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ऐश्वर्या राय बच्चन 'पेरिस फैशन वीक' में छाई रहीं. एक्ट्रेस ने रैंप वॉक के दौरान जमकर अपना जादू बिखेरा
1 अक्टूबर को एफिल टॉवर के पास 'पेरिस फैशन शो' का आयोजन हुआ. वहीं हर साल की तरह इस बार भी ऐश्वर्या राय बच्चन 'पेरिस फैशन वीक' में छाई रहीं. एक्ट्रेस ने रैंप वॉक के दौरान जमकर अपना जादू बिखेरा. सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें खूब वायरल हो रही हैं. वहीं इस साल ऐश्वर्या के अलावा बच्चन परिवार से अमिताभ बच्चन की नातिन नव्या नवेली नंदा भी इस इवेंट का हिस्सा रहीं.
श्वेता बच्चन पर भड़के ऐश्वर्या राय बच्चन के फैंस
वहीं नव्या को सपोर्ट करने के लिए उनकी मां श्नेता बच्चन और नानी जया बच्चन वहां मौजूद दिखीं. दोनों शो में आगे बैठकर नव्या को चीयर करते हुए नजर आएं. श्वता ने इस इवेंट की कई सारी तस्वीरें अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी शेयर किया है.
रायपुर : विश्व पर्यटन दिवस पर विशेष लेख : पर्यटन के असीम संभावनाओं का गढ़ कोरिया अंचल
जब हम अपने देश से किसी दूसरे देश में पर्यटन के लिए जाते हैं या कोई अन्य देश से हमारे देश में पर्यटन के लिए आता है तो देशों के बीच परस्पर मैत्री संबंधों का विस्तार होता है और दोनों देशों की सांस्कृतिक, राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक विकास की गति सुनिश्चित होती है। विश्व पर्यटन संगठन संयुक्त राष्ट्र संघ की ही एक अंगीकृत संस्था है, जिसकी स्थापना साल 1976 में हुई थी। इस संस्था का मुख्यालय मेड्रिड स्पेन में है लेकिन इसको बनाने का संविधान 27 सितंबर 1970 को ही पारित हुआ था जिस कारण इस दिन हर साल विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है।
इसी कड़ी में हम छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग खासकर कोरिया जिले के आसपास के पर्यटन स्थलों का जिक्र करने जा रहे हैं। अविभाजित मध्यप्रदेश राज्य में 25 मई 1998 को कोरिया को जिला का दर्जा मिला था। जिला कोरिया का नाम यहां के पूर्व रियासत कोरिया से लिया गया है। जिला बनने से पहले यह क्षेत्र सरगुजा जिले के अंतर्गत था।
प्रकृति की गोद में बसे और हरियाली की चादर से ढंके कोरिया जिला विभिन्न विविधताओं से भरे हैं।
वर्षा ऋतु में जब प्रकृति अपने सौन्दर्य की चरम-सीमा पर होती है तो कोरिया जिले की कुछ महत्वपूर्ण नदियों पर बनने वाली जलप्रपात को भी सुन्दरता प्रदान करती है। यह जलप्रपात स्वतः ही अपनी सुन्दरता बिखेरती है।कोरिया जिले के आसपास कई ऐसे जलप्रपात हैं, जो विहंगम दृश्यों को परिचित कराती है और उस जगह से नजर हटाने का मन भी नहीं करती। हसदेव नदी के उद्गम स्थल भी कोरिया जिले को माना जाता है। कोरिया जिले के आसपास घासीदास राष्ट्रीय उद्यान, हसदेव नदी पर गौरघाट, च्युल जलप्रपात, अकुरी नाला जलप्रपात, अमृतधारा जलप्रपात, गेज परियोजना, झुमका बोट, कोरिया पैलेस आदि हैं, तो रामगढ़ स्थित जोगीमारा एवं सीताबंेगरा गुफा में मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम ने माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ प्रवास किया था।
माना जाता है कि रामगढ़ स्थित गुफाओं में श्रीराम की महर्षि विश्रवा से भंेट हुई। इस स्थान पर एक प्राचीन नाट्यशाला स्थित है। माना जाता है कि यहां की पहाड़ियों पर कालिदास ने मेघदूतम महाकाव्य की रचना की है। यहां स्थित गुफा में प्राचीन शैलचित्र में अंकित है। वैसे तो सम्पूर्ण सरगुजा संभाग अपनी प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण है। सरगुजा जिले के महेश्पुर, उदयपुर से केदमा मार्ग पर जाना पड्ता है। यहां दसवीं शताब्दी की प्राचीन शिव मंदिर, छेरिका देउर के विष्णु मंदिर, आठवीं शताब्दी तीर्थकर वृषभ नाथ प्रतिमा जैसे अनेक स्थल हैं। सरगुजा जिले में ही देवगढ प्राचीन काल की ऋषि यमदग्नि की साधना स्थल रही है। इसके अलावा अनेक मठ, पुरातात्विक कलात्मक मूर्तियां एवं प्राकृतिक सौंदर्य है। रामगढ पर्वत टोपी आकार में है। इसी जिले में ही प्राकृतिक वन सुषमा के बीच कैलाश गुफा स्थित है। इसे संत रामेश्वर गहिरा गुरूजी ने पहाड़ी चटटानो को ताराश कर निर्मित करवाया है। मैनपाट को छत्तीसगढ का शिमला कहा जाता है। मैंनपाट विन्ध पर्वतमाला पर स्थित है। यहां सरभंजा जल प्रपात, टाइगर प्वाइंट, मछली प्वांइट प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं।
रिहन्द एवं मांड नदी का उदगम स्थल भी मैनपाट से हुआ है। इसे छत्तीसगढ़ का तिब्बत भी कहा जाता हैं। यहां तिब्बती लोगों का जीवन एवं बौध मंदिर आकर्षण का केन्द्र है। जशपुर, सूरजपुर, बलरामपुर, मनेन्द्रगढ़- चिरमिरी-भरतपुर जिले भी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है। सरगुजा संभाग में ही तातापानी जो प्राकृतिक रूप से निकलते गरम पानी के लिए प्रसिद्ध है। डीपाडीह 8वीं से 14वीं शताब्दी के शैव एवं शाक्य संप्रदाय के पुरातात्विक अवशेष बिखरे हुए हैं। यहां अनेक शिवलिंग, नदी तथा देवी दुर्गा की कलात्मक मूर्ति स्थित है।
शासन-प्रशासन की मदद से पर्यटकों के लिए कई पर्यटन क्षेत्रांे को चिन्हांकित कर उसे पर्यटनीय क्षेत्र के रूप में विकसित भी किया जा रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा पर्यटक यहां आकर इस जलप्रपात, हरियाली और घने वनों को निहार सके।
व्यक्ति के जीवन और देश व राज्य के विकास में पर्यटन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में लोगों को पर्यटन के प्रति जागरूक करने के साथ उन्हें पर्यटन के लाभ और महत्व के बारे में बताया जाना जरूरी है। पर्यटन का प्रभाव सांस्कृतिक स्तर पर भी विशेष रुप से पड़ता है, क्योंकि सांस्कृतिक स्थलों पर पर्यटन को बढ़ावा देना सभ्यता और संस्कृति के विकास का जरिया है।
मौजूदा छत्तीसगढ़ के भूपेश सरकार ने राम वन गमन पर्यटन परिपथ शुरू किया है तो छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, परम्परा, आस्था, खेलकूद व खान-पान को बढ़ावा देने के लिए भी अनेक योजनाएं शुरू की है ताकि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक खूबसूरती और यहां की जीवनशैली को और बेहतर तरीके से समझा और जाना जा सके। जरूर कोरिया अंचल की सैर कीजिये और प्रकृति के बीच रहने का आनन्द लीजिए।
मांग में सिंदूर, हाथों में भरी चूड़ियां, शादी के बाद मिस्टर और मिसेज चड्ढा की पहली तस्वीर आई सामने
बॉलीवुड एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा और राघव चड्ढा ने सात जन्मों के लिए एक दूसरे का हाथ थाम लिया है. उदयपुर के लीला पैलेस में हुई शादी की पहली तस्वीरों का इंतजार हर कोई दिल थाम कर रहा था.
आपको बता दें कि रविवार को शादी उदयपुर के लीला पैलेस में हुई. 22 सितंबर को शादी की रस्में महेंदी सेरेमनी के साथ शुरु हुईं. 23 सितंबर को हल्दी और सूफी नाइट में जमकर धमाल हुआ.

सोशल मीडिया के जरिए इस कपल को शादी की बधाई दी
शादी की पहली तस्वीर का अभी इंतजार है लेकिन जो मेहमान इसे अटेंड करने पहुंचे उन्होंने अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की हैं. परिणीति चोपड़ा की दोस्त सानिया मिर्जा इस समारोह में अपनी बहन के साथ पहुंचीं उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपनी तस्वीर शेयर की है। खबरें हैं कि ये कपल 25 सितंबर को दिल्ली वापस लौटेंगे। जानकारी के लिए बता दें कि परिणीति चोपड़ा और राघव चड्ढा की सगाई 13 मई को दिल्ली के कपुरथला हाउस में हुई थी। इस इंगेजमेंट में दोनों के करीबी लोग मौजूद थे। परी की बहन प्रियंका चोपड़ा भी इंगेजमेंट में शामिल हुई थीं लेकिन शादी अटेंड करने वो नहीं पहुंचीं. प्रियंका चोपड़ा ने सोशल मीडिया के जरिए इस कपल को शादी की बधाई दी है।
आज शादी के बंधन में बंध जाएंगे परिणीति-राघव, शाही अंदाज में लेंगे सात फेरे
Parineeti-Raghav Wedding: आज उदयपुर से शुरू होंगें शादी का कार्यक्रम ,बहन की शादी में शामिल नहीं होंगी प्रियंका चोपड़ा?
रायपुर : चक्रधर समारोह में छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक
संस्कृति विभाग द्वारा लौह नगरी रायगढ़ में प्रतिवर्ष की तरह आयोजित इस वर्ष की चक्रधर समारोह में छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक देखने को मिल रही है। चक्रधर समारोह में स्थानीय स्कूली छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक छटा बिखेरा। विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ के स्थानीय संस्कृति को नृत्य के माध्यम से मनमोहक प्रस्तुति दी। समारोह में राउत नाचा से लेकर सुआ, ददरिया, कर्मा जैसे विभिन्न स्थानीय सांस्कृतिक नृत्यों के साथ देश के विभिन्न राज्यों के ओड़िशी, गुजराती बिहू जैसे सांस्कृतिक नृत्यों की झलक भी देखने को मिली। स्कूली बच्चों के मनमोहक प्रस्तुति का शहरवासियों ने आनंद उठाया और बच्चों का उत्साहवर्धन किया। उल्लेखनीय है कलेक्टर तारन प्रकाश सिन्हा की पहल पर इस वर्ष चक्रधर समारोह में स्थानीय कलाकारों के साथ ही स्कूली एवं नवोदित कलाकारों को बड़ी संख्या में अवसर दिया गया हैं।
समारोह में एमएसपी पब्लिक स्कूल के बच्चों ने देशभक्ति गीत भारत मां की जय बोलव रे, छत्तीसगढ़ की जय बोलव, तिरंगा झंडा लहराए जावथे, जन-गण-मंगल के धुन गावथे पर छत्तीसगढ़ी नृत्य के साथ मनमोहक प्रस्तुति दी। इसी प्रकार न्यू होराइजन स्कूल के बच्चों ने झुलना मा झूले... छत्तीसगढ़ी लोक गीत पर कर्मा नृत्य की जबरदस्त प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की इस कड़ी में जिंदल आदर्श ग्राम्य भारती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के स्कूली बच्चों ने ओडिशा की संबलपुरी नृत्य से दर्शकों का दिल जीता।
बच्चों ने संबलपुर की समलाई माता की आराधना करते हुए लोक परंपरा को प्रदर्शित किया। इसी के साथ ही सेन्ट जेवियर स्कूल के बच्चों ने राजस्थानी लोक नृत्य की प्रस्तुति दी, राजस्थान में ढोला मारू की प्रेम गाथा को लोक-गीत के माध्यम से गाते हुए एवं नृत्य किया जाता है, जिस पर बच्चों ने गोपाल शर्मा के निर्देशन में राजस्थानी घूमर, ढोला मारू की प्रेम गाथा एवं कालबेलिया में रंगीली नागन नृत्य से दर्शकों को बांधे रखा। वहीं गुजरात की लोक प्रिय गरबा नृत्य, जिसे नवरात्रि के अवसर पर देश के साथ छत्तीसगढ़ में देखने को मिलता है, जिसकी खूबसूरत झलक आज गार्जेयन एंड गाइड के बच्चों ने मंच में दिखाई। देश की पूर्वाेत्तर राज्य असम में प्रचलित बिहू नृत्य ने दर्शकों को बांधे रखे। जिसकी मनमोहक प्रस्तुति सेंट टेरेसा स्कूल के बच्चों ने दी। ओपी जिंदल स्कूल तराईमाल के बच्चों ने झांसी की रानी खूब लड़ी मर्दानी पर प्रस्तुति दी।
मोदक बनाने की विधि को अनुसरण करें और तैयार करें यह मिष्ठान्न व्यंजन।
गणेश चतुर्थी के त्यौहार के उल्लास के साथ नारियल, गुड़, इलायची की भरावन के साथ कुरकुरे आटे के खोल में भरे हुये फ्राइड मोदक. इनकी शैल्फ लाइफ अधिक है, यानी हम इन्हें पहले से भी बना सकते हैं.
आवश्यक सामग्री - Ingredients for Fried Modak
- गेहूं का आटा - 1 कप (150 ग्राम)
- मैदा - ¼ कप (25 ग्राम)
- घी - 2 टेबल स्पून
- नमक - 1 पिंच
स्टफिंग के लिए
- गुड़ - ¾ कप (150 ग्राम)
- नारियल - 1 कप (कद्दूकस किया हुआ)
- बादाम - 8-10
- काजू - 8-10
- इलायची - 6-7
- घी - मोदक तलने के लिए
मोदक बनाने के लिए आटे को बर्तन में निकालिये इसमें मैदा, नमक और घी डालकर सारी चीजों को अच्छी तरह मिला लीजिये, अब इसमें थोड़ा-थोडा़ पानी डालते हुए नरम आटा गूंथ कर तैयार कर लीजिए. आटे को 20 मिनिट के लिये ढककर रख दीजिये, आटा सैट होकर तैयार हो जाएगा.
काजू और बादाम को छोटा-छोटा काट कर तैयार कर लीजिए और इलायची को छीलकर पाउडर बना लीजिए.
पैन गैस पर रख कर गरम कीजिए और 1 छोटा चम्मच घी डालकर इसमें कद्दूकस किया हुआ नारियल डाल दीजिए, धीमी और मीडियम आंच पर लगातार चलाते हुए 2 मिनिट भून लीजिए. अब इसमें गुड़ डाल कर मिक्स कीजिए और गैस बंद कर दीजिए.
नारियल और गुड़ को मिलने तक मिक्स कीजिए फिर इसमें काट कर रखे काजू-बादाम और इलायची पाउडर डाल कर अच्छे से मिक्स कीजिए. स्टफिंग बनकर के तैयार है इसे प्लेट में निकाल लीजिए और ठंडा होने दीजिए.
गूंथे हुए आटे को मसल लीजिए और फिर आटे से छोटी-छोटी लोईयां तोड़ कर तैयार कर लीजिए. अब एक लोई उठाइये मसलते हुए गोल कीजिए और ढाई से 3 इंच के व्यास में बेल कर तैयार कर लीजिए. पूरी को हाथ में रखें और उसमें 1 चम्मच स्टफिंग रख दीजिए और लोई को चारों ओर से प्लेट बनाते हुए मोदक का आकार देते हुए बंद कर दीजिए. इसी तरह सारे मोदक बनाकर तैयार कर लीजिए.
कडा़ही में घी डालकर गरम कीजिए. घी के मीडियम गरम होने पर मोदक डाल दीजिए, जितने मोदक एक बार में कडा़ही में आ जाएं डाल दीजिए. मोदक को पलट-पलट कर चारों ओर से गोल्डन ब्राउन होने तक तल लीजिए. मोदक तलकर तैयार हो जाने पर, इन्हें टिशु पेपर बिछी प्लेट में निकाल लीजिए और सारे मोदक इसी तरह से तल कर तैयार कर लीजिए.
गणेश चतुर्थी पर ऐसे करें बप्पा की मूर्ति की स्थापना
हर साल गणेश उत्सव भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होता है जिसका समापन अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा की विदाई के साथ होता है. 10 दिनों तक चलने वाला यह उत्सव इस साल 19 सितंबर दिन मंगलवार से शुरू होने जा रहा है. इस दौरान भक्त सुबह शाम बप्पा की पूजा अर्चना करते हैं और उनके मनपसंद भोजन का भोग लगाते हैं. मान्यता है कि भगवान गणेश की विधि-विधान के साथ पूजा करने से सारे कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है, साथ ही कारोबार में उन्नति होती है. आपको बता दें कि ज्यादातर लोग गणेश चतुर्थी को बप्पा की मूर्ति घर लाते हैं जिसकी 10 दिन तक विधिपूर्वक पूजा अर्चना करते हैं. ऐसे में चलिए जानते हैं गणेश चतुर्थी को मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजन सामग्री.
गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, 18 सितंबर 2023 के दिन चतुर्थी तिथि दोपहर 2 बजकर 09 मिनट से शुरू होगी जो अगले दिन यानि 19 सितंबर दिन मंगलवार को 03 बजकर 13 मिनट तक रहेगी.
मूर्ति स्थापना शुभ मुहूर्त
वहीं, पंचांग के अनुसार 19 सितंबर को मूर्ति स्थापना का समय 11 बजकर 08 मिनट से दोपहर 01 बजकर 33 मिनट तक रहेगा.
गणेश पूजन सामग्री लिस्ट
मूर्ति स्थापना के लिए आपको लाल या पीला वस्त्र चाहिए, चौकी बप्पा की प्रतिमा रखने के लिए, बप्पा के लिए वस्त्र
घी का दीया, शमी का पत्ता, गंगाजल, पंतामृत, सुपारी, जनेऊ, मोदक, चंदन, अक्षत, धूप, फल, फूल और दूर्वा चाहिए.
मां बनने वाली है रुबीना दिलैक, बेबी बंप वाली फोटो शेयर कर कहा- आने वाला है नन्हा मेहमान
नाश्ते में बनाकर खाएं उरद दाल का वड़ा, ये है बनाने की आसान रेसिपी
वड़ा बनाने के लिए जरूरी चीजें
- उरद दाल छिलके वाली करीब 5-6 घंटे पानी में भीगी हुई
- हरी मिर्च
- धनिया की पत्ती
- हींग
- नमक
- रिफाइंड या सरसों का तेल डीप फ्राई करने के लिए
बनाने की विधि- सबसे पहले उरद की करीब 5-6 से घंटे छिलके वाली भीगी दाल को पानी से अच्छे से धो लें। इसे तब तक पानी से साफ करें जब तक इसके छिलके ना निकल जाएं। इसके बाद दाल को मिक्सी के जार में डालकर पीस लें। अब दाल को बर्तन में निकालकर उसे अच्छे से फेंटें। करीब 10 मिनट तक दाल को फेटने के बाद इसमें महीन कटी हुई हरी मिर्च, हरा धनिया, चुटकी भर हींग और स्वादानुसार नमक डाल दें। इसके बाद इसे अच्छे से चलाएं।
अब कढ़ाई को गैस पर चढ़ाएं। इसके बाद इसमें रिफाइंड या फिर सरसों का तेल जिसमें भी आपको डीप फ्राई करना हो वो डाल दें। तेल के गर्म होते ही इस पेस्ट को चम्मच या फिर हाथ में थोड़ा सा लें और कढ़ाई में डालकर डीप फ्राई करें। सभी वड़ा को इसी तरह से बनाएं और डीप फ्राई करें। जब वड़े हल्के सुनहरे रंग के हो जाएं तो आप उन्हें प्लेट में निकालकर सर्व करें।
बेबी बंप फ्लॉन्ट कर सुनाई खुशखबरी रुबीना दिलैक
फाइनली रुबिना दिलैक (Rubina Dilaik) ने इतने रुमर्स के बाद फैंस के साथ इंस्टग्राम पर फोटोज शेयर करते हुए ये बता ही दिया की वो मां बनने वाली हैं. रुबीना दिलैक ने किया प्रेग्नेंसी का ऐलान, बेबी बंप फ्लॉन्ट कर सुनाई खुशखबरी
सितंबर में आने वाले व्रत और त्योहार (Festivals In September 2023)
सितंबर माह की शुरुआत ऋषि पंचमी से हो रही है. यह भाद्रपद के शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है. इसके बाद 7 सितंबर यानी भाद्रपद के कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी. 17 सितंबर को विश्वकर्मा जयंती और 19 सिंतबर को गणेश चतुर्थी है जब घर घर गणपति विराजेंगे. इस माह के अंत में 28 सितंबर को अनंत चुर्तुदशी का व्रत होगा.
अक्टूबर में आने वाले व्रत और त्योहार (Festivals In October 2023)
अक्टूबर माह में बच्चों की लंबी उम्र की कामना के लिए रखा जाने वाला जीवित्पुत्रिका व्रत 6 अक्टूबर को रखा जाएगा. इसके बाद 15 अक्टूबर से नौ दिन चलने वाली नवरात्रि शुरू होगी. नवरात्रि के बाद 24 अक्टूबर को बुराई पर भलाई की जीत का त्योहार दशहरा मनाया जाएगा.
नवंबर में आने वाले व्रत और त्योहार (Festivals in November 2023)
नवंबर की पहली तारीख को करवा चौथ का व्रत रखा जाएगा. 10 नवंबर को कुबेर की पूजा का त्योहार धनतेरस और 12 नवंबर को देवी लक्ष्मी की पूजा का त्योहार दीपावली मनाई जाएगी. 14 नवंबर को भाईदूज होगी. 19 नवंबर को छड पूजा और 23 नवंबर को एकादशी और 24 नवंबर को तुलसी विवाह का त्योहार मनाया जाएगा.
गुझिया के बिना त्योहार अधूरा माना जाता है- कुछ घरों में तो गुझिया बनाने की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं.
कुछ घरों में तो गुझिया बनाने की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं. गुझिया के बिना त्योहार अधूरा माना जाता है. गुझिया मैदे, मावे, चीनी और कई तरह के ड्राई फ्रूट्स से बनने वाली स्पेशल स्वीट डिश है. बच्चों और बड़ों की फेवरेट गुझिया बनाने में आसान है. बनाने के बाद इसे फ्रिज के कई दिनों तक रख कर खा सकते हैं. जानिए कैसे बनाते हैं गुझिया…
सामग्री: गुझिया में भरने के लिये
मावा/खोया- 500 ग्राम,
शक्कर- 500 ग्राम (पिसी हुई),
सूजी- 100 ग्राम,
किशमिश- 50 ग्राम (डंठल रहित)
सूखा नारियल- 100 ग्राम
छोटी इलाइची- 08 (छील कर कूटी हुई)
काजू- 100 ग्राम (महीन कतरे हुए)
घी- 03 बड़े चम्मच
गुझिया का आटा तैयार करने के लिये
मैदा- 500 ग्राम,
दूध- 50 ग्राम,
घी- 125 ग्राम (आटा में डालने के लिये),
घी- गुझिया तलने के लिये
गुझिया बनाने की रेसिपी:
गुझिया बनाने के लिए सबसे पहले गुझियों का भरावन तैयार करने के लिए एक भारी तले की कढ़ाई लें. उसमें मावा (खोया) को हल्का भूरा होने तक भूनकर एक अलग बर्तन में निकाल लें.
– कढ़ाई में घी डालें और सूजी को भी हल्का ब्राउन होने तक भूनकर एक अलग बर्तन में निकाल लें. मावा (खोया), सूजी, शक्कर और मेवों को अच्छी तरह से मिला लें. भरावन तैयार है.
गुझिया बनाने का आटा लगाएं:
– गुझिया बनाने का आटा तैयार करने के लिए सबसे पहले घी को पिघलाकर छने हुए मैदा में डाल कर मिला लें. इसके बाद दूध को भी आटे में मिलाएं. पानी डालकर कड़ा आटा गूथ लें. गुथे हुए आटे को एक बर्तन में रखकर गीले कपड़े से ढंक कर रख दें. आधे घंटे के बाद आटे को खोलें और उसे एक बार पुन: हल्के हाथों से गूथ लें.
– आटे की छोटी-छोटी लोई बना लें. एक-एक लोई लें और उसे पूरी की तरह बेल लें. अब एक-एक पूरी को उठाएं और उसके बीच में दो बड़े चम्मच भरावन सामग्री रख कर पूरी को बीच से पलट दें. किनारे के सिरों को मोड़ कर बंद कर दें. गुझियों के सांचे का भी प्रयोग कर सकते हैं.
– सारी गुझिया भरने के बाद एक मोटे तले की कढ़ाई में घी गरम करें. घी गरम होने पर आंच को मीडियम कर दें और उसमें जितनी गुझिया आराम से तल सकें, उतनी डालें और हल्की भूरी होने तक उलट-पलट कर तल लें. गुझिया तैयार हैं.
हरियाली तीज पर बनाना चाहती हैं कुछ खास
गुजिया
हरियाली तीज के पारंपरिक पकवानों में घेवर भी शामिल है, लेेकिन इसे घर में बनाना थोड़ा मुश्किल होता है, तो आज घेवर की जगह गुजिया इस मौके पर बना सकती हैं। खोए की गुजिया को सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है और इसे बनाने में बहुत ज्यादा चीज़ों की जरूरत भी नहीं होती।
मावा लड्डू
खोये से बने लड्डू से भी आप तीज में माता पार्वती और भगवान शिव को भोग लगा सकती हैं। इस लड्डू को बनाने में बस खोए और खूब सारे ड्राई फ्रूट्स की जरूरत होती है। मिनटों में बनकर तैयार हो जाता है ये लड्डू।
खीर
सबसे आसानी से बनने वाली भोग की रेसिपी है खीर। सिर्फ दूध, चावल और चीनी की जरूरत होती है इसे बनाने में। दो-तीन तरह का भोग लगाना चाहती हैं, तो खीर को अपने मेन्यू में शामिल कर सकती हैं।
बासुंदी
बासुंदी भी एक लजीज़ और आसानी से बन जाने वाली रेसिपी है। दूध, केसर, जायफल, इलायची पाउडर, चिरौंजी और चीनी की मदद से तैयार कर सकते हैं ये डिश। इसे रिच बनाने के लिए ऊपर से ड्राई फ्रूट्स डालना न भूलें। इसे ठंडा और गर्म दोनों ही तरीकों से खाया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ की फिल्म नीति ने बॉलीवुड को खींचा अपनी ओर
छत्तीसगढ़ में एक और बॉलीवुड फिल्म की शूटिंग पूरी हो गई है। रायपुर, नवा रायपुर और राजिम में पिछले 19 दिनों से इस फिल्म की शूटिंग चल रही थी। 'शादी में ज़रूर आना' फेम रत्ना सिन्हा ट्राइजेंट मीडियावर्क्स एलएलपी
(Trizent Mediaworks LLP) के बैनर तले इस हिन्दी फिल्म को प्रोड्यूस कर रही हैं। अकुल त्रिपाठी इसे निर्देशित कर रहे हैं।
फिल्म के कलाकार आदिल खान और अशनूर कौर तथा निदेशक अकुल त्रिपाठी आज मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के सलाहकार श्री गौरव द्विवेदी के साथ मीडिया से रू-ब-रू हुए। श्री द्विवेदी ने प्रेस-वार्ता में बताया कि इस फिल्म में रायपुर के महादेव घाट, तेलीबांधा तालाब, वीआईपी रोड, राजिम और नवा रायपुर के लोकेशन्स को दिखाया गया है। यहां फिल्माए गए दृश्य हमारे राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करेंगी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार की फिल्म पॉलिसी से आकर्षित होकर बड़े निर्माता-निर्देशक बॉलीवुड से फिल्मों की शूटिंग के लिए छत्तीसगढ़ आ रहे हैं।
अभिनेता आदिल खान ने मीडिया के साथ इस फिल्म में काम करने का सुखद अनुभव साझा किया। वे निर्देशक अकुल त्रिपाठी और प्रोड्यूसर रत्ना सिन्हा के साथ काम कर बेहद उत्साहित हैं। अभिनेत्री अशनूर कौर ने छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक सौन्दर्य की तारीफ करते हुए कहा कि वे यहां दोबारा जरुर आना चाहेंगी। फिल्म के निर्देशक अकुल त्रिपाठी ने बताया कि वे छत्तीसगढ़ के लोगों के सरल स्वभाव से बहुत प्रभावित हुए हैं। यहां शूटिंग के दौरान उन्हें शासन -प्रशासन से हर तरह का सहयोग मिला।
