प्रदेश
महासमुंद : महज़ एक माह के प्रशिक्षण में युवतियाँ ख़ुद की सिली हुई पोशाक पहन कॉलेज आयी
लाइवलीहुड कॉलेज ने युवाओं की जिंदगी में अब बदलाव की बयार लायी है। 8-10वीं पास युवाओं से लेकर स्नातक और स्नातकोत्तर युवाओं को इस कॉलेज में उनकी रुचि के अनुरूप विभिन्न ट्रेड में प्रशिक्षण दिया जाता है। अभी तक किसी प्रकार का हुनर, प्रशिक्षण के अभाव में रोजगार नहीं मिल पाता था। लेकिन अब मुश्किल आसान हो गई है। अब युवाओं के पास रोजगार है और स्वयं उद्यमी भी बन रहे हैं।
राज्य सरकार युवाओं को उनकी अभिरुचि और स्थानीय बाज़ार मांग के अनुसार प्रशिक्षण दिलाकर स्वरोज़गार स्थापित करने का काम कर रही है। शासन की मंशा के अनुरूप यह कॉलेज कौशल उन्नयन का बखूबी कार्य कर रही है। यह युवाओं के एक नयी सुबह का संकेत है।
जिला परियोजना लाइवलीहुड कॉलेज पॉलिटेक्निक भवन बरोंडा बाजार महासमुंद मे शासन के मंशा अनुरूप सिलाई कोर्स 30 युवाओं जिसमें बेरोजगारी भत्ता एवं नॉन बेरोजगारी भत्ता के युवा कौशल प्रशिक्षण का लाभ ले रहे है। महज एक माह की ट्रेनिंग मे ही काफ़ी कुछ सीख गए।
जिसका उदाहरण बीते मंगलवार को प्रिया सिन्हा, होमिका सिन्हा, देवश्री साहू व अनीता निर्मलकर अपने ही सिले हुए कपड़ो को खुद पहन कर प्रशिक्षण में आये। जिसे देखकर अन्य प्रशिक्षणार्थियों ने भूरी-भूरी प्रशंसा की। उनके हुनर की तारीफ़ की। जिससे की बाकि लोगों को भी प्रेरणा मिल सके। इसके अलावा उन्हें आज के मॉडल और आधुनिक दौर में उपयोग होने वाले कपड़ो की डिज़ाइन के साथ सिलाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ताकि महिला सशक्त हुनरमंद होकर स्वयं का रोज़गार स्थापित कर आय मे बढ़ोतरी कर सके। बेरोजगारी भत्ता पात्र युवाओं से लाइवलीहुड कॉलेज ने अपील की है कि अपनी रुचि अनुसार प्रशिक्षण लेकर स्वयं का रोज़गार करें। नियमित रूप से निःशुल्क प्रशिक्षण लेकर हुनरमंद बने।
हुनरमंद युवा अब प्रशिक्षण प्राप्त कर आत्मनिर्भरता की राह में आगे बढ़ रहे हैं। प्रशिक्षण के अभाव में जहां पहले काम के लिए भटकना पड़ता था। वहीं अब प्रशिक्षित होकर मनचाहा रोजगार प्राप्त करने में कामयाब हो रहे हैं।
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सूरजपुर : आवास योजना से पक्का आवास का सपना हुआ साकार
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण अंतर्गत वित्तिय वर्ष 2019-20 में ग्राम पंचायत बसदेई जनपद पंचायत सूरजपुर के हितग्राही श्री आनन्दी का आवास स्वीकृति प्रदाय की गयी। जिसके पश्चात हितग्राही द्वारा पक्के आवास निर्माण हेतु निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया और अपने जीवन के सबसे अनमोल सपनो में से एक पक्के आवास का सपना पूरा हुआ।
हितग्राही आनंदी ने बताया कि पक्का आवास से पहले बरसात के मौसम में कच्चे घर से पानी टपकता था, और विषैले कीड़े ,साँप आदि से हमेशा छोटे बच्चे और सभी को डर बना रहता था। लेकिन अब ऐसा नहीं हैं, अब मैं अपने पूरे परिवार के साथ शासन द्वारा दिये गए पक्के आवास में निवास करता हूँ। आंनदी ने बताया कि वह कचे घर के मरम्मत में होने वाले खर्च को बचा कर और खेती के पैसो से अपने आवास से लगा एक छोटा का किराने का दुकान का निर्माण करा लिया है। जिससे अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा है। आनन्दी सहित पूरे परिवार ने आवास के लिए शासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं में प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब परिवार के लिए अनमोल उपहार है।
सूरजपुर : स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय बसदेई में मनाया गया प्रवेश उत्सव
बसदेई स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में शाला प्रवेश उत्सव बड़े ही धूमधाम व हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया। जिसमें अतिथियों के द्वारा लगभग 260 बच्चों को तिलक लगाकर व मीठा खिलाकर प्रवेश कराया गया, साथ ही साथ पुस्तक वितरण भी किया गया। स्कूल आ पढ़े बर जिंनगी ला गढे बर को सार्थक बनाने हेतु बच्चों का स्वागत व अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर बच्चों में अच्छा उत्साह दिखा। इस मौके पर शाला विकास समिति के अध्यक्ष विजेंद्र गोयल, सरपंच प्रतिनिधि बलवीर सिंह, सचिव शिवनारायण यादव, सदस्य लक्ष्मण राजवाड़े, विद्यालय प्राचार्य विनोद कुमार सोनी, विजेंद्र कुमार उपाध्याय, राम सिंह राठौर, सानिया मेहराज, फाल्गुनी चौबे, कुहेली सरकार, अमन पटेल, चांदनी विश्वास, शिशिर कुमार, रामकुमार सिंह, भाग्यश्री जायसवाल, चेतना राज, भाग्यश्री कुशवाहा, सृष्टि उपाध्याय, खुशबू सिंह, साक्षी केसरी व वीरेंद्र सिंह उइके, सद्दाम हुसैन के साथ विद्यालय के छात्र एवं छात्राएं उपस्थित रहे।
रायपुर : मुख्यमंत्री दाई-दीदी क्लीनिक : 1.70 लाख महिलाओं का हुआ निःशुल्क इलाज
मुख्यमंत्री दाई-दीदी मोबाइल क्लीनिकों के माध्यम से अब तक करीब 2280 कैम्प लगाएं जा चुके हैं। दाई-दीदी क्लीनिक के माध्यम से रायपुर, बिलासपुर एवं भिलाई नगर निगम क्षेत्र की झुग्गी बहुल बस्तियों में रहने वाली एक लाख 70 हजार 335 महिलाओं एवं बालिकाओं का उनके घर के पास ही दाई-दीदी क्लीनिक कैंप के माध्यम से इलाज किया गया है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा मुख्यमंत्री दाई-दीदी क्लिनिक योजना संचालित की जा रही है। योजना के तहत मोबाइल मेडिकल यूनिट के वाहन में महिला चिकित्सकों और महिला स्टॉफ की टीम पहुंचती है तथा जरूरतमंद महिलाओं एवं बालिकाओं की विभिन्न बीमारियों का निःशुल्क जांच एवं इलाज करती है।
इन मोबाइल मेडिकल यूनिट के द्वारा 34 हजार 420 महिलाओं का लैब टेस्ट किया गया तथा एक लाख 61 हजार 254 महिलाओं को निःशुल्क दवाईयां दी गई। पहले गरीब स्लम क्षेत्र में रहने वाली तथा मेहनत मजदूरी करने वाली ऐसी महिलाएं जो समयाभाव या अन्य कई कारणों से अपना इलाज नहीं करा पा रही थी परन्तु अब दाई-दीदी क्लीनिक से उन्हें इलाज की सुविधा घर के पास ही महिला चिकित्सकों और चिकित्सा स्टाफ के माध्यम से मिल रही है और वे अपना इलाज बिना संकोच के महिला स्टॉफ के माध्यम से करा पा रही है।
ड्रिप सिंचाई प्रणाली लगाने से बनस गंगबेर के आए अच्छे दिन
बीजापुर जिले के ग्राम कुएंनार के निवासी श्री बनस गंगबेर पिछले कई साल से अपने खेतों में सब्जियों की खेती कर रहे है।। लेकिन पुराने तरीकों से खेती करने के कारण उन्हें ज्यादा लाभ नहीं हो पाता था। सब्जियों की खेती में जितना रुपया वे खर्च करते थे, लगभग उतनी ही आमदनी हो पाती थी। लेकिन अब गंगबेर के दिन बदल गये हैं और उसके अच्छे दिन आ गये है। यह सब ड्रिप सिंचाई प्रणाली के दम पर हुआ है।
जिले के उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने श्री गंगबेर को सलाह दी थी कि वे अपने खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली लगा लें। इससे उन्हें बहुत लाभ होगा। बहुत दिनों के इंतजार के बाद उन्होंने उद्यान विभाग द्वारा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत अपने खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली लगाई ।
किसान बनस गंगबेर ने बताया कि पूर्व में लिफ्ट सिंचाई के माध्यम से 2 हेक्टेयर में साग-सब्जी की खेती करता था। पानी की ज्यादा खपत होती थी, मेहनत भी अधिक लगती थी। वर्तमान में किसान 4 एकड़ में टमाटर, लाल भाजी, बरबट्टी सहित साग-सब्जी का उत्पादन ड्रीप पद्धति के माध्यम से कर रहे है। किसान ने बताया कि पहले की तुलना में अब कम मेहनत में अधिक उत्पादन होने से आमदनी में वृद्धि हो रही है।
पौधों को मिलता है संतुलित आहार
ड्रिप सिंचाई प्रणाली से सिंचाई करने का फायदा श्री गंगबेर को अब समझ आने लगा है। इस नई सिंचाई प्रणाली से उनके खेत में इस बार साग-सब्जी का बंपर उत्पादन हुआ है। ड्रिप सिंचाई प्रणाली से पौधों की सिंचाई होने पर पौधों को संतुलित मात्रा में पानी मिल रहा है। पहले सिंचाई के लिए अधिक पानी लगता था और जमीन के अधिक गीली होने से पौधों के साथ ही उसमें लगे टमाटर को भी नुकसान होता था। लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। अब पौधों के पानी से खराब होने का खतरा नहीं रहता है। इस प्रणाली से उर्वरक व दवा आदि डालने के लिए अधिक मेहनत नहीं करना पड़ता है। सीधे पानी के पाईप में उर्वरक का घोल मिला देने से प्रत्येक पौधे की जड़ तक वह पहुंच जाता है। वे स्वयं गांव तथा पास के अन्य स्थानों पर लगने वाले साप्ताहिक हाट बाजार में साग-सब्जी बेच देते है। बाजार में मिल रहे अच्छे दाम से पारिवारिक-आर्थिक दायित्वों का निर्वहन भी बड़ी सरलता से कर पा रहे हैं। बच्चों की शिक्षा, उनकी आवश्यकताओं को पूरा कर खेती-बाड़ी के माध्यम से किसान सक्षम हो रहे हैं। किसान बनस गंगबेर ने बताया पहले 20 क्विंटल का उत्पादन होता था वहीं आज 90 क्विंटल का उत्पादन हो रहा है।जिससे सालाना 1 से 1.5 लाख रूपए की आमदनी हो रही है।
जनचौपाल तिथि में किया गया संशोधन ऐसेबेड़ा और कोड़ेकुर्से में जनचौपाल अब 19 जुलाई को
आम जनता की समस्याओं के निराकरण के लिए जिला प्रषासन द्वारा क्लस्टरवार जन चौपाल का आयोजन किया जा रहा है। कोयलीबेड़ा विकासखण्ड के ग्राम ऐसेबेड़ा में 07 जुलाई और दुर्गूकोंदल विकासखण्ड के ग्राम कोड़ेकुर्से में 13 जुलाई को आयोजित होने वाला जनचौपाल में आंषिक संषोधन किया गया है। अब 19 जुलाई को ग्राम पंचायत ऐसेबेड़ा में प्रातः 10 बजे से दोपहर 02 बजे तक एवं ग्राम पंचायत कोड़ेकुर्से में दोपहर 01 से सायं 05 बजे तक जनचौपाल षिविर का आयोजन किया जायेगा। जनचौपाल षिविर में जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहेंगे, क्षेत्र के नागरिक अपनी समस्या व शिकायत संबंधी आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार : हरेली हरेली त्यौहार कब मनाया जाता है?
हमारा भारत देश प्रकृति का उपासक है प्रकृति की रक्षा करना हमारा धर्म ही नहीं बल्कि परम कर्तव्य भी है प्रकृति के बिना जीवन संभव नहीं है पर्यावरण संरक्षण से न केवल मानव जीवन सुधार अपितु पर्यावरण वन संसाधन संवर्धन से वन्य जीवों की भी रक्षा होती है।
प्रकृति के साथ साथ किसान अपनी फसल की रक्षा की कामना करते हुए पूजा करते हैं ताकि मौसमी बीमारी एवं कीट पतंगों से फसल की रक्षा हो और अधिक पैदावार मिल सके।
हरेली त्यौहार कब मनाया जाता है?
श्रावण कृष्ण पक्ष अमावस्या को हरेली त्यौहार Hareli Festival मनाया जाता है अर्थात हरेली तिहार जुलाई के महीने में आती है।
हरेली तिहार मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ प्रदेश में मनाया जाने वाला त्यौहार है छत्तीसगढ़ राज्य एक कृषि प्रधान प्रदेश है यहां की अधिकांश आबादी कृषक वर्ग से आते हैं। हरेली पर्व किसानों से ज्यादा तालुक रखता है क्योंकि किसान अपने खेत में फसल हरा भरा हो जाता है तब हरेली त्यौहार मनाते हैं।
हरेली अमावस्या अर्थात श्रावण कृष्ण पक्ष अमावस्या को किसान अपनी खेत एवं फसल की धूप दीप अक्षत से पूजा करते हैं ताकि फसल में किसी भी प्रकार की बीमारी से ग्रसित न हो। पूजा में विशेष रूप से भिलवा वृक्ष की पत्ते टहनियां तथा दशमूल ( एक प्रकार की कांटेदार पौधे ) को खड़ी फसल में लगाकर पूजा करते हैं माना जाता है कि इससे कई प्रकार की हानिकारक कीट पतंगों एवं फसल में होने वाले बिमारियों से रक्षा होती है।
हरेली अमावस्या को कोई भी किसान अपने खेतों में कार्य नहीं करते हैं इस दिन खेती कार्य करना वर्जित है। हरेली त्यौहार को गेड़ी चढ़ने का त्योहार भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन लोग बांस की लकड़ी से गेड़ी बनाकर गेड़ी चढ़ते हैं , गेड़ी चढ़ने का आनंद ही अलग है लोग इस दिन गेड़ी चढ़कर आनंद उत्सव मनाते हैं।
हरेली त्यौहार के दिन गांव के पुजारी बैगा घर घर जाकर दशमूल पौधा एवं भिलवा पत्ते आदि को घर मुख्य दरवाजे पर बांधते हैं एवज में पुजारी बैगा को अन्न भेंट किया जाता है।
इस वर्ष हरेली त्यौहार 2023 में 17 जुलाई दिन सोमवार को है क्योंकि इस दिन श्रावण अमावस्या पड़ रही है।
