूजन के इस भव्य धार्मिक आयोजन का विधिवत समापन होगा। आयोजन के माध्यम से भगवान भोलेनाथ से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट का किया शुभारंभ, छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को नई मजबूती।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पचपेड़ी नाका स्थित रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल परिसर में अत्याधुनिक रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने नई कैंसर इकाई में उपलब्ध उपचार सुविधाओं एवं अत्याधुनिक मशीनरी का अवलोकन किया तथा अस्पताल प्रबंधन एवं चिकित्सकों को इस महत्वपूर्ण पहल के लिए शुभकामनाएं दीं। इस दौरान श्री साय ने डॉ. संदीप दवे के भाई श्री प्रदीप दवे को पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल पिछले 36 वर्षों से छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि डॉ. संदीप दवे के भाई स्वर्गीय श्री प्रदीप दवे का कैंसर से निधन हुआ था। इस व्यक्तिगत पीड़ा ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ व्यापक स्तर पर काम करने का संकल्प मजबूत किया। आज उसी संकल्प का परिणाम रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट के रूप में सामने आया है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान आने वाले समय में हजारों-लाखों लोगों को बेहतर कैंसर उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ा है। कैंसर मरीजों को अब एक ही परिसर में जांच, उपचार और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। उन्होंने डॉ. संदीप दवे और उनकी पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि निजी क्षेत्र की ऐसी पहल से प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को और गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य गठन के 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में स्वास्थ्य संस्थानों के विस्तार को गति मिली और वर्तमान सरकार भी पिछले ढाई वर्षों से प्रदेश के कोने-कोने तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेशवासियों को उपचार के लिए प्रदेश से बाहर न जाना पड़े और उन्हें आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं अपने ही प्रदेश में उपलब्ध हों।
*कैंसर की रोकथाम में स्क्रीनिंग और शुरुआती जांच जरूरी : डॉ. रमन सिंह*
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट के शुभारंभ को छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस संस्थान के पीछे सेवा और संवेदना की भावना जुड़ी हुई है। डॉ. दवे के भाई की कैंसर से मृत्यु ने उन्हें गहरा आघात दिया और संभवतः इसी पीड़ा ने कैंसर के उपचार के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने की प्रेरणा दी। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि कैंसर केवल मरीज की नहीं, बल्कि पूरे परिवार की सामूहिक पीड़ा होती है। उन्होंने कैंसर की समय पर पहचान के लिए नियमित स्क्रीनिंग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में कैंसर की पहचान होने पर उपचार की संभावनाएं काफी बेहतर हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में पहले से उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं के साथ अब कैंसर उपचार की सुविधा जुड़ने से मरीजों को एक ही छत के नीचे व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
*15 मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल से स्वास्थ्य सेवाओं का बढ़ा दायरा : स्वास्थ्य मंत्री*
स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट के शुभारंभ से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में एक महत्वपूर्ण नई कड़ी जुड़ी है। इसका लाभ छत्तीसगढ़ सहित देश के अन्य हिस्सों के मरीजों को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के समय छत्तीसगढ़ में केवल एक मेडिकल कॉलेज था। तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के प्रयासों से मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 10 हुई और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पिछले ढाई वर्षों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के बाद प्रदेश में अब 15 मेडिकल कॉलेज हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि इसी अवधि में प्रदेश में सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं का भी विस्तार हुआ है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में दो नए सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों पर काम हो रहा है। बस्तर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की सुविधा शुरू होने से गंभीर मरीजों को उपचार के लिए एयरलिफ्ट कर रायपुर लाने की आवश्यकता में कमी आई है और जगदलपुर में हृदय जैसी जटिल सर्जरी भी संभव हो रही है। बिलासपुर में भी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का शुभारंभ हो चुका है।
इस अवसर पर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक श्री मोतीलाल साहू, चिकित्सक, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोग एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे।
छात्रहित में लिया गया फैसला-मंत्री टंक राम वर्मा छत्तीसगढ़ के कॉलेजों में बढ़ा दाखिले का दायरा अब 31 अगस्त तक ले सकेंगे प्रवेश।
उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने कहा कि हमारी सरकार का मूल ध्येय प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा का प्रकाश पहुँचाना है। दूरस्थ और ग्रामीण अंचलों के कई मेधावी युवा विभिन्न व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण समय पर प्रवेश नहीं ले सके थे। हम नहीं चाहते कि तिथियों के फेर में किसी भी योग्य विद्यार्थी का एक साल खराब हो या वह उच्च शिक्षा से वंचित रह जाए। छात्रहित को सर्वोपरि रखते हुए प्रवेश की तारीख 31 अगस्त तक बढ़ाई गई है। मैं सभी विद्यार्थियों से अपील करता हूँ कि वे इस अवसर का पूरा लाभ उठाएं।
छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों को बड़ी राहत देते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कॉलेजों में प्रवेश की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। राज्य के जिन शासकीय और निजी महाविद्यालयों में अभी भी सीटें रिक्त हैं, वहाँ छात्र अब 31 अगस्त 2026 तक दाखिला ले सकेंगे। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा इस संबंध में विधिवत आदेश जारी कर दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत प्राचार्य स्तर पर प्रवेश की समय सीमा 31 जुलाई तक और कुलपति की अनुमति से 14 अगस्त तक तय की गई थी। लेकिन अंतिम तिथि बीतने के बाद भी कई महाविद्यालयों में सीटें खाली रह गई थीं और दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले कई अभ्यर्थी समय पर आवेदन नहीं कर पाए थे। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए शासन ने तिथि विस्तार का यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
20 साल बाद खुला कुनकुरी चावल घोटाले का अगला अध्याय, 40 हजार पन्नों का चालान पेश। 22 हजार 198 क्विंटल से अधिक चावल की कमी,92 गवाह,दो आरोपी 2006 से जमानत पर,एक की हो चुकी है मौत।
करीब दो दशक से लंबित जशपुर जिले का बहुचर्चित कुनकुरी चावल घोटाला एक बार फिर सुर्खियों में है। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो रायपुर ने मामले की लंबी विवेचना के बाद 6 अगस्त 2026 को विशेष न्यायालय जशपुर में अंतिम प्रतिवेदन चालान पेश कर दिया है। करीब 40 हजार पन्नों के दस्तावेज और 92 गवाहों की सूची के साथ पेश किए गए इस चालान के बाद अब मामले की न्यायालयीन प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
मामले में सुनील कुमार निगम और विमल कुमार गर्ग के विरुद्ध विवेचना पूरी कर चालान पेश किया गया है। वहीं तीसरे आरोपी शिव शंकर वैष्णव की वर्ष 2009 में मृत्यु हो चुकी है।
2005 में दर्ज हुई थी FIR
कुनकुरी शासकीय खाद्यान्न गोदाम में चावल के स्टॉक में कथित अनियमितता और कमी को लेकर EOW में FIR क्रमांक 01/2005, दिनांक 30 सितंबर 2005 दर्ज की गई थी। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 409, 420, 467, 468 और 471 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत अपराध का उल्लेख किया गया है।
जांच में सामने आई हजारों क्विंटल चावल की कमी
विवेचना के दौरान गोदाम के रजिस्टर, पंजी और अन्य दस्तावेजों के साथ खाद्यान्न के भौतिक स्टॉक का मिलान किया गया। प्रारंभिक विभागीय गणना में 26,626.42 क्विंटल चावल की कमी सामने आई थी।
बाद में संयुक्त जांच और दस्तावेजों के परीक्षण के आधार पर अंतिम विवेचना में 22,198.52 क्विंटल चावल की वास्तविक कमी का उल्लेख किया गया है। जांच रिपोर्ट में इस कमी के कारण शासन को आर्थिक क्षति होने की बात कही गई है।
2 लाख क्विंटल से ज्यादा चावल की आवक-जावक की जांच
विवेचना में 1 अप्रैल 2004 से 10 सितंबर 2005 के बीच कुनकुरी प्रदाय केंद्र और गोदाम में चावल की आवक-जावक से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले गए।
जांच दस्तावेजों के अनुसार इस अवधि में एलआरटी और कस्टम मिलिंग राइस (CMR) के माध्यम से करीब 2,07,411.04 क्विंटल चावल जमा किए जाने का रिकॉर्ड मिला। इसके अलावा बीपीएल, एपीएल, अंत्योदय, अन्नपूर्णा, मध्यान्ह भोजन, संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना, राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम और सूखा राहत योजना समेत विभिन्न योजनाओं में चावल वितरण के रिकॉर्ड की भी जांच की गई।
आरोपियों की भूमिका का भी उल्लेख
अंतिम विवेचना में सुनील कुमार निगम, शिव शंकर वैष्णव और विमल कुमार गर्ग की भूमिकाओं का उल्लेख किया गया है। जांच के अनुसार वास्तविक स्थिति से अलग दस्तावेज और अभिलेख तैयार अथवा संधारित किए जाने और उनके उपयोग की बात सामने आई।
सुनील कुमार निगम और शिव शंकर वैष्णव को गोदाम के खाद्यान्न स्टॉक पर पद के अनुसार नियंत्रण रखने और महत्वपूर्ण भूमिका में बताया गया है। वहीं विमल कुमार गर्ग के संबंध में 18 डिलीवरी ऑर्डरों से जुड़े 310.13 क्विंटल चावल के परिवहन और कथित वितरण का उल्लेख किया गया है।
2006 में हुई थी गिरफ्तारी
मामले में सुनील कुमार निगम को 29 अगस्त 2006 और विमल कुमार गर्ग को 10 अक्टूबर 2006 को गिरफ्तार किया गया था। दोनों आरोपी बाद में न्यायालय के आदेश पर जमानत पर रहे।
करीब 20 साल तक चली विवेचना के बाद अब चालान पेश होने से इस पुराने मामले की न्यायालयीन प्रक्रिया एक नए चरण में पहुंच गई है।
एक आरोपी की 2009 में मौत
प्रकरण के तीसरे आरोपी शिव शंकर वैष्णव की 1 सितंबर 2009 को मृत्यु हो चुकी है। अंतिम प्रतिवेदन में उनकी मृत्यु का उल्लेख करते हुए मृत्यु प्रमाणपत्र सहित संबंधित दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत किए गए हैं।
40 हजार पन्ने, 92 गवाह
आरोपियों की ओर से अधिवक्ता जय नारायण प्रसाद ने बताया कि दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी वर्ष 2006 में हुई थी और वे न्यायालय के आदेशानुसार जमानत पर हैं। उनके अनुसार करीब 20 साल बाद लगभग 40 हजार पन्नों के दस्तावेज और 92 गवाहों की सूची के साथ चालान न्यायालय में पेश किया गया है।
अब अदालत में होगी अगली कार्रवाई
करीब दो दशक की विवेचना के बाद चालान पेश होने से कुनकुरी का यह बहुचर्चित मामला फिर चर्चा में आ गया है। अब विशेष न्यायालय जशपुर में प्रकरण की आगे की न्यायालयीन प्रक्रिया होगी।
हालांकि जांच में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में पेश होने वाले साक्ष्यों, गवाहों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर ही होगा।
राष्ट्र, समाज और सनातन संस्कृति के प्रति श्री दिलीप सिंह जूदेव जी का समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में श्रद्धेय स्वर्गीय श्री दिलीप सिंह जूदेव जी की पुण्यतिथि पर उनके छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धापूर्वक नमन किया और राष्ट्र एवं समाज के प्रति उनके योगदान का स्मरण किया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि श्रद्धेय दिलीप सिंह जूदेव जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्र, समाज और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पित रहा। जनजातीय समाज के हितों की रक्षा, उनके स्वाभिमान और सामाजिक जागरण के लिए उन्होंने आजीवन कार्य किया। समाज के अंतिम व्यक्ति के प्रति उनकी संवेदनशीलता और जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें जन-जन के हृदय में विशिष्ट स्थान दिलाया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्री जूदेव जी का छत्तीसगढ़ की माटी और यहां के लोगों से गहरा आत्मीय जुड़ाव था। विशेष रूप से जनजातीय अंचलों में उन्होंने समाज को संगठित करने, लोगों में आत्मविश्वास जगाने और उनकी आवाज को मजबूती देने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्री जूदेव जी का जीवन राष्ट्रसेवा, सामाजिक सरोकार और अपनी संस्कृति एवं परंपराओं के प्रति अटूट निष्ठा का प्रेरक उदाहरण है। उनके विचार और आदर्श आने वाली पीढ़ियों को समाज एवं राष्ट्र के लिए समर्पित भाव से कार्य करने की प्रेरणा देते रहेंगे।
इस अवसर पर श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती प्रियंवदा सिंह जूदेव, प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी तथा छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा उपस्थित थे।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा - तिरंगा हमारी आन, बान और शान का प्रतीक, राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूत करने का दिया संदेश
स्वतंत्रता दिवस के पूर्व ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत गुरुवार को अम्बिकापुर शहर में भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। हाथों में तिरंगा लिए बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, युवाओं, विद्यार्थियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और नागरिकों ने उत्साहपूर्वक यात्रा में सहभागिता की। तिरंगा यात्रा में शामिल लोगों के हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लहरा रहा थे। रास्ते में कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने यात्रा का स्वागत किया, युवाओं और विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। भारत माता के जयकारों, वंदे मातरम् के नारों और देशभक्ति गीतों से पूरा शहर राष्ट्रप्रेम की भावना से सराबोर नजर आया।
तिरंगा यात्रा का शुभारंभ शहर के मल्टीपरपज स्कूल से हुआ। यात्रा महामाया चौक, घड़ी चौक और गांधी चौक होते हुए गांधी स्टेडियम मैदान पहुंचकर सम्पन्न हुई। यात्रा के मार्ग में जगह-जगह नागरिकों ने तिरंगा यात्रा का स्वागत किया। हाथों में लहराते राष्ट्रीय ध्वज और देशभक्ति के नारों के बीच युवाओं तथा आम नागरिकों में विशेष उत्साह और उमंग देखने को मिली।
*पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने लहराया तिरंगा*
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल भी तिरंगा यात्रा में शामिल हुए और हाथों में तिरंगा लेकर राष्ट्रप्रेम एवं राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि तिरंगा हमारी आन, बान और शान का प्रतीक है। तिरंगा यात्रा देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने नागरिकों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने और देश की प्रगति में अपना योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रत्येक नागरिक अपने घर, प्रतिष्ठान और कार्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराकर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से जुड़े और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी एवं सम्मान की भावना को प्रदर्शित करे।
*देशभक्ति और भाईचारे का संदेश*
गृह निर्माण मंडल अध्यक्ष श्री अनुराग सिंहदेव ने कहा कि तिरंगा यात्रा के माध्यम से देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और भाईचारे की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज देश की एकता और गौरव का प्रतीक है तथा प्रत्येक नागरिक को इसके सम्मान के प्रति सदैव सजग रहना चाहिए।
कलेक्टर श्री अजीत वसंत ने तिरंगा यात्रा में शामिल होने पहुंचे सभी नागरिकों का स्वागत करते हुए कहा कि जिन आदर्शों और मूल्यों को लेकर हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने आजादी की लड़ाई लड़ी, वे आज भी हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के इन आदर्शों और देश की आजादी के मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करते हुए राष्ट्रप्रेम, एकता और जिम्मेदार नागरिकता की भावना को और मजबूत करना चाहिए।
*देशभक्ति गीतों और नारों से गूंजा अम्बिकापुर*
तिरंगा यात्रा के दौरान भारत माता की जय, वंदे मातरम् और देशभक्ति के नारों से अम्बिकापुर का वातावरण राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत रहा। यात्रा में शामिल लोगों ने पूरे उत्साह के साथ राष्ट्रीय ध्वज लहराया। देशभक्ति गीतों ने वातावरण में उत्साह और ऊर्जा का संचार किया। बड़ी संख्या में युवाओं और विद्यार्थियों ने तिरंगा लेकर यात्रा में सहभागिता की।
*राष्ट्रीय एकता और अखंडता का लिया संकल्प*
तिरंगा यात्रा का उद्देश्य स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नागरिकों में देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और अखंडता की भावना को मजबूत करना रहा। आयोजन के माध्यम से नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया। यात्रा में शामिल लोगों ने देश की एकता, अखंडता और गौरव को बनाए रखने तथा राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
*जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और नागरिकों की रही सहभागिता*
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती निरुपा सिंह, नगर निगम महापौर श्रीमती मंजूषा भगत, निगम सभापति श्री हरमिंदर सिंह टिन्नी, श्री भारत सिंह सिसोदिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री राजेश अग्रवाल, जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विनय कुमार अग्रवाल, अपर कलेक्टर श्री सुनील नायक, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व श्री बनसिंह नेताम सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
*लखनपुर और केदमा में भी तिरंगा यात्रा में शामिल हुए मंत्री*
इससे पूर्व पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल लखनपुर तथा उदयपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम केदमा में आयोजित तिरंगा यात्रा में भी सम्मिलित हुए। उन्होंने वहां भी नागरिकों के साथ तिरंगा लहराकर स्वतंत्रता दिवस के पूर्व राष्ट्रीय एकता, अखंडता और देशभक्ति का संदेश दिया।
MLC और पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब डिजिटल प्रक्रिया से जुड़ेंगी, जशपुर पुलिस ने की समन्वय बैठक पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, अभियोजन और FSL के अधिकारियों को MedLEaPR का दिया गया प्रशिक्षण
जशपुरनगर। पुलिस की जांच प्रक्रिया को तेज और व्यवस्थित बनाने के लिए जशपुर पुलिस ने पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, अभियोजन और एफएसएल के अधिकारियों के साथ समन्वय बैठक की। बैठक 13 अगस्त को पुलिस कार्यालय जशपुर में आयोजित की गई। बैठक में MedLEaPR के माध्यम से मेडिकल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को डिजिटल तरीके से उपलब्ध कराने की प्रक्रिया समझाई गई।
डीआईजी एवं एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह के निर्देशन में हुई बैठक में अधिकारियों और चिकित्सकों को MLC और PMR की ऑनलाइन रिपोर्ट तैयार करने, केस दर्ज करने और पुलिस की जांच प्रक्रिया से इसे जोड़ने की जानकारी दी गई।
Rukka और CCTNS से जुड़ेगी मेडिकल रिपोर्ट
बैठक में बताया गया कि पुलिस द्वारा किसी मामले में मेडिकल जांच के लिए भेजे गए प्रकरण की जानकारी MedLEaPR में दर्ज की जाएगी। Rukka, GD और CCTNS के माध्यम से आने वाले मामलों को भी इस डिजिटल प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा।
इससे पुलिस और डॉक्टरों के बीच मेडिकल रिपोर्ट से जुड़ी जानकारी जल्दी उपलब्ध हो सकेगी। रिपोर्ट के लिए अनावश्यक रूप से कागजी प्रक्रिया और देरी कम करने में भी मदद मिलेगी।
डॉक्टरों को रिपोर्ट बनाने का प्रशिक्षण
बैठक में चिकित्सकों को MedLEaPR पर MLC और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया। इसमें मरीज या मृतक की जानकारी, चोटों का विवरण, जांच और चिकित्सकीय राय दर्ज करने की प्रक्रिया समझाई गई।
अभियोजन अधिकारियों ने डॉक्टरों से रिपोर्ट में तथ्यों को स्पष्ट रूप से दर्ज करने और मेडिकल Opinion को जांच एवं न्यायालयीन प्रक्रिया के लिए उपयोगी बनाने पर जोर दिया।
समय पर रिपोर्ट देने के निर्देश
एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने निर्देश दिए कि पुलिस द्वारा MLC या पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए मामलों की रिपोर्ट निर्धारित समय में ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अभियोजन के बीच बेहतर तालमेल से मामलों की जांच तेजी से पूरी हो सकेगी।
बैठक में CMHO डॉ. जी.एस. जात्रा, सिविल सर्जन डॉ. इंदवार, जिला अभियोजन अधिकारी सुरेश कुमार साहू, एडीपीओ विपिन शर्मा सहित पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, FSL और CCTNS से जुड़े अधिकारी मौजूद रहे। डॉ. देवेंद्र कुमार राठौर ने MedLEaPR की तकनीकी प्रक्रिया की जानकारी दी।
राज्यपाल श्री डेका ने 12 वर्षीय छात्र मास्टर दिव्यांश की पुस्तक ‘थॉट्स अबाउट गॉड‘ का किया विमोचन
राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज रायपुर के 12 वर्षीय छात्र मास्टर दिव्यांश सुल्तानिया द्वारा लिखित पुस्तक ‘थॉट्स अबाउट गॉड’ का विमोचन किया। उन्होंने दिव्यांश के रचनात्मक प्रयास की सराहना करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
दिव्यांश ने अपने दादा की प्रेरणा से इस पुस्तक की रचना की है। पुस्तक में एक युवा छात्र के दृष्टिकोण से ईश्वर और आध्यात्मिकता से जुड़े विचारों, सवालों और उसकी अपनी समझ को सहज रूप में प्रस्तुत किया गया है। कम उम्र में गंभीर और विचारपरक विषय पर पुस्तक लिखने के दिव्यांश के प्रयास को राज्यपाल ने सराहनीय बताया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने मास्टर दिव्यांश की दूसरी पुस्तक ‘फ्रॉम पॉकेट मनी टू पोर्टफोलियो’ के कवर को भी लॉन्च किया। यह पुस्तक बच्चों और युवाओं में कम उम्र से ही पैसे की बचत, निवेश और वित्तीय जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से छात्र द्वारा लिखी जा रही है। इसमें गुल्लक के माध्यम से बचत की आदत विकसित करने और बचाई गई राशि के उचित निवेश के विचार को सरल एवं व्यावहारिक तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा।
राज्यपाल ने कहा कि बच्चों में पढ़ने, लिखने और नए विषयों पर विचार करने की आदत विकसित करना उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने दिव्यांश को अपनी जिज्ञासा, रचनात्मकता और सीखने की ललक को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर दिव्यांश के पिता श्री सुधीर सुल्तानिया, माता श्रीमती सरिता सुल्तानिया सहित अन्य परिजन उपस्थित थे।
बड़े सपने देखें और मेहनत से उन्हें पूरा करें : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरगुजा के ग्रामीण क्षेत्रों से शैक्षणिक भ्रमण पर आए करीब 50 मेधावी विद्यार्थियों से मुख्यमंत्री ने की मुलाकात
रायपुर। सरगुजा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से शैक्षणिक भ्रमण पर रायपुर पहुंचे करीब 50 मेधावी छात्र-छात्राओं ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से उनके निवास कार्यालय में मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने बच्चों से बातचीत कर उनकी पढ़ाई, रुचियों और भविष्य के सपनों के बारे में जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि जीवन में बड़ा लक्ष्य तय करना चाहिए और उसे हासिल करने के लिए मेहनत, अनुशासन और लगन के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन भविष्य की नींव मजबूत करने का सबसे महत्वपूर्ण समय है।
हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सफलता का मतलब केवल डॉक्टर या इंजीनियर बनना नहीं है। आज शिक्षा, विज्ञान, खेल, तकनीक, प्रशासन, अनुसंधान और कारोबार सहित कई क्षेत्रों में आगे बढ़ने के अवसर हैं। विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता पहचानकर अपने लिए सही लक्ष्य चुनना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी अच्छी शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें। ऐसे शैक्षणिक भ्रमण से बच्चों को नए संस्थानों और करियर की संभावनाओं को करीब से समझने का मौका मिलता है।
IIM और ट्रिपल IT सहित संस्थानों का किया भ्रमण
शैक्षणिक भ्रमण में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कनकालों, बकिरमा, सुखरी, रामपुर, मेंड्राकला, करजी और शासकीय सेजेस केशवपुर के विद्यार्थी शामिल हुए।
विद्यार्थियों ने नवा रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM), ट्रिपल IT, ट्राइबल म्यूजियम और छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग कार्यालय सहित कई प्रमुख संस्थानों और स्थानों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने उच्च शिक्षा, अध्ययन और करियर से जुड़ी संभावनाओं के बारे में जानकारी ली।
केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने भी विद्यार्थियों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन में अनुशासन, मेहनत और समय का सही उपयोग भविष्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्वविजय सिंह तोमर, जिला पंचायत सदस्य पायल सिंह तोमर, शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
सिम्स में जटिल लिम्ब रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी सफल, चार साल से पैर की विकृति से जूझ रहे मरीज को मिली राहत
छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के ऑर्थोपेडिक्स विभाग में एक जटिल लिम्ब रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी सफलतापूर्वक की गई।
चार वर्ष पूर्व सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए मरीज कन्हैया के बाएं पैर में उत्पन्न विकृति को सर्जरी के माध्यम से ठीक करने का प्रयास किया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति संतोषजनक है तथा उसे चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।
मरीज कन्हैया का करीब चार वर्ष पहले एक सड़क दुर्घटना में बाएं पैर में गंभीर फ्रैक्चर हुआ था। निजी अस्पताल में उपचार के दौरान पैर में रॉड एवं प्लेट लगाई गई।
बाद में जटिलताओं और संक्रमण के कारण एक्सटर्नल फिक्सेटर की सहायता से उपचार किया गया। लगभग एक वर्ष बाद एक्सटर्नल फिक्सेटर को एम्स रायपुर में हटाया गया। इसके बाद मरीज के पैर में टेढ़ापन एवं विकृति उत्पन्न हो गई और उसे पैर पर वजन डालने तथा सामान्य रूप से चलने में परेशानी होने लगी।
पैर की बढ़ती विकृति और कार्यक्षमता में आ रही कमी को देखते हुए मरीज को सिम्स बिलासपुर लाया गया। यहां ऑर्थोपेडिक्स विभाग की टीम ने मरीज की स्थिति का विस्तृत चिकित्सकीय मूल्यांकन किया। जांच के बाद प्रभावित पैर की संरचना को सुधारने और उसकी कार्यक्षमता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से जटिल लिम्ब रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी करने का निर्णय लिया गया।
चिकित्सकीय टीम के सामूहिक प्रयास से जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की गई।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि सिम्स में गंभीर और जटिल मामलों के उपचार के लिए विभिन्न विशेषज्ञ विभागों की टीम समन्वय के साथ कार्य कर रही है। लिम्ब रिकंस्ट्रक्शन जैसी चुनौतीपूर्ण सर्जरी के सफल परिणाम से मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में सिम्स की क्षमता और विशेषज्ञता मजबूत होती है। हमारा प्रयास है कि मरीजों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ संस्थान में ही उपलब्ध कराया जाए।
सिम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि जटिल ऑर्थोपेडिक मामलों में समय पर सही मूल्यांकन और विशेषज्ञ उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है। सिम्स की टीम ने इस मामले में बेहतर समन्वय के साथ उपचार किया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के बाद मरीज की नियमित निगरानी, फिजियोथेरेपी और चिकित्सकों द्वारा बताए गए उपचार का पालन उसकी आगे की रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मरीज का संपूर्ण उपचार आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पूर्णतः निःशुल्क किया गया। सर्जरी का उद्देश्य प्रभावित पैर की संरचना एवं कार्यक्षमता में सुधार करना तथा मरीज को बेहतर गतिशीलता प्रदान करना है।
ऑपरेशन के बाद मरीज चिकित्सकीय निगरानी में है और उसकी स्थिति संतोषजनक बताई जा रही है। चिकित्सकों के अनुसार नियमित फॉलो-अप और फिजियोथेरेपी के माध्यम से मरीज की चलने-फिरने की क्षमता में आगे और सुधार की संभावना है।
सिम्स में हुई यह सफल लिम्ब रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी जटिल ऑर्थोपेडिक समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के लिए उपचार की नई संभावनाओं को दर्शाती है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम के माध्यम से जटिल मामलों का उपचार सिम्स में ही उपलब्ध कराया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ के स्टील का प्रदेश में ही हो अधिकतम मूल्य संवर्धन: डाउनस्ट्रीम और स्पेशियलिटी उत्पादों के निर्माण पर दें जोर - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के सहयोग से आयोजित ‘छत्तीसगढ़ इंडस्ट्री डायलॉग ऑन ग्रीन स्टील’ में ₹13,840 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन परियोजनाओं से प्रदेश में 10,921 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्टील और खनन छत्तीसगढ़ की औद्योगिक पहचान की मजबूत नींव हैं और आगे भी हमारी ताकत बने रहेंगे। अब समय इस मजबूत नींव पर औद्योगिक विकास की नई इमारत खड़ी करने का है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल स्टील उत्पादन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि छत्तीसगढ़ में उत्पादित स्टील का अधिकतम मूल्य संवर्धन भी प्रदेश के भीतर ही होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का स्टील प्राथमिक रूप में प्रदेश से बाहर जाने के बजाय यहीं ऑटो कम्पोनेंट्स, इंजीनियरिंग उत्पाद, रेलवे, रक्षा और सौर ऊर्जा उपकरणों जैसे डाउनस्ट्रीम एवं स्पेशियलिटी उत्पादों में परिवर्तित हो। जब मूल्य संवर्धन छत्तीसगढ़ में होगा, तो रोजगार भी छत्तीसगढ़ में ही सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस दिशा में निवेश करने वाले प्रत्येक निवेशक के साथ पूरी प्रतिबद्धता से खड़ी है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शून्य कार्बन उत्सर्जन के वैश्विक लक्ष्यों के अनुरूप दुनिया तेजी से ग्रीन स्टील की ओर बढ़ रही है और छत्तीसगढ़ देश के उन अग्रणी राज्यों में है, जिन्होंने इस बदलाव को समय रहते अपनाया है। प्रदेश में 26 हजार मेगावाट से अधिक विद्युत उपलब्धता तथा प्रतिस्पर्धी औद्योगिक विद्युत दरें ऊर्जा-आधारित डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग के लिए छत्तीसगढ़ को विशेष रूप से अनुकूल बनाती हैं।
*18 महीनों में लगभग ₹8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव*
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 ने निवेश के नए द्वार खोले हैं। पिछले 18 महीनों में प्रदेश को लगभग ₹8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें स्टील और खनन जैसे पारंपरिक क्षेत्रों के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल, टेक्सटाइल और एग्रो-प्रोसेसिंग जैसे भविष्य के क्षेत्रों में भी बड़े निवेश प्रस्ताव शामिल हैं।
प्रदेश में निवेशकों का विश्वास बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने कारोबारी प्रक्रियाओं में व्यापक सुधार किए हैं। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जिसने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट’ लागू किया है। इसके तहत कम जोखिम वाले उद्यमों के लिए स्व-प्रमाणीकरण, जोखिम आधारित नियामकीय व्यवस्था तथा निर्धारित समय-सीमा में आवेदन का निराकरण नहीं होने पर डीम्ड अप्रूवल जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। इन सुधारों से प्रदेश के लगभग 15 लाख एमएसएमई को लाभ मिलने की उम्मीद है।
CRISIL-NITI Aayog Investment Friendliness Index 2026 में छत्तीसगढ़ ने प्रमुख राज्यों के बीच ‘रेगुलेटरी ईज’ और ‘इंस्टीट्यूशनल एनवायरनमेंट’ में प्रथम स्थान तथा ‘एनवायरनमेंटल रेजिलिएंस’ में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। हाल ही में नई दिल्ली में गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस के दसवें स्थापना दिवस समारोह में छत्तीसगढ़ को ‘GeM Sustainable Procurement Award’ से भी सम्मानित किया गया है।
*औद्योगिक विकास का विस्तार अब नए क्षेत्रों तक*
राज्य सरकार औद्योगिक विकास को रायपुर-भिलाई के परंपरागत औद्योगिक क्षेत्र से आगे प्रदेश के अन्य जिलों तक विस्तार दे रही है। राजनांदगांव, धमतरी, जांजगीर-चांपा और बस्तर जिलों में चार नए औद्योगिक पार्क स्वीकृत किए गए हैं।
भारत सरकार ने राजनांदगांव में लगभग 306 एकड़ क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC 2.0) को भी स्वीकृति प्रदान की है। इससे बड़े पैमाने पर निवेश और लगभग 9 हजार रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल और स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की कंपनियों ने इस क्लस्टर में रुचि दिखाई है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने निवेशकों को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा, "हमारी नीति स्पष्ट है, प्रक्रियाएं पारदर्शी हैं और अनुमतियां तय समय-सीमा में मिल रही हैं। यहां रेड टेप के लिए कोई जगह नहीं है। हम साथ मिलकर काम करेंगे और साथ मिलकर सफलता की नई कहानी लिखेंगे।”
उन्होंने कहा कि ग्रीन स्टील और डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग के माध्यम से छत्तीसगढ़ अब अपनी खनिज संपदा को प्रदेश के भीतर ही अधिक मूल्य, अधिक निवेश और अधिक रोजगार में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
छत्तीसगढ़ को ‘GeM सस्टेनेबल प्रोक्योरमेंट अवार्ड’, शासकीय खरीदी दोगुनी होकर ₹3,935 करोड़ पहुंची।
छत्तीसगढ़ को गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) के 10वें स्थापना दिवस समारोह में ‘GeM सस्टेनेबल प्रोक्योरमेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली में आयोजित समारोह में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल की गरिमामयी उपस्थिति में यह सम्मान प्रदान किया गया। GeM के एक दशक पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित समारोह की थीम ‘GeM 10: A Decade of Exponential Possibilities’ रही।
राज्य सरकारों के लिए निर्धारित ‘प्रीमियर अवार्ड्स – स्टेट गवर्नमेंट फेलिसिटेशन’ श्रेणी के अंतर्गत छत्तीसगढ़ को यह पुरस्कार GeM के प्रभावी उपयोग तथा इसके माध्यम से शासकीय खरीदी के मूल्य और मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि के लिए प्रदान किया गया है।
खुली प्रतिस्पर्धा से ₹130 करोड़ की बचत
GeM प्लेटफॉर्म पर पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के कारण वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ शासन को ₹130 करोड़ की बचत हुई है। यह बचत विभागों द्वारा खरीदी के लिए अनुमानित लागत और खुली प्रतिस्पर्धी बोली के बाद प्राप्त वास्तविक बाजार मूल्य के अंतर से हुई है।
GeM की खुली बोली प्रक्रिया, मानकीकृत विनिर्देश और प्रत्येक लेन-देन का डिजिटल एवं ऑडिट योग्य रिकॉर्ड शासकीय खरीदी में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करता है। पिछले तीन वित्तीय वर्षों में प्रतिस्पर्धी खरीदी के माध्यम से राज्य शासन को कुल ₹235 करोड़ की बचत हुई है।
खरीदी प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में निर्धारित जांच और निगरानी व्यवस्था लागू है। साथ ही निविदा की शर्तों एवं तकनीकी विनिर्देशों की नियमित समीक्षा की जाती है, जिससे खरीदी की गुणवत्ता सुनिश्चित होने के साथ बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप वस्तुओं और सेवाओं की उपलब्धता बनी रहे।
GeM से खरीदी में 113 प्रतिशत की वृद्धि
छत्तीसगढ़ में GeM के माध्यम से शासकीय खरीदी वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर ₹3,935 करोड़ पहुंच गई। यह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 113 प्रतिशत की वृद्धि है।
राज्य शासन द्वारा विभागों, निगमों और स्थानीय निकायों की खरीदी को एक साझा एवं पारदर्शी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने के सुनियोजित प्रयासों से यह वृद्धि संभव हुई है। इससे अधिकाधिक शासकीय खरीदी खुली प्रतिस्पर्धा के दायरे में आई है और प्रत्येक लेन-देन में प्रतिस्पर्धी दर निर्धारण तथा पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है।
सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को ₹1,800 करोड़ के ऑर्डर
GeM के व्यापक उपयोग से शासकीय खरीदी में छोटे उद्यमियों की भागीदारी भी तेजी से बढ़ी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (MSEs) से खरीदी 61 प्रतिशत बढ़कर ₹1,800 करोड़ हो गई। यह निर्धारित 25 प्रतिशत MSE खरीद लक्ष्य से काफी अधिक है।
राज्य के प्राथमिकता वाले उद्यमी वर्गों की भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। महिला उद्यमियों से खरीदी में 97 प्रतिशत और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के उद्यमियों से खरीदी में 108 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं स्टार्टअप से खरीदी में सर्वाधिक 178 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
GeM ने उद्यमियों के लिए खोले शासकीय बाजार के द्वार : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि GeM ने छत्तीसगढ़ के उद्यमियों को बिना किसी मध्यस्थ के सीधे शासकीय मांग और बाजार से जुड़ने का सशक्त माध्यम उपलब्ध कराया है। महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के उद्यमियों और स्टार्टअप की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि इस पारदर्शी व्यवस्था की सफलता को दर्शाती है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि खुला और पारदर्शी डिजिटल मार्केटप्लेस प्रत्येक उद्यमी को समान अवसर प्रदान करता है। हमारी सरकार का प्रयास है कि इस व्यवस्था का लाभ प्रदेश के अधिक से अधिक सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों, महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति-जनजाति के उद्यमियों और स्टार्टअप तक पहुंचे। हम पारदर्शी शासकीय खरीदी के साथ स्थानीय उद्यमिता को सशक्त बनाकर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।
लोक निर्माण विभाग के सचिव ने सड़क एवं भवन निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की बरसात के बाद अतिवृष्टि एवं बाढ़ से खराब हुए सड़कों-पुलों के निर्माण व सुधार सर्वोच्च प्राथमिकता से करने के दिए निर्देश
लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने आज दुर्ग परिक्षेत्र के सभी संभागों में निर्माणाधीन सड़कों और भवनों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने नवा रायपुर में पीडब्लूडी मुख्यालय ‘निर्माण भवन’ में आयोजित बैठक में अधिकारियों से प्रस्तावित, स्वीकृत और निर्माणाधीन कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने निर्माण कार्यों और कार्यक्रमों के बिलों के भुगतान के साथ ही प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त कार्यों की निविदा प्रक्रिया की प्रगति की जानकारी ली और आवश्यक निर्देश दिए। श्री बंसल ने अधिकारियों से कार्यों की गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने को कहा। उन्होंने ठेकेदारों द्वारा किए गए कार्यों का मूल्यांकन कर हर महीने भुगतान के निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी, दुर्ग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री एन.के. जयंत और विद्युत एवं यांत्रिकी परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री टी.आर. कुंजाम भी बैठक में मौजूद थे।
श्री बंसल ने वर्षा ऋतु के बाद अतिवृष्टि एवं बाढ़ से खराब हुए सड़कों एवं पुलों के निर्माण व सुधार के कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रभावित सड़कों व पुलों पर आवागमन यथाशीघ्र प्रारंभ करना है। उन्होंने चालू मानसून सीजन में सड़कों की पेच रिपेयरिंग और गड्ढा भरने के काम तत्काल करने को कहा। उन्होंने ठेकेदारों को नोटिस देकर परफॉर्मेंस गारंटी की सड़कों की भी मरम्मत तत्काल सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने बरसात के बाद बी.टी. पेच रिपेयरिंग के काम युद्ध स्तर पर करने के लिए 31 सितम्बर तक एजेंसियां तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए 31 अगस्त तक निविदा की प्रक्रिया पूर्ण करने को कहा।
लोक निर्माण विभाग के सचिव ने मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता को हर महीने कार्यपालन अभियंताओं एवं अनुविभागीय अधिकारियों की बैठक लेकर निर्माण कार्यों के साथ ही निविदा प्रक्रिया की प्रगति, बिलों के भुगतान, न्यायालयीन प्रकरणों, मानव संसाधन तथा कार्यालयीन व्यवस्थाओं से जुड़े विषयों की समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी अभियंताओं को सप्ताह में कम से कम दो दिन कार्यस्थलों का दौरा कर निर्माण कार्यों के निरीक्षण एवं मॉनिटरिंग करने को कहा। उन्होंने ठेकेदारों से नियमित संपर्क और समन्वय बनाकर निर्धारित टाइम-लाइन के अनुसार कार्यों की प्रगति सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने बैठक में पहुंचविहीन गांवों में बारहमासी संपर्क के लिए सड़कों एवं पुलों तथा द्रुतगामी सड़कों के प्रस्तावों की भी जानकारी ली। उन्होंने आपसी सहमति से होने वाले भू-अर्जन की कार्यवाही 3 महीने में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने भू-अर्जन के तत्काल बाद नामांतरण भी कराने को कहा।
विभागीय सचिव ने पूर्ण हो चुके निर्माण कार्यों की जीएसटी, रायल्टी व ठेकेदारों के फायनल भुगतान सहित सभी देयकों के भुगतान आगामी 30 सितम्बर तक करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्य पूर्ण होने के तीन महीने के भीतर सभी देयकों का भुगतान कर और प्रमाण पत्र उपलब्ध कराकर पीडब्लूडी-आईएमएस (PWD-IMS) में कार्यों को क्लोज करें। श्री बंसल ने आयोजनों एवं कार्यक्रमों के बिलों के भुगतान नियमित रूप से एक माह के भीतर करने के निर्देश दिए। उन्होंने राज्य शासन के निर्देशों के अनुरूप एक ही टेबल पर तीन वर्षों से अधिक समय से काम कर रहे अधिकारियों-कर्मचारियों की सूची तैयार कर 30 सितम्बर तक नई पदस्थापना के निर्देश दिए। उन्होंने प्रमुख अभियंता को अधिकारियों के वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (ACR) में उनके द्वारा समय-सीमा में पूर्ण किए गए निर्माण कार्यों की संख्या की मार्किंग के लिए पत्र जारी करने को कहा।
श्री बंसल ने पीडब्लूडी-आईएमएस (PWD-IMS) में विभाग के सभी कार्यों की एंट्री 31 अगस्त तक करने के निर्देश दिए। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2025-26 तथा 2026-27 के प्राथमिकता वाले नए कार्यों के प्राक्कलन भी 31 अगस्त तक जमा करने को कहा। उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, सीपीग्राम्स (CPGRAMS – Centralized Public Grievances Redress & Monitoring System) तथा लोक सेवा गांरटी से संबंधित शिकायतों एवं आवेदनों का त्वरित और प्रभावी निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यपालन अभियंताओं को हर 15 दिनों में स्वयं इन पोर्टल्स को देखकर निराकरण की स्थिति से अवगत रहने को कहा।
लोक निर्माण विभाग के सचिव ने दुर्ग परिक्षेत्र के सभी संभागों में अनुकंपा नियुक्ति और न्यायालयीन मामलों की भी समीक्षा की। उन्होंने लंबित पेंशन प्रकरणों को 30 सितम्बर तक निराकृत करने के निर्देश दिए। उन्होंने इस वर्ष सेवानिवृत्त हो रहे अधिकारियों-कर्मचारियों के अमांग-अजांच प्रमाण पत्र भी संकलित करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के अपर सचिव श्री एस.एन. श्रीवास्तव, छत्तीसगढ़ सड़क एवं अधोसंरचना विकास निगम के अतिरिक्त प्रबंध संचालक श्री शशांक पाण्डेय, दुर्ग मंडल के अधीक्षण अभियंता श्री बी.के. पटोरिया और विद्युत एवं यांत्रिकी के अधीक्षण अभियंता श्री सुरेश भूपल तथा दुर्ग परिक्षेत्र के सभी 7 संभागों के कार्यपालन अभियंता और अनुविभागीय अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।
हरेली तिहार पर मुख्यमंत्री निवास बगिया में विधिवत हुआ पूजन, मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों को दी हरेली तिहार की हार्दिक बधाई।
जशपुरनगर। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक एवं लोकपर्व हरेली तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास बगिया में विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और हर परिवार के मंगल की कामना की।हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपरा, कृषि संस्कृति और प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक है। इस पर्व पर किसान अपने कृषि औजारों एवं पशुधन की पूजा कर अच्छी फसल और समृद्धि की कामना करते हैं। मुख्यमंत्री निवास बगिया में भी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हरेली पर्व मनाया गया।इस अवसर पर श्रीमती कौशल्या साय ने समस्त प्रदेशवासियों को हरेली तिहार की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने कहा कि हरेली हमारे छत्तीसगढ़ की माटी, संस्कृति और कृषि परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व हमें प्रकृति, खेती-किसानी और अपनी लोकपरंपराओं के संरक्षण का संदेश देता है।उन्होंने कामना की कि हरेली का यह पावन पर्व प्रदेश के प्रत्येक परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए तथा किसानों के खेतों में हरियाली और भरपूर फसल हो।हरेली तिहार के उल्लास के साथ मुख्यमंत्री निवास बगिया भी छत्तीसगढ़ की गौरवशाली लोकसंस्कृति और परंपराओं के रंग में रंगा नजर आया।
दोकड़ा में निकली भव्य तिरंगा यात्रा, देशभक्ति के रंग में रंगा क्षेत्र मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय हुईं शामिल, ट्रैक्टरों और मोटरसाइकिलों के साथ उमड़ा जनसैलाब
दोकड़ा। स्वतंत्रता दिवस के पूर्व बुधवार को राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति की भावना को लेकर दोकड़ा में भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। बगिया अटल चौक से दोकड़ा तक निकली इस तिरंगा यात्रा में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय विशेष रूप से शामिल हुईं। उनके साथ बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, जनप्रतिनिधि, किसान, युवा और स्कूली बच्चे हाथों में तिरंगा लेकर यात्रा का हिस्सा बने।
तिरंगा यात्रा के दौरान पूरा क्षेत्र देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। भारत माता के जयकारों और देशभक्ति के नारों से वातावरण गूंज उठा। हाथों में लहराते तिरंगे ने यात्रा को और भव्य बना दिया।
इस यात्रा की खास बात यह रही कि किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ तिरंगा लेकर यात्रा में शामिल हुए, वहीं युवाओं ने मोटरसाइकिलों के साथ उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। स्कूली बच्चों ने भी हाथों में तिरंगा थामकर पूरे जोश और अनुशासन के साथ यात्रा में भाग लिया।
यात्रा में श्री अशोक गुप्ता, राजेश फेंटा चौधरी,श्रीमती हीरामती पैंकरा, प्रमोद गुप्ता, दिनेश प्रसाद, रवि यादव, रामविलास राम, संजय सिंह, उपेंद्र नाथ साय, गुलाब सिंह, सरोज यादव, अटल बिहारी साय, प्रभु राम कुमावत एवं नंदलाल यादव सहित बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि, नागरिक एवं स्कूली बच्चे शामिल हुए।
मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने भी तिरंगा हाथ में लेकर यात्रा में शामिल लोगों का उत्साह बढ़ाया। उनके साथ मौजूद नागरिकों और बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला।
यात्रा में शामिल लोगों ने कहा कि तिरंगा देश की आन, बान और शान का प्रतीक है। तिरंगा यात्रा के माध्यम से समाज के हर वर्ग ने एकजुट होकर राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।
बगिया अटल चौक से दोकड़ा तक निकली इस यात्रा में किसानों के ट्रैक्टर, युवाओं की मोटरसाइकिलें, स्कूली बच्चों की कतार और हाथों में लहराते तिरंगे ने पूरे आयोजन को आकर्षक बना दिया। देशभक्ति के जोश और भारत माता के जयघोष के साथ यह तिरंगा यात्रा क्षेत्र में राष्ट्रप्रेम की मजबूत तस्वीर पेश करती नजर आई।
कलेक्टर रोहित व्यास ने बाकी नदी में निर्माणाधीन पुल का किया निरीक्षण निर्माण कार्य में तेजी लाने, गुणवत्ता के मानकों का पालन करते हुए समय-सीमा में पूर्ण करने के दिए निर्देश।
कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने आज जशपुर नगर को गम्हरिया से जोड़ने वाले प्रमुख संपर्क मार्ग पर बाकी नदी में निर्माणाधीन नवनिर्मित पुल का निरीक्षण किया। लगभग 3.84 करोड़ रुपये की लागत से 72 मीटर लंबाई के इस पुल का निर्माण कार्य वर्तमान में प्रगति पर है। यह पुल जशपुर नगर को गम्हरिया से जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग के बीच बहने वाली बाकी नदी में निर्मित हो रहा है। गम्हरिया से एनएच 43 होकर गुजरती है। ब्रिटिश शासनकाल में निर्मित पुराना पुल जर्जर हो चुका था, जिसे हटाकर इसके स्थान पर नए पुल का निर्माण किया जा रहा है। नए पुल के निर्माण से क्षेत्र में आवागमन अधिक सुगम एवं सुरक्षित होगा तथा लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री व्यास ने पुल निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया और निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का अनिवार्य रूप से पालन सुनिश्चित करने के साथ ही कार्य को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करें। कलेक्टर ने पुल एवं सड़क के आसपास सुरक्षा के पर्याप्त प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने सड़क किनारे आवश्यक सुरक्षा उपाय एवं अन्य प्रावधान करने को कहा, ताकि संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सके और आवागमन करने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।इस दौरान सेतु निर्माण विभाग के अनुविभागीय अधिकारी श्री मनोज मरकाम सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
बेटे ने सील-लोढ़ा से पिता के सिर पर किया वार, मौत; आरोपी गिरफ्तार
जशपुर। तपकरा थाना क्षेत्र के ऊपर कछार चौकी अंतर्गत ग्राम सिंगीबहार में घरेलू विवाद के दौरान बेटे द्वारा अपने पिता की हत्या करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने आरोपी बेटे सूरज सिंह (32) को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। हत्या में प्रयुक्त सील-लोढ़ा भी पुलिस ने बरामद कर लिया है।
पुलिस के अनुसार घटना 6 अगस्त 2026 की है। मृतक कृष्णा सिंह के भतीजे योगादर सिंह को गांव के एक व्यक्ति ने सूचना दी कि सूरज सिंह ने अपने पिता के साथ मारपीट की है और कृष्णा सिंह बेहोश पड़े हैं। सूचना मिलने पर योगादर सिंह मौके पर पहुंचा तो कृष्णा सिंह खाट पर बेहोश मिले। उनके नाक, मुंह और कान से खून निकल रहा था, जबकि आरोपी सूरज सिंह भी मौके पर मौजूद था।
परिजनों ने तत्काल एंबुलेंस की मदद से कृष्णा सिंह को शासकीय अस्पताल केरसेई पहुंचाया। हालत गंभीर होने पर उन्हें कुनकुरी रेफर किया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मामला तपकरा थाना क्षेत्र का होने के कारण कुनकुरी में दर्ज मर्ग की डायरी तपकरा थाना भेजी गई। पोस्टमार्टम एवं प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने बीएनएस की धारा 103(1) के तहत हत्या का अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की।
पुलिस पूछताछ में आरोपी सूरज सिंह ने बताया कि उसके पिता की कथित रूप से झगड़ालू प्रवृत्ति थी और आए दिन घर तथा बाहर विवाद करते थे। घटना के दिन भी दोनों के बीच इसी बात को लेकर विवाद हुआ। विवाद के दौरान आवेश में आकर सूरज ने घर में रखे सील-लोढ़ा से पिता के सिर पर वार कर दिया। गंभीर चोट लगने से उनकी मौत हो गई।
पुलिस ने आरोपी को 7 अगस्त को हिरासत में लेकर पूछताछ की। अपराध स्वीकार करने और पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त सील-लोढ़ा भी जब्त किया है।
कार्रवाई में थाना तपकरा प्रभारी निरीक्षक संदीप कौशिक, ऊपर कछार चौकी प्रभारी सहायक उप निरीक्षक भुनेश्वर भगत, प्रधान आरक्षक अजय कुमार लकड़ा तथा आरक्षक दिलीप खलखो, सोनू सिंह और अमेश पैंकरा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
ग्राम सभा में तय होगी गांव के विकास की दिशा, सचिवों की मनमानी पर लगेगा अंकुश,30 जुलाई को पंचायतों में विशेष ग्राम सभा का आयोजन,SDM ने लगाई अधिकारियों की ड्यूटी।

जशपुर जंक्शन 30 जुलाई
गांवों के विकास की दिशा अब बंद कमरों में नहीं, बल्कि ग्राम सभा के खुले मंच पर तय होगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के निर्देश पर 30 जुलाई 2026 को जिले की ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। इनमें 16वें वित्त आयोग के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 की ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार कर ग्राम सभा से अनुमोदित कराई जाएगी। इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बगीचा प्रदीप राठिया ने आदेश जारी करते हुए विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की ग्राम पंचायतवार ड्यूटी निर्धारित की है, ताकि ग्राम सभाओं का सफल संचालन और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से यह शिकायत सामने आती रही है कि ग्राम पंचायतों की विकास कार्ययोजना कई बार ग्राम सभा में व्यापक चर्चा और सहमति के बिना तैयार कर ली जाती है। कई मामलों में सरपंच और पंचों को भी प्रस्तावित कार्यों की पूरी जानकारी नहीं मिल पाती, जिसका लाभ उठाकर कुछ सचिव अपनी सुविधा के अनुसार कार्ययोजना तैयार कर देते हैं। इससे गांव की वास्तविक जरूरतें पीछे छूट जाती हैं और विकास कार्यों में प्राथमिकताओं का संतुलन बिगड़ जाता है।
परिणामस्वरूप सरकारी राशि का समुचित उपयोग नहीं हो पाता और कई बार अनावश्यक कार्यों पर खर्च होने की शिकायतें भी सामने आती हैं।इसी व्यवस्था में पारदर्शिता और जनभागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने विशेष ग्राम सभा आयोजित करने का निर्णय लिया है। अब ग्राम विकास की कार्ययोजना गांव के पंच, सरपंच, जनप्रतिनिधि, महिला समूह, युवा और ग्रामीणों की सहमति से तैयार होगी, ताकि सड़क, पेयजल, नाली, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, स्वच्छता तथा अन्य आवश्यक विकास कार्यों को प्राथमिकता मिल सके।
प्रशासन ने सभी ग्राम पंचायतों में अधिक से अधिक ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ग्राम पंचायतों का प्रभारी नियुक्त किया गया है, जो ग्राम सभा की कार्यवाही, उपस्थिति और विकास योजना के निर्माण की निगरानी करेंगे।
गांव के विकास का फैसला गांव की जनता करे
ग्राम सभा लोकतंत्र की सबसे सशक्त इकाई है। यदि पंच, सरपंच, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण सक्रिय होकर गांव की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रस्ताव पारित करेंगे, तो न केवल संभावित मनमानी पर प्रभावी अंकुश लगेगा, बल्कि 16वें वित्त आयोग की राशि का सदुपयोग भी सुनिश्चित होगा।
गांव का विकास तभी संभव है, जब विकास की योजना गांव की जनता स्वयं तय करे और ग्राम सभा उसे सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान करे।
थाना बगीचा के वार्षिक निरीक्षण में मिलीं गंभीर खामियां, टीआई और मोहर्रिर को डीआईजी-एसएसपी की कड़ी फटकार
डीआईजी एवं एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने थाना बगीचा का वार्षिक निरीक्षण कर पुलिसिंग व्यवस्था, कार्यालयीन अभिलेखों, शासकीय संपत्ति, मालखाना और थाना परिसर की व्यवस्थाओं का गहन परीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान रिकॉर्ड संधारण, जप्त सामग्री के रखरखाव और कार्यालयीन व्यवस्था में गंभीर कमियां मिलने पर थाना प्रभारी (टीआई) और मोहर्रिर को कड़ी फटकार लगाई गई। साथ ही सभी कमियों को तत्काल दूर कर अभिलेखों को व्यवस्थित एवं अद्यतन रखने के सख्त निर्देश दिए गए।
निरीक्षण के दौरान ग्राम अपराध पुस्तिका, जरायम रजिस्टर, लंबित अपराध, शिकायतें, जप्ती माल तथा अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों की समीक्षा की गई। डीआईजी-एसएसपी ने लंबित मामलों का त्वरित एवं नियमानुसार निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी प्रकरण में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए।
थाना परिसर की साफ-सफाई और स्वच्छता व्यवस्था का भी जायजा लिया गया। उन्होंने निर्देश दिए कि थाना परिसर हमेशा स्वच्छ, व्यवस्थित और नागरिकों के अनुकूल वातावरण वाला होना चाहिए। मालखाना और जप्त सामग्री के रखरखाव में भी कमियां मिलने पर संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाते हुए नियमानुसार सुरक्षित संधारण सुनिश्चित करने को कहा गया।
डीआईजी-एसएसपी ने कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए गुंडा-बदमाशों की नियमित निगरानी, प्रभावी गश्त और बीट पुलिसिंग को सुदृढ़ करने पर जोर दिया। उन्होंने पुलिस मितानों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने, जन चौपाल में प्राप्त शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने तथा आम जनता के साथ संवाद बढ़ाकर पुलिस के प्रति विश्वास मजबूत करने के निर्देश दिए।
महिला एवं बाल अपराधों में संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई, साइबर अपराध एवं ऑनलाइन ठगी के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने तथा तकनीकी संसाधनों का बेहतर उपयोग कर अपराध नियंत्रण को प्रभावी बनाने के भी निर्देश दिए गए।
निरीक्षण के दौरान पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की समस्याओं पर भी चर्चा की गई। डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा कि पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी आम नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी और संवेदनशील पुलिस सेवा उपलब्ध कराना है। उन्होंने थाना स्तर पर अनुशासन, जवाबदेही और प्रभावी पुलिसिंग सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया।
निरीक्षण के दौरान पुलिस कार्यालय जशपुर से उप निरीक्षक (स्टेनो) रामानंद बहिदार, रीडर मुकेश झा सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
स्मार्ट मीटर के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, उखाड़कर बिजली दफ्तर के सामने फेंके मीटर; कांग्रेस ने किया घेराव।
बढ़ते बिजली बिल और स्मार्ट मीटर के विरोध में शनिवार को पांडातराई में कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए बिजली विभाग के कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान माहौल तब और गरमा गया जब बड़ी संख्या में ग्रामीण अपने घरों से उखाड़कर लाए गए स्मार्ट मीटर बिजली दफ्तर के सामने फेंकने लगे। इस दौरान सरकार और बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई।
जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष नवीन जायसवाल और ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष घनश्याम साहू के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और ग्रामीण शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
कांग्रेस नेताओं ने स्मार्ट मीटर योजना को तत्काल वापस लेने, बढ़े हुए बिजली बिलों को संशोधित करने और उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग की। प्रदर्शन के बाद कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने बिजली विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को जिला स्तर पर और उग्र किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों द्वारा सैकड़ों स्मार्ट मीटर उखाड़कर बिजली कार्यालय के सामने फेंकना पूरे आंदोलन का सबसे चर्चित दृश्य रहा, जिसने क्षेत्र में स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ते जनाक्रोश को खुलकर सामने ला दिया।
कैबिनेट का बड़ा फैसला: अग्निवीरों को 10% आरक्षण, उर्वरक व्यवस्था के लिए मंत्री उप समिति गठित
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में किसानों और अग्निवीरों से जुड़े दो महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
कैबिनेट ने खरीफ और रबी सीजन में किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने, आपूर्ति एवं वितरण व्यवस्था की निगरानी और आवश्यक सुझाव देने के लिए मंत्री-मंडलीय उप समिति के गठन को मंजूरी दी। समिति के अध्यक्ष उप मुख्यमंत्री होंगे, जबकि कृषि, सहकारिता और वित्त मंत्री इसके सदस्य रहेंगे। कृषि उत्पादन आयुक्त समिति के संयोजक होंगे। समिति आवश्यकता अनुसार विशेषज्ञों और संबंधित विभागों के अधिकारियों को भी आमंत्रित कर सकेगी।
बैठक में अग्निवीर सैनिकों के पुनर्वास और रोजगार को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया। राज्य सरकार ने पुलिस विभाग में आरक्षक, वन विभाग में वनरक्षक और जेल विभाग में प्रहरी के तृतीय श्रेणी के पदों की सीधी भर्ती में अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया है। इसके लिए छत्तीसगढ़ के अग्निवीर सैनिकों के लिए राज्य की सिविल सेवाओं में तृतीय श्रेणी के पदों में रिक्तियों का आरक्षण नियम-2026 बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
यह आरक्षण उन अग्निवीरों को मिलेगा जिन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों में चार वर्ष की सेवा पूरी कर वैध सेवा प्रमाण-पत्र के साथ सेवामुक्ति प्राप्त की हो। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से प्रशिक्षित एवं अनुशासित अग्निवीरों को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे और पुलिस, वन तथा जेल विभाग को उनके अनुभव का लाभ मिलेगा।
राज्यपाल से प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों ने की सौजन्य मुलाकातसेवा भाव, संवेदनशीलता और तार्किक निर्णय से निभाएं दायित्व -श्री डेका।
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि प्रशासनिक सेवा केवल एक पद नहीं, बल्कि आम जनता की सेवा का महत्वपूर्ण अवसर है। इस अवसर का पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और ईमानदारी से निर्वहन करना प्रत्येक अधिकारी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि जहां चुनौतियां होती हैं, वहीं नए अवसर भी मौजूद होते हैं। इसलिए प्रत्येक परिस्थिति का सकारात्मक दृष्टिकोण से सामना करते हुए जनता के हित में निर्णय लिए जाने चाहिए।
राज्यपाल आज लोकभवन में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के वर्ष 2025 बैच के प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों से चर्चा कर रहे थे। ये अधिकारी वर्तमान में छत्तीसगढ़ प्रशासनिक अकादमी, निमोरा में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। प्रशिक्षणार्थी अधिकारियों ने अकादमी के महानिदेशक श्री टी.सी. महावर के नेतृत्व में राज्यपाल से सौजन्य भेंट की।
राज्यपाल ने कहा कि प्रशासनिक निर्णय में मानवीय संवेदनाओं का भी समावेश होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक कार्य में ह्यूमन टच होना आवश्यक है, ताकि शासन की योजनाओं और निर्णयों का लाभ वास्तविक रूप से आम नागरिकों तक पहुंच सके। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को जनता से नियमित संवाद करना चाहिए, क्षेत्र का सतत भ्रमण करना चाहिए और लोगों की समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो कार्य संभव हो, उसे प्राथमिकता के साथ पूरा करें और यदि किसी कारणवश कोई कार्य संभव नहीं है तो उसकी स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी संबंधित व्यक्ति को अवश्य दें। इससे प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत होता है।
राज्यपाल ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों के लिए तार्किक सोच और विवेकपूर्ण निष्कर्ष अत्यंत आवश्यक हैं। तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लेना ही एक सक्षम अधिकारी की पहचान है। उन्होंने कहा कि जनता को न्याय दिलाना लोक सेवक का प्रथम कर्तव्य है और प्रत्येक अधिकारी को इस भावना के साथ कार्य करना चाहिए।
उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि वे युवा हैं और उनके कंधों पर भविष्य के प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्हें अपने कार्यों के माध्यम से सुशासन, पारदर्शिता और जनविश्वास को मजबूत करना होगा। राज्यपाल ने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि आपको छत्तीसगढ़ जैसे शांत, समृद्ध और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य में सेवा करने का अवसर मिला है। यहां के लोगों में सेवा, सहयोग और आत्मीयता की भावना अत्यंत प्रबल है। इस विश्वास और अपनत्व को बनाए रखते हुए जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना ही एक सफल प्रशासनिक अधिकारी की पहचान होगी।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रशासनिक अकादमी की प्रशिक्षण निदेशक श्रीमती मेनका प्रधान एवं प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।
मेडिकल कॉलेज की मंजूरी से कांग्रेस की राजनीति हुई बेनकाब,कांग्रेस ने जनता को किया गुमराह - भरत सिंह,भाजपा जिलाध्यक्ष,सीएम साय के प्रयास से विकास को मिली नई उड़ान।
राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग द्वारा जशपुर कुनकुरी शासकीय मेडिकल कॉलेज को 50 एमबीबीएस सीटों के साथ अंतिम अनुमति मिलने पर भाजपा जिलाध्यक्ष भरत सिंह ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और राज्य सरकार को बधाई देते हुए इसे जशपुर के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।
भरत सिंह ने जारी बयान में कहा कि पिछले दिनों मेडिकल कॉलेज की अनुमति को लेकर कांग्रेस ने अनावश्यक भ्रम फैलाने और राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास किया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तकनीकी कारण से प्रक्रिया में अस्थायी विलंब हुआ था, लेकिन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य शासन ने तत्परता से आवश्यक कार्रवाई की और सभी औपचारिकताएं पूरी कराकर मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति सुनिश्चित की।
उन्होंने कहा कि "आज NMC की अंतिम अनुमति ने कांग्रेस के दावों की पोल खोल दी है। जनता को गुमराह करने की राजनीति करने वालों को मुंह की खानी पड़ी है।"
भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि विष्णुदेव साय सरकार विकास की राजनीति करती है, जबकि कांग्रेस केवल भ्रम और आरोपों की राजनीति में विश्वास रखती है। मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार जशपुर के विकास और युवाओं के भविष्य के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज शुरू होने से जशपुर सहित पूरे उत्तर छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र में ही चिकित्सा शिक्षा का अवसर मिलेगा और स्वास्थ्य सेवाओं को भी नई मजबूती मिलेगी।
भरत सिंह ने कहा कि यह जशपुर की जनता की जीत है और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में विकास कार्यों की गति आगे भी इसी तरह जारी रहेगी।
जशपुर के चार वन परिक्षेत्रों में 32 हाथियों का दल सक्रिय, कई गांवों में अलर्ट,डीएफओ ने की ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील
जशपुर वनमंडल के चार वन परिक्षेत्रों में लगभग 32 हाथियों का दल सक्रिय रूप से विचरण कर रहा है। हाथियों की लगातार आवाजाही को देखते हुए वन विभाग ने प्रभावित गांवों में सतर्कता बढ़ा दी है। विभाग की रैपिड रिस्पांस टीम और मैदानी अमला चौबीसों घंटे हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं तथा ग्रामीणों को समय-समय पर सूचना देकर सतर्क किया जा रहा है।
डीएफओ शशि कुमार ने बताया कि वर्तमान में दुलदुला, पत्थलगांव, कांसाबेल और बगीचा वन परिक्षेत्र के कई गांवों के आसपास हाथियों का दल विचरण कर रहा है। दुलदुला वन परिक्षेत्र के धुरीआम्बा, करडेगा, केंदापानी, धांधआम्बा, बुकना, मधुटोली और कोहड़ा पहरी,पत्थलगांव वन परिक्षेत्र के खाडामाचा,हरदीझरिया, पीटाआमा,राजाआमा, खमरगड़ा, महेशपुर, काडरो और झिमकी, कांसाबेल वन परिक्षेत्र के चेटबा, नारायण बहली, मड़ियाझरिया और सोनाजोरी तथा बगीचा वन परिक्षेत्र के झिकी, खंताडांड़, टटकेला, परसाडांड़, पेटा, कुरडेग, बिमड़ा, सामरबार, दुर्गापारा, सुईकोना, मैनी, बुचीडांड, जुजगु और कुरडेग के आसपास हाथियों की गतिविधियां दर्ज की गई हैं।
डीएफओ शशि कुमार ने बताया कि हाथियों की लोकेशन का नियमित रूप से पता लगाकर आसपास के गांवों में तत्काल सूचना पहुंचाई जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों में लगातार मुनादी कर ग्रामीणों को हाथियों की मौजूदगी और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथियों के विचरण वाले क्षेत्रों में लकड़ी, चारा या अन्य कार्यों के लिए जंगल में अनावश्यक प्रवेश न करें। किसी भी परिस्थिति में हाथियों के पास जाने, उन्हें उकसाने, उनका पीछा करने अथवा सेल्फी और वीडियो बनाने का प्रयास न करें। विशेष रूप से रात के समय हाथियों के विचरण वाले क्षेत्रों में जाने से बचें।
डीएफओ ने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी दिखाई दे या उनकी गतिविधियों की जानकारी मिले तो इसकी सूचना तत्काल निकटस्थ वन अधिकारी, वन कर्मचारी या आरआरटी को दें। अफवाहों पर विश्वास न करें और केवल वन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं का ही पालन करें।
वन विभाग का कहना है कि ग्रामीणों की सतर्कता, समय पर सूचना और विभाग के साथ सहयोग से हाथी-मानव द्वंद्व की घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।
शाला प्रवेश उत्सव में नवप्रवेशी बच्चों का आत्मीय स्वागत, मंत्री राजेश अग्रवाल ने बांटी अध्ययन सामग्री।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने शनिवार को स्वामी आत्मानंद गवर्नमेंट अंग्रेजी माध्यम स्कूल, उदयपुर में आयोजित विकासखंड स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव में शामिल होकर नवप्रवेशी विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने बच्चों को मिठाई खिलाकर नए शैक्षणिक सत्र की शुभकामनाएं दीं तथा अध्ययन सामग्री वितरित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर, संस्कारित और सशक्त समाज की मजबूत नींव है। प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी प्रतिभा निखारने और सपनों को साकार करने के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित विद्यालय आने, मन लगाकर अध्ययन करने और जीवन में ऊंचे लक्ष्य निर्धारित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व निर्माण की पाठशाला भी है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिनकी मंत्री ने सराहना की। इस अवसर पर मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन की प्रशंसा की गई तथा भविष्य में भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया गया।
मंत्री राजेश अग्रवाल ने नए शैक्षणिक सत्र के लिए विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में परिवार और शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके संयुक्त प्रयासों से ही शिक्षित, जागरूक और सशक्त समाज का निर्माण संभव है।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, शिक्षक, अभिभावक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जारी की महतारी वंदन योजना की 29वीं किश्त, 66 लाख महिलाओं के खातों में पहुंचे 626.25 करोड़ रुपये
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शनिवार को मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से महतारी वंदन योजना की 29वीं किश्त जारी करते हुए प्रदेश की 66 लाख से अधिक महिलाओं के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से 626.25 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े भी उपस्थित रहीं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के सम्मान, आत्मनिर्भरता और आर्थिक स्वावलंबन की नई पहचान बन चुकी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। आज जारी की गई किश्त के साथ योजना के तहत अब तक 29 किश्तों में कुल 18,805.83 करोड़ रुपये सीधे हितग्राही महिलाओं के बैंक खातों में पहुंचाए जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में महिला सशक्तिकरण के लिए चलाए जा रहे अभियान को छत्तीसगढ़ सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों के दौरे के दौरान अनेक महिलाओं ने उन्हें बताया कि योजना से मिलने वाली राशि से उन्होंने छोटे व्यवसाय शुरू किए, सिलाई-कढ़ाई एवं स्वरोजगार अपनाया, जबकि कई परिवारों ने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में इस राशि का उपयोग किया है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महतारी वंदन योजना के साथ-साथ 'लखपति दीदी' जैसी योजनाओं के माध्यम से भी महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ई-केवाईसी की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कर सभी पात्र महिलाओं तक योजना का लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। विशेष रूप से बस्तर संभाग में इस कार्य को प्राथमिकता के साथ पूरा करने पर जोर दिया गया।
उल्लेखनीय है कि महतारी वंदन योजना 1 मार्च 2024 से प्रदेश में लागू है। इसके तहत 21 वर्ष या उससे अधिक आयु की पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाती है। योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान करने के साथ परिवार के पोषण, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, कुपोषण एवं एनीमिया की रोकथाम तथा स्वरोजगार को बढ़ावा देना है।
बारिश के मौसम में करंट से होने वाली दुर्घटनाओं से बचने विद्युत कंपनी ने जारी की एडवाइजरी।
बारिश का मौसम शुरू होते ही विद्युत करंट से होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। बिजली के खंभों, एचटी लाइनों, टूटे तारों तथा विद्युत उपकरणों के संपर्क में आने से हर वर्ष कई हादसे होते हैं, जिनमें कई बार लोगों की जान तक चली जाती है। इन दुर्घटनाओं से बचाव के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने आम नागरिकों के लिए सुरक्षा संबंधी एडवाइजरी जारी करते हुए विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।
कंपनी ने कहा है कि थोड़ी-सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसलिए विद्युत लाइनों, ट्रांसफार्मरों एवं अन्य विद्युत उपकरणों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें तथा किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करें। यदि आंधी-तूफान या बारिश के दौरान बिजली के खंभे, तार अथवा अन्य उपकरण क्षतिग्रस्त दिखाई दें, तो इसकी सूचना तत्काल कंपनी के टोल-फ्री नंबर 1912, मोर बिजली ऐप अथवा निकटतम वितरण केंद्र या जोन कार्यालय में दें।
बारिश के दौरान बिजली के खंभों, तारों और ट्रांसफार्मरों से दूर रहें। जहां विद्युत तार या उपकरण मौजूद हों, वहां पानी में करंट फैलने की संभावना रहती है। ऐसे स्थानों पर पानी में चलने या तैरने से बचें। विद्युत उपकरणों का उपयोग करते समय हाथ-पैर सूखे रखें तथा रबर या प्लास्टिक के जूते-चप्पलों का उपयोग करें। विभाग ने बताया कि बारिश से पहले सभी फीडरों, ट्रांसफार्मरों एवं विद्युत लाइनों का निरीक्षण और आवश्यक रखरखाव किया जा चुका है। इसके बावजूद नागरिकों की सतर्कता अत्यंत आवश्यक है।
*दुर्घटनाओं से बचने के लिए इन सावधानियों का रखें-*
घरों, खेतों एवं अन्य स्थानों पर केवल गुणवत्तापूर्ण विद्युत उपकरणों का उपयोग करें। खेत या बाड़ी की बाड़ तथा कंटीले तारों में बिजली प्रवाहित न करें। यह अवैध होने के साथ-साथ जानलेवा भी हो सकता है तथा संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
विद्युत लाइनों, ट्रांसफार्मरों या अन्य उपकरणों में खराबी आने पर स्वयं सुधार करने का प्रयास न करें। बिजली की लाइनों के नीचे अथवा उनके समीप स्थायी या अस्थायी निर्माण न करें तथा सुरक्षित दूरी बनाए रखें। यदि कोई विद्युत तार टूटकर जमीन, नदी, नाले या तालाब में गिरा हुआ मिले, तो उससे पर्याप्त दूरी बनाए रखें और तत्काल संबंधित लाइनमैन, कनिष्ठ अभियंता अथवा टोल-फ्री नंबर 1912 पर सूचना देकर विद्युत प्रवाह बंद कराएं।
बिजली की लाइनों से हुकिंग कर अनाधिकृत रूप से बिजली का उपयोग न करें। कपड़े सुखाने के लिए बिजली के खंभों या स्टे वायर का उपयोग न करें तथा कपड़े सुखाने वाले तार को विद्युत लाइनों से पर्याप्त दूरी पर रखें। अस्थायी विद्युत कनेक्शन के लिए कटे-फटे तारों का उपयोग न करें तथा बच्चों को विद्युत उपकरणों एवं लाइनों के आसपास खेलने से रोकें।
*यदि कोई व्यक्ति करंट की चपेट में आ जाए तो यह करें-*
सबसे पहले मुख्य स्विच बंद कर विद्युत प्रवाह तत्काल रोकें। यदि स्विच बंद करना संभव न हो, तो सूखी लकड़ी, सूखी रस्सी या सूखे कपड़े की सहायता से पीड़ित को बिजली के स्रोत से अलग करें। सीधे हाथ लगाने का प्रयास न करें। पीड़ित को सूखी जगह पर लिटाकर प्राथमिक उपचार दें, आवश्यकता होने पर कृत्रिम श्वास दें तथा तत्काल निकटतम अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था करें।
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड, बिलासपुर क्षेत्र के कार्यपालक निदेशक श्री ए.के. अंबस्थ ने कहा कि भीषण गर्मी, आंधी-तूफान और बारिश के दौरान विद्युत व्यवस्था बनाए रखना बिजली कर्मियों के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। ऐसे मौसम में फॉल्ट ढूंढ़ने और उसे सुधारने के लिए कर्मचारियों को प्रतिकूल परिस्थितियों में लगातार कार्य करना पड़ता है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि बिजली आपूर्ति बाधित होने पर घबराने के बजाय 5 से 10 मिनट प्रतीक्षा करें और आवश्यकता होने पर टोल-फ्री नंबर 1912 पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही, लाइन कर्मचारियों को सुधार कार्य में सहयोग दें तथा विद्युत लाइनों एवं उपकरणों से किसी प्रकार की छेड़छाड़ न करें।
उन्होंने कहा कि विद्युत व्यवस्था के सुरक्षित एवं सुचारु संचालन में उपभोक्ताओं का सहयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है। थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर न केवल दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है, बल्कि लोगों के जीवन और संपत्ति की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है जान है तो जहान है।
मानसून में भी पर्यटन का आनंद: बारनावापारा अभयारण्य 31 अक्टूबर तक बंद बफर क्षेत्रों में शुरू हुआ नया पर्यटन सर्किट
वन्यजीवों की सुरक्षा और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए बारनावापारा वन्यजीव अभयारण्य 1 जुलाई से 31 अक्टूबर 2026 तक पर्यटकों के लिए बंद रहेगा। हर वर्ष मानसून के दौरान वन्यजीवों के प्रजनन काल को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया जाता है।
हालांकि, इस दौरान पर्यटकों को प्रकृति और संस्कृति से जोड़ने के लिए बलौदाबाजार वनमंडल ने "बारनावापारा–सिरपुर पर्यटन सर्किट : द सेक्रेड गारलैंड" की शुरुआत की है। इस पहल के माध्यम से राजधानी रायपुर के आसपास स्थित प्राकृतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को एक पर्यटन परिपथ के रूप में विकसित किया जा रहा है।
इस पर्यटन सर्किट में सिरपुर, धसकुंड जलप्रपात, तुरतुरिया ईको कल्चरल सेंटर, गिरौदपुरी धाम, सिद्धखोल जलप्रपात, सोनाखान, शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक, देवपुर नेचर कैंप, अचानकपुर का देव हिल्स ईको एथनिक स्टे, कोडार जलाशय सहित कई प्रमुख पर्यटन स्थल शामिल हैं। यहां पर्यटक हरियाली, झरनों, पहाड़ियों, वन क्षेत्र, धार्मिक स्थलों, पुरातात्विक धरोहरों और जनजातीय संस्कृति का अनूठा अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।
मानसून के मौसम में पूरा क्षेत्र हरियाली से भर जाता है, जिससे इसकी प्राकृतिक सुंदरता और भी बढ़ जाती है। देवपुर नेचर कैंप, देव हिल्स ईको एथनिक स्टे, सिद्धखोल जलप्रपात, तुरतुरिया धाम, धामनी ईको विलेज, धसकुंड फॉल और सिरपुर इस मौसम के प्रमुख आकर्षण होंगे।
इस पर्यटन सर्किट को देशभर में पहचान दिलाने के लिए टूर ऑपरेटरों, ट्रैवल एजेंसियों, ट्रैवल इन्फ्लुएंसर्स, कंटेंट क्रिएटर्स और नेचर फोटोग्राफर्स को भी जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य जिम्मेदार और सतत पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है।
वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने बताया कि वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार यह पहल प्रकृति, संस्कृति, विरासत और स्थानीय समुदायों को एक मंच पर लाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि अभयारण्य बंद रहने के दौरान भी पर्यटक बारनावापारा–सिरपुर बफर क्षेत्रों के प्राकृतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों का आनंद ले सकेंगे। साथ ही स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाकर सतत पर्यटन और रोजगार सृजन को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।
पद्म विभूषण स्व. तीजन बाई को 8 जुलाई को मुक्ताकाशी मंच से छत्तीसगढ़ के लोक कलाकार देंगे श्रद्धांजलि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं मंत्रीगण, सांसद व विधायकगण होंगे शामिल
पंडवानी की अप्रतिम साधिका, पद्मविभूषण एवं डी.लिट. से सम्मानित डॉ. श्रीमती तीजन बाई को 8 जुलाई को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। संस्कृति विभाग द्वारा स्व. तीजन बाई को संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पण का यह कार्यक्रम दोपहर 2 बजे महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, स्थित मुक्ताकाशी मंच से आयोजित होगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल सहित मंत्रीगण, सांसद, विधायक एवं जनप्रतिनिधियों के साथ छत्तीसगढ़ के पद्मश्री एवं राज्य अलंकरण से सम्मानित कलाकार, साहित्यकार, संस्कृति कर्मी तथा बड़ी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित रहेंगे।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित लोक कलाकार अपनी-अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उस महान विभूति को श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे, जिन्होंने पंडवानी जैसी लोकवाचिक परंपरा को गांव के चौपाल से उठाकर विश्व के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मंचों तक पहुंचाया। गीत, संगीत, पंडवानी, लोकगायन और अन्य लोककलाओं की प्रस्तुतियों के माध्यम से उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व का स्मरण किया जाएगा। यह आयोजन केवल एक श्रद्धांजलि समारोह नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना के उस स्वर्णिम अध्याय को नमन है, जिसे डॉ. श्रीमती तीजन बाई ने अपने संपूर्ण जीवन की साधना से रचा।
पद्मविभूषण श्रीमती तीजन बाई का निधन 5 जुलाई 2026 को हुआ। उनके निधन से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश और विश्व के कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उनके साथ भारतीय लोककला का एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय समाप्त हुआ, जिसने पंडवानी को नई प्रतिष्ठा, नई पहचान और वैश्विक सम्मान दिलाया।
24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मी पद्मविभूषण श्रीमती तीजन बाई का बचपन अत्यंत साधारण परिस्थितियों में बीता। महज 13 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना पहला सार्वजनिक मंच प्रदर्शन किया और उसी समय यह संकल्प लिया कि वे पंडवानी को ही अपने जीवन का लक्ष्य बनाएंगी। उस दौर में महिलाओं द्वारा पारंपरिक वेदमती शैली में बैठकर पंडवानी प्रस्तुत करने की परंपरा थी, लेकिन उन्होंने साहस के साथ कपालिक शैली में खड़े होकर पंडवानी प्रस्तुत की। अपनी दमदार आवाज, सशक्त अभिनय और प्रभावशाली भावाभिव्यक्तियों से उन्होंने पंडवानी को नई पहचान दिलाई और इसे जन-जन तक पहुंचाया।
प्रख्यात रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उनकी असाधारण प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद डॉ. तीजन बाई ने 17 से अधिक देशों में पंडवानी की प्रस्तुति देकर न केवल इस लोककला को वैश्विक पहचान दिलाई। वे विश्व मंच पर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान बन गईं।
पांच दशक से अधिक समय तक उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी अनूठी शैली में जीवंत किया। उनके मंचन में गायन, अभिनय, संवाद, भावाभिव्यक्ति और लोकभाषा का अद्भुत समन्वय था। उन्होंने सिद्ध किया कि लोककला किसी क्षेत्र विशेष की धरोहर नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता की सांस्कृतिक विरासत है।
उनकी अनुपम कला साधना के लिए उन्हें पद्मश्री (1988), संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995), पद्मभूषण (2003), जापान का प्रतिष्ठित फुकुओका पुरस्कार (2018), पद्मविभूषण (2019) तथा डी.लिट. (मानद उपाधि) सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले। इन सम्मानों ने उनके गौरवशाली सांस्कृतिक योगदान को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्रदान की।
संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह सांगीतिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम वास्तव में उनके अमूल्य योगदान का स्मरण है। लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उनकी कला साधना, संघर्ष और पंडवानी की गौरवशाली परंपरा को साकार करेंगे।
कोसा बीज केंद्र मोदकपाल से 5,700 तसर स्वस्थ डिम्ब समूहों का वितरण रेशम विभाग की योजना से हितग्राहियों को 79,800 रुपए की सब्सिडी, तसर पालन से बढ़ेगी आय
राज्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत बीजापुर जिले में रेशम विभाग द्वारा संचालित कोसा बीज केंद्र, मोदकपाल में तसर पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हितग्राहियों को 5,700 तसर स्वस्थ डिम्ब समूहों का वितरण किया गया।
इन डिम्ब समूहों की कुल लागत 91,200 रुपए रही। इसमें राज्य शासन ने 79,800 रुपए की सब्सिडी प्रदान की, जबकि हितग्राहियों से केवल 11,400 रुपए का अंशदान लिया गया। इससे कम लागत में गुणवत्तायुक्त तसर बीज उपलब्ध कराकर तसर पालन को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के लोगों की आय बढ़ाना तथा उन्हें स्वरोजगार से जोड़ना है। विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए गुणवत्तायुक्त स्वस्थ डिम्ब समूहों से बेहतर उत्पादन की संभावना है। इससे हितग्राही वैज्ञानिक तरीके से तसर पालन कर अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
रेशम विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, वितरित डिम्ब समूहों से लगभग 2 लाख कोसों का उत्पादन होने का अनुमान है। इससे न केवल हितग्राहियों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि जिले में तसर उत्पादन को भी नई गति मिलेगी।
रेशम विभाग ने बताया कि राज्य शासन की अनुदान आधारित योजनाओं के माध्यम से हितग्राहियों को कम लागत पर गुणवत्तायुक्त तसर बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और आवश्यक सहयोग भी लगातार दिया जाएगा, ताकि तसर पालन को बढ़ावा मिले और ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर सृजित हों।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्रनिष्ठा, त्याग और संकल्प का प्रेरक उदाहरण : वित्त मंत्री ओपी चौधरी।

जशपुर जंक्शन 08 जुलाई
देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रखर पुरोधा, प्रखर शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय में व्याख्यान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने भारत माता एवं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर दीप प्रज्वलित किया तथा उनके राष्ट्रनिर्माण में योगदान को नमन किया।
वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्रभक्ति, त्याग, शिक्षा, सिद्धांतों के प्रति अटूट निष्ठा और अदम्य साहस का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने व्यक्तिगत हितों से ऊपर राष्ट्रहित को सर्वोच्च स्थान दिया और भारतीय लोकतंत्र तथा राष्ट्रीय एकता को नई दिशा प्रदान की। उनका जीवन आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है। इस अवसर पर उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के राष्ट्र के प्रति योगदान का भी स्मरण किया।
*सकारात्मक सोच, स्पष्ट लक्ष्य और अनुशासन ही सफलता की कुंजी*
युवाओं को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि स्पष्ट लक्ष्य, अनुशासन, निरंतर परिश्रम और सकारात्मक सोच से प्राप्त होती है। व्यक्ति जैसा सोचता है, वैसा ही बनता है। उन्होंने कहा कि किसी भी निर्णय से पहले उसके परिणामों पर विचार करना चाहिए तथा अपने निर्णयों की जिम्मेदारी स्वयं स्वीकार करनी चाहिए। असफलताओं के लिए दूसरों को दोष देने के बजाय आत्ममंथन और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति अपनानी चाहिए। उन्होंने युवाओं से आधुनिकता के साथ अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं पर गर्व करने का भी आह्वान किया।
*युवा संवाद में विद्यार्थियों के सवालों का दिया जवाब*
कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री श्री चौधरी ने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए प्रशासनिक सेवा, प्रतियोगी परीक्षाओं, महिला सशक्तिकरण, व्यक्तित्व विकास एवं स्वास्थ्य से जुड़े प्रश्नों के उत्तर दिए। प्रशासनिक सेवा में करियर संबंधी प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवा केवल रोजगार नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा का प्रभावी माध्यम है। इसके लिए दृढ़ संकल्प, अनुशासित अध्ययन और निरंतर परिश्रम आवश्यक है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को संघ लोक सेवा आयोग की तैयारी के लिए विशेष योजना के तहत दिल्ली भेज रही है, जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा का बेहतर अवसर मिल सके।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर उन्होंने कहा कि सफलता के लिए लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए। समय का सदुपयोग, गुणवत्तापूर्ण अध्ययन, आत्मअनुशासन और निरंतर प्रयास ही सफलता की कुंजी हैं। उन्होंने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियां भी मजबूत संकल्प रखने वाले व्यक्ति की राह नहीं रोक सकतीं।
*बेटियों को आगे बढ़ने के लिए अवसरों का लाभ उठाना होगा*
महिला सशक्तिकरण पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में वित्त मंत्री ने कहा कि बेटियों की शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देने के लिए सरकार अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि बेटियां आत्मविश्वास के साथ उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाते हुए अपने सपनों को साकार करें।
*स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन सफलता की पहली शर्त*
स्वास्थ्य संबंधी प्रश्नों का उत्तर देते हुए श्री चौधरी ने युवाओं को नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और व्यायाम अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन ही किसी भी बड़ी सफलता की पहली शर्त हैं।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विनय चौहान, महापौर श्री जीवर्धन चौहान, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हेमलता चौहान, नगर निगम सभापति श्री डिग्री लाल साहू, कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशिमोहन सिंह, विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय सेवा योजना के उत्कृष्ट स्वयंसेवकों को सम्मानित किया गया तथा विश्वविद्यालय परिवार द्वारा अतिथियों का शाल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर अभिनंदन किया गया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर किया नमन।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में आयोजित प्रदेश स्तरीय समारोह में उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन राष्ट्रभक्ति, शिक्षा, त्याग और अखंड भारत के संकल्प का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आज डॉ. मुखर्जी के सपनों को साकार करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। धारा 370 का हटना, अंत्योदय की भावना पर आधारित विकास तथा राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने वाले अनेक निर्णय उनके विचारों को मूर्त रूप देने वाले ऐतिहासिक कदम हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए राज्य के सभी संभागीय एवं जिला मुख्यालयों में उनकी प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इसके लिए 10 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी केवल एक दूरदर्शी राजनेता ही नहीं, बल्कि विलक्षण शिक्षाविद भी थे। मात्र 33 वर्ष की आयु में विश्वविद्यालय के कुलपति बनने का गौरव प्राप्त करने वाले डॉ. मुखर्जी ने स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग मंत्री के रूप में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। राष्ट्रहित सर्वोपरि रखने की उनकी प्रतिबद्धता ऐसी थी कि उन्होंने सिद्धांतों से समझौता करने के बजाय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना स्वीकार किया।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में 'एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान' की व्यवस्था के विरुद्ध डॉ. मुखर्जी ने ऐतिहासिक संघर्ष किया और राष्ट्र की एकता एवं अखंडता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। आज पूरा देश उनके त्याग और राष्ट्रनिष्ठा को कृतज्ञतापूर्वक स्मरण करता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश के गौरवशाली इतिहास और भूले-बिसरे स्वतंत्रता सेनानियों को उचित सम्मान दिलाने का कार्य किया है। हर घर तिरंगा जैसे जनआंदोलन ने राष्ट्रभक्ति की भावना को नई ऊर्जा दी है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने भी नया रायपुर स्थित शहीद वीरनारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय में छत्तीसगढ़ के 14 वीर स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति में विशेष दीर्घा स्थापित की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के अंत्योदय के विचारों को आधार बनाकर कार्य कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में मोदी की गारंटी के अधिकांश संकल्प पूरे किए गए हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार जैसी मूलभूत सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं। 500 से अधिक गांवों तक आधारभूत सुविधाओं का विस्तार हुआ है, 700 से अधिक मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं तथा बस्तर अंचल में व्यापक स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार अभियान संचालित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रसेवा, शिक्षा, त्याग और समर्पण के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें तथा विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
इस अवसर पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल, कुलसचिव डॉ. शैलेन्द्र कुमार पटेल, प्रबुद्धजन, शिक्षक, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
