सियासत
क्रूस पर मरने से पहले यीशु ने क्या कहा था? ये 7 पवित्र शब्द हैं
- पहली वाणी :हे पिता इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि क्या कर रहे हैं.
- दूसरी वाणी :मैं तुझ से सच कहता हूँ कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा.
- तीसरी वाणी :हे नारी देख, तेरा पुत्र। देख, तेरी माता.
- चौथी वाणीः हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तूने मुझे क्यों छोड़ दिया?
- पांचवीं वाणीः मैं प्यासा हूं.
- छठी वाणीः पूरा हुआ.
- सातवीं वाणी- हे पिता मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूं.
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सलीब पर कही गई ईसा मसीह के जरिए निकली इन सात वाणियों को मसीह समाज परमेश्वर के आदेश की तरह मानता है. इन वाणियों में कहीं भी दुख या रोष नहीं है. यह जीवन का उद्देश्य है, जो अलग-अलग बार अलग-अलग तरीके से समाज के सामने रखा गया है.
जीवन जीने के जो दर्शन बताए जाते हैं, ईसा ने अपने सात वचनों में अंतिम समय में भी लोगों तक वही संदेश पहुंचाने की कोशिश की. वस्तुतः यही वह अमृत वचन हैं जो हर आदर्श धर्म अपने अनुयायियों को बताता है.
