योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मन भावुक है और इस पल को वर्णित करने के लिए शब्द नहीं मिल रहे हैं। हर मन में राम नाम है। हर मार्ग ्अयोध्या की ओर आ रहा है. हर जिह्वा राम राम जप रही है। रोम रोम में राम रमे हैं। ऐसे लगता है कि हम त्रेता युग में आ गए हैं। आज हर राम भक्त के मन में गर्व है औऱ संतोष के भाव हैं। इस दिन के इंतजार में पांच सौ साल बीत गए। दर्जनों पीढ़ियां इस अधूरी कामना को लिए धरा धाम से साकेत धाम में लीन हो गईं। यह पहला ऐसा प्रकरण होगा जिसमें राष्ट्र के बहुसंख्यक समाज ने अपने ही देश में अपने आराध्य के लिए मंदिर निर्माण के लिए इतने वर्षों तक लड़ाई लड़ी हो। समाज के हर वर्ग ने जाति पांति, विचार दर्शन से ऊपर उठकर रामकाज के लिए स्वयं को सर्ग किया। अंततः वह अवसर आ गया। आज आत्मा प्रफुल्लित है कि मंदिर वहीं बना है जहां बनाने का संकल्प लिया था।