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जशपुर में प्लेन क्रैश की अफवाह, प्रशासन की सर्चिंग जारी, क्रैश की कोई पुष्टि नहीं

 

 

 

 

जशपुर जिले के नारायणपुर क्षेत्र के पहाड़ों में कथित प्लेन क्रैश की खबर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। सोमवार दोपहर करीब 2 बजे क्षेत्र के ग्रामीणों ने एक विमान को कम ऊंचाई पर उड़ते हुए पहाड़ों की ओर जाते देखा, जो कुछ देर बाद ओझल हो गया। इसके बाद पहाड़ों के बीच से धुएं का गुबार उठता दिखाई दिया, जिससे प्लेन क्रैश की आशंका जताई जाने लगी।

सूचना मिलते ही जिला कलेक्टर रोहित व्यास, एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह सहित वन विभाग और पुलिस की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और सघन सर्चिंग अभियान शुरू किया गया। हालांकि देर शाम तक पहाड़ों और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक खोजबीन के बावजूद किसी भी प्रकार के विमान हादसे या मलबे के प्रमाण नहीं मिले हैं।

बताया जा रहा है कि जिस पहाड़ी क्षेत्र में घटना की आशंका जताई जा रही थी, वह नारायणपुर के बरडांड गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर ऊंचाई पर स्थित अत्यंत दुर्गम इलाका है। इसके बावजूद प्रशासन की टीम लगातार जंगलों और पहाड़ी इलाकों में पहुंचकर सर्चिंग में जुटी हुई है। घटना की खबर फैलते ही आसपास के गांवों के ग्रामीण भी बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे और प्रशासन के साथ मिलकर खोजबीन में सहयोग करते रहे।

प्रशासन ने एहतियातन रेस्क्यू के लिए पुलिस और मेडिकल टीम को भी तैनात कर दिया है।

कलेक्टर रोहित व्यास ने बताया कि सूचना मिलते ही पूरी टीम को सर्चिंग में लगाया गया है। साथ ही उड़ीसा, झारखंड और छत्तीसगढ़ के एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क किया गया है, जहां अब तक किसी भी विमान के संपर्क टूटने की जानकारी सामने नहीं आई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एहतियातन पूरी रात सर्चिंग अभियान जारी रहेगा और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का जशपुर आगमन, हेलीपैड पर हुआ भव्य स्वागत।

 

 

 

 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज जिला मुख्यालय जशपुर पहुंचे, जहां पुलिस लाइन स्थित हेलीपैड पर आमजनों, जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने उनका आत्मीय स्वागत किया। उनके साथ उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं प्रबल प्रताप सिंह जूदेव भी पहुंचे।

मुख्यमंत्री के आगमन पर जनजातीय समुदाय के सदस्यों ने पारंपरिक आदिवासी नृत्य प्रस्तुत कर अतिथियों का स्वागत किया, जिससे पूरा वातावरण उत्साहपूर्ण हो उठा।

इस अवसर पर पत्थलगांव विधायक गोमती साय, जशपुर विधायक रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

इसके अलावा सरगुजा संभाग के कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लाल उमेंद सिंह सहित अधिकारियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया।

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इसरो की ‘स्पेस ऑन व्हील्स’ से जशपुर में विज्ञान की नई उड़ान।

 

 

 

जशपुर जिले में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति जिज्ञासा और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित “स्पेस ऑन व्हील्स” कार्यक्रम ने बच्चों में नई ऊर्जा भर दी है। रणजीता स्टेडियम, जशपुर में आज भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की इस विशेष मोबाइल प्रदर्शनी बस का आगमन हुआ, जिसका अवलोकन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया।

मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी में प्रदर्शित रॉकेट, उपग्रह और अंतरिक्ष मिशनों से जुड़े विभिन्न मॉडलों का अवलोकन करते हुए विद्यार्थियों से संवाद किया। इस दौरान शासकीय महारानी लक्ष्मी बाई उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं—अंशु पासवान, भूमिका डाहरे और सारिका साहनी—ने आत्मविश्वास के साथ चंद्रयान, मंगलयान, PSLV और GSLV सहित विभिन्न अंतरिक्ष तकनीकों की कार्यप्रणाली को सरल भाषा में समझाया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बच्चों की वैज्ञानिक समझ और आत्मविश्वास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम दूरस्थ क्षेत्रों में विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक आज विकास की आधारशिला हैं और “स्पेस ऑन व्हील्स” जैसे प्रयास ग्रामीण बच्चों में नवाचार और जिज्ञासा को बढ़ावा देते हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जिले में स्पेस ऑन व्हील्स के माध्यम से जागरूकता फैलाने वाले 17 विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए और “द मैजिक ऑफ नाइट स्काई” पुस्तिका का वितरण भी किया।

जिले के 10 हजार से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ

मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप “अन्वेषण” कार्यक्रम के तहत इस पहल का आयोजन किया जा रहा है। कलेक्टर रोहित व्यास की पहल और विज्ञान भारती के सहयोग से यह कार्यक्रम जिले के सभी विकासखंडों में संचालित होगा। 7 अप्रैल से प्रारंभ यह अभियान 14 दिनों तक विभिन्न विद्यालयों में चल रहा है और प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान की जानकारी दी जा रही है। इस अभियान से 10,000 से अधिक विद्यार्थी प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे।

क्या है ‘स्पेस ऑन व्हील्स’

“स्पेस ऑन व्हील्स” इसरो की एक अत्याधुनिक मोबाइल प्रदर्शनी है, जिसे विशेष रूप से एक बस के रूप में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष विज्ञान को सीधे छात्रों और आमजन तक पहुंचाना है, खासकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में। इसमें रॉकेट, उपग्रह, रिमोट सेंसिंग, कम्युनिकेशन और नेविगेशन तकनीकों के मॉडल, ऑडियो-विजुअल डिस्प्ले और इंटरएक्टिव पैनल के माध्यम से जानकारी दी जाती है।

वैज्ञानिक सोच और करियर के लिए प्रेरणा

यह पहल केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित भी कर रही है। विशेषज्ञों और शिक्षकों के मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को नई दिशा मिल रही है, जिससे वे भविष्य में वैज्ञानिक विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

जशपुर में “स्पेस ऑन व्हील्स” का आगमन न केवल एक प्रदर्शनी, बल्कि युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने वाला अभियान बन गया है, जो जिले को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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ड्रोन दीदी योजना से जशपुर की महिलाएं भरेंगी आर्थिक उन्नति की उड़ान।

 

 

 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने आज रणजीता स्टेडियम जशपुर में जिला प्रशासन द्वारा लगाए गए स्टॉल का अवलोकन किया। इस दौरान “लखपति दीदी” पहल के अंतर्गत महिलाओं को “ड्रोन दीदी” योजना के तहत ड्रोन एवं उन्नत सॉयल टेस्टिंग मशीन प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से महिलाएं आत्मनिर्भर बनें और अपनी आय में वृद्धि करें। उन्होंने ड्रोन के माध्यम से कृषि कार्यों को आसान बनाते हुए आर्थिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।

इस अवसर पर जशपुर विधायक रायमुनि भगत, पत्थलगांव विधायक गोमती साय, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, नगर पालिका अध्यक्ष अरविन्द भगत, उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जुदेव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक, सरगुजा कमिश्नर नरेन्द्र दुग्गा, पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार झा, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेंद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं के आय संवर्धन के साथ उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों से सशक्त बनाना है। सॉयल टेस्टिंग मशीन के माध्यम से अब मिट्टी के विभिन्न महत्वपूर्ण मानकों की त्वरित और सटीक जांच संभव हो रही है, जिससे संतुलित उर्वरक उपयोग, भूमि की गुणवत्ता में सुधार तथा फसल उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित की जा सकेगी।

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जहां गूंजता था लाल आतंक, वहां सजी बाल चौपाल: बस्तर में बदलाव की नई तस्वीर, बस्तर में बच्चों की मुस्कान बनी बदलाव की पहचान।

 

 

 

एक समय नक्सल प्रभावित रहे बस्तर अंचल की तस्वीर अब तेजी से बदल रही है। जहां कभी लाल आतंक का साया था, वहीं अब बच्चों की हंसी और उम्मीदों की गूंज सुनाई दे रही है। उत्तर बस्तर कांकेर जिले के दुर्गकोंडल क्षेत्र में आयोजित “बाल चौपाल” इस बदलाव का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के कार्यकाल का एक वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित इस कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत भी शामिल हुईं। कार्यक्रम के दौरान बच्चों और ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं और जरूरतों को समझा गया।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में भी विकास और सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी।

बाल चौपाल में बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा और आत्मरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। “गुड टच और बैड टच” जैसे संवेदनशील विषय को सरल तरीके से समझाया गया, जिसे बच्चों ने गंभीरता से समझते हुए अपनी जागरूकता का परिचय दिया।

कार्यक्रम की खासियत यह रही कि बच्चों को खेल-खेल में नैतिक शिक्षा दी गई। अनुशासन, ईमानदारी और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को रोचक गतिविधियों के माध्यम से समझाया गया। साथ ही चाइल्ड हेल्पलाइन की जानकारी भी दी गई, जिससे जरूरत पड़ने पर वे सहायता ले सकें।

इस दौरान डिजिटल सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी सामने आया। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जिला शिक्षा अधिकारी से समन्वय कर आगामी सत्र से डिजिटल शिक्षा की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि यह बाल चौपाल बदलते बस्तर की नई कहानी है, जो दिखाती है कि सामूहिक प्रयासों से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी सकारात्मक परिवर्तन संभव है।

कार्यक्रम के बाद मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, डॉ. वर्णिका शर्मा और शालिनी राजपूत ने पुनर्वास केंद्र पहुंचकर मुख्यधारा में लौटे नक्सलियों और उनके परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने उनके पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने के प्रयासों की जानकारी ली।

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शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा का मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया अनावरण।

 

 

 

 सरगुजा प्रवास के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अंबिकापुर के आकाशवाणी चौक पर अमर क्रांतिकारी शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा का विधिवत अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके अद्वितीय बलिदान को नमन किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद का जीवन साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति की अनुपम मिसाल है। उन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों का बलिदान देकर आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित किया। उनके आदर्श आज भी युवाओं को देश के प्रति समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश देते हैं।

कार्यक्रम में कृषि मंत्री रामविचार नेताम, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पाण्डेय, पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चन्देल, लुण्ड्रा विधायक प्रबोध मिंज, जिला पंचायत अध्यक्ष निरूपा सिंह, अंबिकापुर महापौर मंजूषा भगत, सभापति हरमिंदर सिंह टिन्नी, सरगुजा संभागायुक्त नरेंद्र दुग्गा, आईजी सरगुजा दीपक झा, कलेक्टर अजीत वसंत, एसपी राजेश अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

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गढ़फुलझर नानकसागर में होला मोहल्ला कार्यक्रम में शामिल हुएमुख्यमंत्री विष्णु देव साय बनेगा आस्था और पर्यटन का प्रमुख केंद्र।

BY जशपुर जंक्शन,15 मार्च 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज महासमुंद जिले के बसना क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक एवं पवित्र स्थल गढ़फुलझर के नानकसागर में आयोजित होला मोहल्ला कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने यहां पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष माथा टेका तथा विशेष कीर्तन समागम और अरदास में भाग लेकर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर सिख समाज की ओर से मुख्यमंत्री को सरोफा भेंट कर आत्मीय सम्मान किया गया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने उद्बोधन में कहा कि गढ़फुलझर की पावन धरती स्थित नानकसागर अत्यंत श्रद्धा और आस्था का केंद्र है, जहां पूज्य गुरु नानक देव जी के चरण पड़े हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ संतों की तपोभूमि रही है, जहां अनेक महान संतों ने मानवता, सेवा और सद्भाव का संदेश दिया है। इस पवित्र स्थल पर आकर उन्हें अत्यंत गर्व और आत्मिक आनंद की अनुभूति हो रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी प्रमुख तीर्थस्थलों के संरक्षण और समुचित विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में गढ़फुलझर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। इसके विकास कार्यों के लिए लगभग 2 करोड़ 50 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है और निर्माण कार्य जारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन कार्यों को शीघ्र पूर्ण किया जाए तथा नानकसागर क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जाए, जिससे यह स्थल प्रदेश और देश के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन सके।

बसना विधायक श्री संपत अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि सिख समाज सदैव संगठन, सेवा और सामाजिक समरसता की भावना के साथ आगे बढ़ने वाला समाज रहा है। 

उन्होंने कहा कि गढ़फुलझर न केवल सिख समाज की आस्था का केंद्र है, बल्कि यह सर्वधर्म समभाव और सद्भावना की जीवंत मिसाल भी है। 

कार्यक्रम में कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, बसना विधायक श्री संपत अग्रवाल, छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम के अध्यक्ष श्री चंद्रहास चंद्राकर, छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण के अध्यक्ष श्री भूपेंद्र सिंह सवन्नी, छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री अमरजीत छाबड़ा सहित सिख समाज के अनेक गणमान्यजन और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से जापान दूतावास के राजनीतिक मामलों के मंत्री आबे नोरिआकि ने की सौजन्य मुलाकात।

BY जशपुर जंक्शन,07 मार्च 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज छत्तीसगढ़ विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय कक्ष में जापान दूतावास के राजनीतिक मामलों के मंत्री श्री आबे नोरिआकि ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर दोनों के बीच छत्तीसगढ़ में औद्योगिक निवेश, आर्थिक सहयोग तथा विकास की संभावनाओं को लेकर सार्थक चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री श्री साय ने श्री आबे नोरिआकि का शॉल ओढ़ाकर तथा भगवान श्री राम की प्रतिमा भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर अपनी जापान यात्रा का जिक्र करते हुए श्री आबे को प्रदेश सरकार की नई औद्योगिक नीति, निवेश को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों तथा विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में उद्योगों के विकास के लिए बेहतर आधारभूत संरचना, प्रचुर प्राकृतिक संसाधन और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध है, जिससे निवेशकों को आकर्षक अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

इस अवसर पर विधायक किरण देव एवं विधायक सुशांत शुक्ला उपस्थित थे।

 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज छत्तीसगढ़ विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय कक्ष में जापान दूतावास के राजनीतिक मामलों के मंत्री श्री आबे नोरिआकि ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर दोनों के बीच छत्तीसगढ़ में औद्योगिक निवेश, आर्थिक सहयोग तथा विकास की संभावनाओं को लेकर सार्थक चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री श्री साय ने श्री आबे नोरिआकि का शॉल ओढ़ाकर तथा भगवान श्री राम की प्रतिमा भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर अपनी जापान यात्रा का जिक्र करते हुए श्री आबे को प्रदेश सरकार की नई औद्योगिक नीति, निवेश को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों तथा विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में उद्योगों के विकास के लिए बेहतर आधारभूत संरचना, प्रचुर प्राकृतिक संसाधन और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध है, जिससे निवेशकों को आकर्षक अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

इस अवसर पर विधायक किरण देव एवं विधायक सुशांत शुक्ला उपस्थित थे।

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बच्चा चोरी के अफवाह से पुलिस आई हरकत में,पुलिस की जांच में संदिग्ध निकला मानसिक रूप से अस्वस्थ।

 

 

जशपुर जिले के बगीचा क्षेत्र से एक अहम मामला सामने आया है, जहां दो छोटे बच्चों को साथ लेकर जा रहे एक व्यक्ति को ग्रामीणों ने सतर्कता दिखाते हुए पकड़ा और पुलिस के हवाले कर दिया। घटना के बाद क्षेत्र में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया, लेकिन पुलिस जांच में मामला स्पष्ट हो गया कि मामला बच्चा चोरी का नहीं है।

जानकारी के अनुसार बगीचा रोहित सोनी के दो बच्चे—एक 3 वर्षीय बच्ची और 7 वर्षीय बालक—घर के पास खेल रहे थे। इसी दौरान एक व्यक्ति बस्ती में पहुंचा और बच्चों को अपने साथ लेकर मुख्य मार्ग की ओर जाने लगा। परिजनों को जब बच्चे आसपास नहीं दिखे तो उन्होंने खोजबीन शुरू की।

करीब एक किलोमीटर दूर तहसील चौक के पास दोनों बच्चे उसी व्यक्ति के साथ दिखाई दिए। परिजनों और ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए बच्चों को सुरक्षित अपने कब्जे में लिया और संदिग्ध व्यक्ति को रोक लिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और व्यक्ति को थाने ले जाकर जांच शुरू की।

पुलिस की जांच में सामने आया कि संबंधित व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ (विक्षिप्त) है और पिछले लगभग दो वर्षों से बगीचा क्षेत्र के बाजार डांड में रह रहा है। वह इधर-उधर घूमकर भीख मांगकर अपना जीवन यापन करता है। स्थानीय लोगों के अनुसार उसे बच्चों से विशेष लगाव है और वह अक्सर बच्चों को देखकर उनसे हंसी-मजाक करने की कोशिश करता है। वह बोलने में असमर्थ है और इशारों के माध्यम से ही संवाद करता है।पिछले दो वर्षों में कभी भी संदिग्ध परिस्थितियों में उसे नहीं देखा गया है।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि प्रथम दृष्टया यह मामला चोरी का नहीं बल्कि मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति की हरकत का प्रतीत होता है। बच्चों को पूरी तरह सुरक्षित उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और क्षेत्र में लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत सूचना दें, लेकिन अफवाहों से बचें,अफवाहों में आकर कोई भी कानून हाथ में न लें।

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श्रीराम कथा में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, चिन्मयानंद बापूजी के श्रीमुख से गूंज रही रामकथा, भक्ति में डूबा कुनकुरी

 

 

 

कुनकुरी में आयोजित भव्य संगीतमय श्रीराम कथा महोत्सव में आज पंचम दिवस पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय श्रद्धाभाव से शामिल हुए। सालियाटोली मिनी स्टेडियम ग्राउंड में आयोजित इस दिव्य आयोजन में उनके साथ उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय भी उपस्थित रहीं। दोनों ने परम पूजनीय संत चिन्मयानंद बापू से आशीर्वाद ग्रहण किया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन और चरित्र को आत्मसात करने का संदेश देते हुए कहा कि रामकथा केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाली प्रेरणा है।

 छत्तीसगढ़ की धरती के कण-कण में बसे हैं प्रभु श्रीराम

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कुनकुरी की यह पावन भूमि आज धन्य हो गई है। पूरा वातावरण ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से गुंजायमान है और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की धरती है और भगवान श्रीराम का ननिहाल होने के कारण यहां के कण-कण में राम बसते हैं।

उन्होंने वनवास काल का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने अपना अधिकांश समय दंडकारण्य और छत्तीसगढ़ के अंचलों में बिताया। यहां आज भी सीता रसोई जैसे पौराणिक स्थल इस इतिहास के साक्षी हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अयोध्या में श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा देश के लिए गौरव का क्षण है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृढ़ संकल्प से संभव हो सका। राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई रामलला दर्शन योजना के तहत अब तक हजारों श्रद्धालु अयोध्या जाकर दर्शन कर चुके हैं।

 रामभक्ति का अद्भुत संगम उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। रामकथा की अमृतमयी धारा में जनमानस सराबोर होकर भक्ति रस का आनंद ले रहा है। विशेष रूप से रामनामी समाज की भक्ति परंपरा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका समर्पण अद्वितीय है।

इस अवसर पर रोहित व्यास, लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार सहित जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

 08 अप्रैल तक चलेगी रामकथा की पावन धारा

02 अप्रैल से प्रारंभ हुई श्रीराम कथा 08 अप्रैल तक निरंतर प्रवाहित होगी। इस आयोजन को लेकर कुनकुरी सहित पूरे क्षेत्र में धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल बना हुआ है। दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु कथा श्रवण कर प्रभु श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प ले रहे हैं।

 भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर यह आयोजन क्षेत्र में अद्भुत धार्मिक चेतना का संचार कर रहा है।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यकर्ताओं को दिया संगठन मजबूत करने का संदेश,भाजपा स्थापना दिवस पर बगिया में फहरा पार्टी का ध्वज

 

 

भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने निज निवास बगिया में पार्टी का ध्वज फहराया। इस दौरान उन्होंने उपस्थित कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भाजपा की विचारधारा, राष्ट्र सेवा और संगठन की मजबूती पर विशेष जोर दिया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भाजपा एक विचारधारा आधारित पार्टी है, जो देशहित और जनकल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे संगठन को और सशक्त बनाएं तथा आम जनता की सेवा में पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ जुटे रहें।

कार्यक्रम में सुनील गुप्ता, ठाकुर पुरुषोत्तम सिंह सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

पूरे आयोजन के दौरान उत्साह, अनुशासन और संगठन के प्रति समर्पण का माहौल देखने को मिला।

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खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के बाद सामुदायिक पावर हाउस के रूप में जाने जाएंगे सिद्दी पहलवान।

 

 

 'प्रतिभा को किसी परिचय की जरूरत नहीं होती'- यह कहावत 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स- 2026' में सच साबित हुई, जहां कर्नाटक के 'सिद्दी समुदाय' के पहलवानों ने मैट पर अपनी जबरदस्त छाप छोड़ी है। उनकी यह सफलता अब सिर्फ़ पदकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समुदाय के कुश्ती के क्षेत्र में एक ताकत के तौर पर उभरने का प्रतीक है। अफ़्रीकी मूल के भारत में लगभग 50,000 सिद्दी लोग रहते हैं, जिनमें से एक-तिहाई कर्नाटक में निवास करते हैं।

 खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में कर्नाटक के 9 पहलवानों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 4 सिद्दी समुदाय से थे। इन चार पहलवानों में से तीन ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया जबकि एक को रजत पदक मिला। स्वर्ण पदक जीतने वाले पहलवानों में मनीषा जुआवा सिद्दी (76 किग्रा), रोहन एम डोड़ामणि (ग्रीको रोमन 60 किग्रा) और प्रिंसिता पेदरू फर्नांडिस सिद्दी (68 किग्रा) शामिल हैं जबकि शालिना सेयर सिद्दी (57 किग्रा) को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

 इन पहलवानों की सफलता न सिर्फ उनके संघर्ष और मेहनत की कहानी कहती है, बल्कि कुश्ती जैसे खेलो में सिद्दी समुदाय के बढ़ते वर्चस्व को भी दिखाता है। कर्नाटक के इन चारों पहलवानों का दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में ट्रायल हुआ था और वहां भी ये पहले नंबर पर रहे थे। 

सिद्दी समुदाय के प्रदर्शन से कर्नाटक कुश्ती टीम की कोच ममता बेहद गौरवान्वित महसूस कर रही हैं।

ममता ने कहा, ''जैसे हमारे देश में कुश्ती में हरियाणा का दबदबा है तो ठीक वैसे ही हमारे राज्य में अहलियाल क्षेत्र का कुश्ती में वर्चस्व रहता है। राज्य में डिपार्टमेंट ऑफ यूथ एंड डेवलपमेंट एंड सेंटर मुख्य रूप से इन्हीं सिद्दी समुदाय के लिए है। इनके बच्चे यहीं पर ट्रेनिंग करते हैं। पिछले कुछ समय से इस समुदाय के लोगों के अंदर कुश्ती का क्रेज बढ़ा है और वे अब अपने बच्चों को कुश्ती में भेजने लगे हैं।

उत्तरी कर्नाटक के धारवाड़ जिले से आने वाले पुरुष पहलवान रोहन एम. डोड़ामणि भी इसी समुदाय से आते हैं। डोड़ामणि की मां सरकारी स्कूल में खाना पकाती हैं जबकि पिता का छह साल पहले ही देहांत हो चुका है।

 रोहन ने कहा, “सिद्दी समुदाय के अंदर समय-समय पर छोटे दंगल होते रहते हैं और जो इनमें जीतता है, उन्हें ज्यादा से ज्यादा पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया जाता है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में स्वर्ण जीतने से पहले मैं सीनियर नेशनल चैंपियनशिप, नेशनल गेम्स और ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में भी भाग ले चुका हूं।''

देश में खिलाड़ियों के अंदर छिपी प्रतिभा की पहचान करने और उन्हें एक बेहतर मंच देने के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और खेल मंत्रालय ने मिलकर 2018 में खेलो इंडिया यूथ गेम्स की शुरुआत की थी। उसके बाद खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स और अब खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत हुई है। 

साई के टैलेंट डेवलपमेंट कमेटी के सदस्य महा सिंह राव कहते हैं, '' साई और खेल मंत्रालय की तरफ से हम कम उम्र के प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान करते हैं ताकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का जो सपना है कि 2036 ओलंपिक खेल भारत में हो, उस सपने को साकार करने के लिए ये सरकार की रणनीति का एक हिस्सा है। प्रधानमंत्री के अलावा खेल मंत्री, साई और हम इस सपने को साकार करने में लगे हुए हैं कि आगे आने वाले ओलंपिक खेलों में हम ज्यादा से ज्यादा मेडल जीते।''

उत्तर कन्नड़ कारवार जिले से आने वाली शालिना सेयर सिद्दी ने इस प्रतियोगिता में रजत पदक जीतने के बाद कहा, ''हमारे समुदाय में कुश्ती को लेकर अब लोग दिलचस्पी लेने लगे हैं। मैंने अपने अंकल के कहने पर कुश्ती शुरू की थी और शुरू से ही वह मुझे ट्रेनिंग देते आ रहे हैं। मैंने इस प्रतियोगिता के लिए मेहनत तो पूरी की थी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और मैं स्वर्ण जीतने से चूक गई।'' 

कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ कारवार जिले से ही आने वाली प्रिंसिता सिद्दी ने कहा, ''शुरुआत में मुझे कुश्ती में दिलचस्पी नहीं थी और मैं बहुत रोई थी। लेकिन फिर धीरे-धीरे जब हमारे समुदाय के बच्चे इसमें भाग लेने लगे तो उन्हें देखकर मैं भी प्रैक्टिस करने लगी। यहां तक पहुंचने के लिए मैं शाम-सुबह दो-दो घंटे प्रैक्टिस करती हूं। मुझे इंटरनेशनल लेवल पर मेडल लाना है और इसके लिए मैं कड़ी मेहनत कर रही हूं।''

इन पहलवानों की सफलता इस बात को सिद्ध करती है कि जब सही मंच, ट्रेनिंग और सपोर्ट मिलता है, तो दूरदराज के समुदायों से भी प्रतिभाएं शिखर तक पहुंच सकती हैं और भारत के खेल भविष्य को आकार दे सकती हैं।

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रात में मछुआरे का काम करने वाले अब्दुल फताह की छलांग ने लक्षद्वीप एथलेटिक्स के लिए एक नया अध्याय लिखा।

 

 

 अब्दुल फताह ज़्यादातर रातों को समुद्र में होते हैं, जहां वे मछुआरे बनकर अपने परिवार की रोज़ी-रोटी कमाने में मदद करते हैं। जैसे ही सुबह होती है, वे सीधे ट्रेनिंग ग्राउंड की ओर निकल पड़ते हैं और एक एक अलग सपने का पीछा करते हुए लक्षद्वीप को 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' 2026 में पहला मेडल दिलाया।

                   कवरत्ती और कदमत द्वीपों के बीच स्थित, दूरदराज के अमीनी द्वीप जो लगभग 2.7 किमी लंबा और 1.2 किमी चौड़ा है, और जिसका कुल भू-क्षेत्रफल 2.60 वर्ग किमी है के 18 वर्षीय लॉन्ग जम्पर ने जगदलपुर के क्रीड़ा परिसर मैदान में 7.03 मीटर की अपनी करियर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता। यह इस छोटे से केंद्र शासित प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था। केंद्र शासित प्रदेश के खेल अधिकारी अहमद जावेद हसन ने मुस्कुराते हुए कहा, वह लक्षद्वीप के पहले ऐसे एथलीट हैं जिन्होंने 7 मीटर की दूरी पार की है और यह वाकई एक खास बात है।'' 

               मछुआरे परिवार में जन्मे फताह भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं और घर की बड़ी ज़िम्मेदारी संभालते हैं। 12वीं कक्षा पूरी करने के बाद, आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही रोकनी पड़ी। इसके बजाय, उन्होंने अपने पिता के पारिवारिक व्यवसाय में हाथ बँटाने और खेल को अपने जुनून के तौर पर अपनाने का फ़ैसला किया।फताह ने कहा, '' कोई और चारा नहीं है, आपको चीज़ों में संतुलन बनाना ही पड़ता है। जब मैं स्कूल में था, तभी से मैं अपने पिता की मछली पकड़ने के काम में मदद करता आ रहा हूँ। यही हमारी आमदनी का एकमात्र ज़रिया है। हमारे परिवार में छह लोग हैं। सुबह मैं अपनी ट्रेनिंग के लिए जाता हूँ; मेरे परिवार को इस बारे में पता है, भले ही वे इस खेल के बारे में बहुत कम समझते हों।'' 

             दिलचस्प बात यह है कि एथलेटिक्स उनका पहला प्यार नहीं था। फताह शुरू में फुटबॉल खेलते थे, जैसा कि द्वीप के कई दूसरे युवा करते थे। हालांकि, कुछ साल पहले एक स्थानीय इंटर-आइलैंड प्रतियोगिता के दौरान उनकी यात्रा में एक अहम मोड़ आया। कोच मोहम्मद कासिम ने इस युवा की दौड़ने की ज़बरदस्त काबिलियत को पहचाना और उन्हें एथलेटिक्स में आने का सुझाव दिया। तब से, फताह ने लॉन्ग जंप और 100-मीटर स्प्रिंट में ट्रेनिंग शुरू कर दी। लगभग उसी समय, अमिनी एथलेटिक्स एसोसिएशन का गठन होने लगा, जिससे इस क्षेत्र में खेलों के विकास को एक सही ढाँचा मिला।

           फताह और कई अन्य युवा एथलीटों को धीरे-धीरे कोचिंग की मदद दी गई, जिससे उन्हें ज़्यादा व्यवस्थित तरीके से ट्रेनिंग करने में मदद मिली। सिर्फ़ दो सालों में, एसोसिएशन ने लगभग 384 एथलीटों को तैयार किया। इस समूह में से, 17 एथलीटों को गेम्स में लक्षद्वीप का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया। जगदलपुर में फत्ताह की 7.03 मीटर की गोल्ड-विनिंग जंप, वहां के हालात को देखते हुए, खास तौर पर संतोषजनक थी। ट्रेनिंग के दौरान, उन्होंने बताया था कि उनकी जंप आमतौर पर 6.5 से 6.7 मीटर के आस-पास रहती है। उन्होंने कहा. '' खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में आने से पहले, मैंने अपने लिए 7.15 मीटर तक पहुंचने का लक्ष्य तय किया था। मुझे खुशी है कि मैं सात मीटर का आँकड़ा पार कर पाया, और यह गोल्ड मेडल मुझे और बेहतर करने के लिए प्रेरित करेगा,” 

         लक्षद्वीप धीरे-धीरे भारत के एथलेटिक्स के नक्शे पर अपनी जगह बना रहा है। इस केंद्र शासित प्रदेश की सबसे जानी-मानी एथलीटों में से एक हैं मुबस्सिना मोहम्मद, जो 19 साल की लॉन्ग जंपर और हेप्टाथलीट हैं। कुवैत में हुए 2022 एशियन U18 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में लॉन्ग जंप में सिल्वर मेडल जीतकर वह लक्षद्वीप की पहली इंटरनेशनल मेडलिस्ट बनीं। उन्होंने महिलाओं की लॉन्ग जंप में 6.30 मीटर के अपने पर्सनल बेस्ट के साथ जूनियर नेशनल टाइटल भी जीता।

         मुबस्सिना की तरह, फताह भी बिना किसी आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा के ट्रेनिंग करते हैं। लक्षद्वीप, जो सिर्फ़ 32 वर्ग किलोमीटर में फैला है और जिसकी आबादी 70,000 से भी कम है, वहां अभी तक कोई ठीक-ठाक सिंथेटिक ट्रैक या एथलेटिक्स स्टेडियम नहीं है। नतीजतन, कई एथलीट मिट्टी के ट्रैक पर प्रैक्टिस करते हैं, जबकि फत्ताह अक्सर अपने स्प्रिंट इवेंट्स की ट्रेनिंग के लिए पास के एक फुटबॉल मैदान का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने आगे कहा, '' खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स और दूसरे नेशनल लेवल के मुकाबलों में हमारी सफलता को देखते हुए, हमें उम्मीद है कि हमारे लिए हालात बदलेंगे। हो सकता है कि हमें कुछ नौकरियाँ और ट्रेनिंग की सुविधाएँ मिल जाएं.''

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गढ़पहाड़ की गुफा में मिली हजारों साल पुरानी सभ्यता की झलक, जयमरगा बना प्रागैतिहासिक धरोहर का केंद्र

 

 

प्राकृतिक सुंदरता के लिए पहचाने जाने वाले जशपुर जिले में अब प्रागैतिहासिक सभ्यता के महत्वपूर्ण प्रमाण भी सामने आए हैं। जिले के मनोरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम जयमरगा स्थित गढ़पहाड़ की गुफा में आदिमकालीन शैलचित्र मिलने से यह क्षेत्र पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है। यह खोज इस बात के स्पष्ट संकेत देती है कि हजारों वर्ष पूर्व यहां आदिमानवों का निवास रहा होगा और उन्होंने अपने जीवन, शिकार और परिवेश को इन चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त किया।

जंगल और पहाड़ों के बीच छिपा है इतिहास

जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित जयमरगा ग्राम, ग्राम पंचायत डड़गांव का आश्रित गांव है, जिसकी आबादी लगभग 1400 है। गांव तक पहुंचने के लिए सड़क सुविधा उपलब्ध है, लेकिन गुफा तक पहुंचने के लिए गढ़पहाड़ पर करीब 300 मीटर की कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है। घने जंगलों और प्राकृतिक वातावरण से घिरा यह क्षेत्र अपने भीतर हजारों साल पुराना इतिहास समेटे हुए है।

स्थानीय ग्रामीणों के लिए यह गुफा आस्था का केंद्र भी है, जहां वे पूजा-अर्चना करते हैं। अब यह स्थल धार्मिक के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व भी प्राप्त कर चुका है।

शैलचित्रों में दर्ज है आदिमानव का जीवन

पुरातत्त्ववेत्ता डॉ. अंशुमाला तिर्की और बालेश्वर कुमार बेसरा के अनुसार, जयमरगा क्षेत्र प्रागैतिहासिक स्थलों से समृद्ध है। यहां के पहाड़, जंगल और समीप बहने वाले जल स्रोत आदिमानवों के लिए आदर्श निवास स्थल रहे होंगे।

गुफा में बने शैलचित्रों में—

मानव आकृतियों के समूह

शिकार करते हुए दृश्य

पशु आकृतियां जैसे बैल, तेंदुआ और हिरण

विभिन्न ज्यामितीय आकृतियां और रहस्यमयी चिन्ह

इन चित्रों में लाल और सफेद रंग का उपयोग किया गया है, जो संभवतः हेमाटाइट पत्थर से तैयार किए गए थे। इन चित्रों की शैली से यह भी संकेत मिलता है कि ये अलग-अलग कालखंडों में बनाए गए हैं।

मध्य पाषाण काल के उपकरणों की भी पुष्टि

इस स्थल से मध्य पाषाण काल (Mesolithic Period) के माइक्रोलिथिक उपकरण भी प्राप्त हुए हैं, जिनमें लुनैट, स्क्रैपर, पॉइंट, ट्रैपेज, साइड स्क्रैपर और ब्लेड शामिल हैं। ये उपकरण शिकार, काटने और अन्य दैनिक कार्यों में उपयोग किए जाते थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह गुफा केवल निवास स्थल नहीं बल्कि एक रणनीतिक स्थान भी रही होगी, जहां से आदिमानव ऊंचाई पर बैठकर शिकार के लिए जानवरों की गतिविधियों पर नजर रखते थे।

संरक्षण और शोध की जरूरत

इतिहास और पुरातत्व के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण इस स्थल पर अभी तक व्यापक स्तर पर संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है। यदि समय रहते इस गुफा और शैलचित्रों को संरक्षित नहीं किया गया, तो यह अमूल्य धरोहर क्षति का शिकार हो सकती है।

पर्यटन के रूप में उभर सकता है नया केंद्र

गढ़पहाड़ की यह गुफा जशपुर जिले के पर्यटन मानचित्र पर एक नया आकर्षण बन सकती है। प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक महत्व और रोमांचक ट्रैकिंग का संगम इस स्थान को विशेष बनाता है। यदि यहां बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएं और प्रचार-प्रसार किया जाए, तो यह क्षेत्र पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है।

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रामनाम की पावन रसधारा में डूबा कुनकुरी,श्रद्धेय चिन्मयानंद बापू के मुखारविंद से श्रीराम कथा महोत्सव का भव्य शुभारंभ।

 

 

 

 

कुनकुरी नगर गुरुवार को पूरी तरह भक्ति और आस्था के रंग में रंगा नजर आया, जब सात दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के आरंभ होते ही पूरा नगर ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंज उठा और वातावरण राममय हो गया।

इस पावन अवसर पर परम पूज्य श्रद्धेय संत चिन्मयानंद बापू जी के श्रीमुख से श्रीराम कथा का वाचन प्रारंभ हुआ, जिसे सुनने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा स्थल सलियाटोली मिनी स्टेडियम में विशाल पंडाल सजाया गया है, जहां श्रद्धालु भक्ति रस में डूबकर कथा का श्रवण कर रहे हैं।

संत चिन्मयानंद बापू जी के आगमन पर उनका भव्य स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, आयोजन समिति के सदस्य एवं नगर के गणमान्य नागरिकों ने पुष्पगुच्छ एवं मालाओं से उनका अभिनंदन किया। जय स्तंभ चौक पर गाजे-बाजे और पारंपरिक वाद्य-यंत्रों के साथ भव्य स्वागत हुआ, वहीं महिलाओं ने आरती उतारकर वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया।

प्रतिदिन तीन घंटे होगा कथा का आयोजन

आयोजन समिति के अनुसार, यह श्रीराम कथा महोत्सव 2 अप्रैल से 8 अप्रैल 2026 तक आयोजित किया जाएगा। प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक कथा का आयोजन होगा, जिसमें भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, धर्म, मर्यादा, त्याग और कर्तव्य के प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया जाएगा।

भक्ति, ज्ञान और संस्कारों का संगम

यह कथा महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम भी बन रहा है। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान और संस्कारों की अनमोल सीख प्राप्त हो रही है।

श्रद्धालुओं से अपील

आयोजन समिति ने सभी धर्मप्रेमी नागरिकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर श्रीराम कथा का श्रवण करें और इस पावन अवसर का लाभ उठाएं।

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अखिल विश्व गायत्री परिवार की उपजोन स्तरीय गोष्ठी सम्पन्न, संकल्पों के क्रियान्वयन पर जोर।

 

 

 

गायत्री शक्तिपीठ बतौली में रविवार को अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में अम्बिकापुर उपजोन की उपजोन स्तरीय गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शांतिकुंज हरिद्वार से पधारे छत्तीसगढ़ जोन समन्वयक सुकदेव निर्मलकर की गरिमामयी उपस्थिति रही। गोष्ठी में अम्बिकापुर, बलरामपुर एवं जशपुर जिले के परिजन शामिल हुए।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां गायत्री की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। प्रारंभ में प्रांतीय युवा प्रकोष्ठ के सह संयोजक दौलतराम चौहान ने गोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए संगठन की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने शताब्दी कार्यक्रम बैरागी द्वीप में लिए गए संकल्पों की समीक्षा एवं उनके क्रियान्वयन हेतु कार्ययोजना बनाने पर विशेष जोर दिया।

इस दौरान बालिका सोनिया द्वारा युग निर्माण सत्संकल्प का मौखिक पाठ कराया गया। उपजोन संयोजक एस.जे. द्विवेदी ने सभी परिजनों को संबोधित करते हुए मिलजुलकर संकल्पों को पूर्ण करने का आह्वान किया।

छत्तीसगढ़ जोन समन्वयक सुकदेव निर्मलकर ने आदरणीय शैल जीजी एवं श्रद्धेय डॉ. साहब का संदेश सुनाते हुए सभी जिलों में ब्लॉक स्तर पर समन्वय समितियों के पुनर्गठन तथा साधना किट एवं सत्संकल्प पाठ को ग्राम, विद्यालय एवं महाविद्यालयों तक पहुंचाने पर बल दिया।

गोष्ठी में नारी जागरण की प्रगति अम्बिकापुर जिले से श्रीमती शांति दीदी एवं जशपुर जिले से श्रीमती पार्वती चौहान द्वारा प्रस्तुत की गई। वहीं जिला प्रगति प्रतिवेदन बलरामपुर से अम्बुज यादव, जशपुर से कांशीराम श्रीवास एवं अम्बिकापुर से नंदकिशोर गोस्वामी ने प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का सफल संचालन नंदकिशोर गोस्वामी ने किया। अंत में शांति पाठ के साथ गोष्ठी का समापन हुआ।

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