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याचिकाकर्ता के के सहारे के निलंबन आदेश पर रोक, सुनवाई की अगली तारीख तक राहत
मन्नू मानिकपुरी संवाददाता बिलासपुर
बिलासपुर - छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में पेश एक मामले में याचिकाकर्ता ने अपने निलंबन आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्होंने अनुबंध-पी/1 और अनुबंध-पी/2 के माध्यम से 23 और 24 सितंबर 2024 के निलंबन आदेशों पर आपत्ति जताई है। इस मामले में याचिकाकर्ता का कहना है कि उनका निलंबन अनुचित है और प्रतिवादी प्राधिकारी ने यह निर्णय बिना उचित जांच के लिया है।
याचिकाकर्ता के वकील, मतीन सिद्दीकी ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता 23 सितंबर 2024 की बैठक में शामिल नहीं हो सके क्योंकि उनके भाई का निधन हो गया था। उन्होंने 22 सितंबर 2024 को चिकित्सा शिक्षा आयुक्त को पत्र भेजकर तीन दिन की छुट्टी मांगी थी और मुख्यालय से बाहर रहने की अनुमति भी मांगी थी। याचिकाकर्ता ने अपने अनुपस्थिति की सूचना पूर्व में ही दी थी, फिर भी उनके खिलाफ निलंबन का आदेश जारी किया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया गया कि प्रतिवादी प्राधिकारी ने उनके अनुपस्थिति के कारणों का सत्यापन किए बिना ही निलंबन आदेश जारी किया, जो कि एक मनमाना फैसला है। इस तर्क पर सुनवाई करते हुए जस्टिस्ट पर्थ प्रतीम साहू ने प्रतिवादी पक्ष को नोटिस जारी किया, जिसे राज्य की पैनल वकील नूपुर त्रिवेदी ने उपस्थिति दर्ज कर उन्होंने उत्तर दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा है।
इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने अपनेअंतरिम राहत हेतु भी एक आवेदन प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने निलंबन आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध किया। इस पर न्यायालय ने याचिकाकर्ता के पक्ष को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिया कि अनुबंध-पी/1 और अनुबंध-पी/2 पर अगली सुनवाई तक रोक रहेगी।
याचिकर्ता ने ज्वाइन किया लेकिन उस समय प्रभारी डीन अर्चना सिंह द्वारा भी शासकीय कार्य किया जा रहा था ।
राज्य शासन द्वारा पदस्थ डीन रमेश मूर्ति या पूर्व डीन के के सहारे दोनों में कौन वास्तविक रूप से पद में कौन डीन के पद पे रहेगा जनता किसके पास जाए ये कैसे तय होगा जो सोचनीय है।
न्यायालय का यह फैसला याचिकाकर्ता के लिए एक अस्थायी राहत है, जिससे उन्हें आगे की सुनवाई तक निलंबन से मुक्त रखा जाएगा। मामले की अगली सुनवाई में प्रतिवादी प्राधिकारी के जवाब और याचिकाकर्ता के तर्कों के आधार पर न्यायालय अंतिम निर्णय लेगा।
