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न जाने कब सुधरेगा सिम्स अपनी लापरवाहीयो से, लगातार अपनी मनमानी से चर्चा में रहना आदत में हुआ शामिल

न जाने कब सुधरेगा सिम्स अपनी लापरवाहीयो से, लगातार अपनी मनमानी से चर्चा में रहना आदत में हुआ शामिल

(मन्नू मानिकपुरी )बिलासपुर सिम्स अस्पताल किसी न किसी बात को लेकर सुर्खियों में रहता ही है। उच्च अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक मनमाना रवैया सिम्स की आदत में शामिल हो चुका है। सिम्स में आये हुए गर्भवती सरकंडा निवासी महिला ने बताया कि वह 7 माह से गर्भवती है और अचानक तबियत ठीक नही लगने से सिम्स उपचार हेतु आई हुई थी जहाँ डॉ ने देख उन्हें सोनोग्राफी कराने को कहा लेकिन जब महिला 20 जून को चेक उप के लिए गई थी उसदिन उसकी सोनोग्राफी नही हो पाई और उसे 22 जून सुबह 9 बजे का समय दिया गया और सोनोग्राफी न होने का कारण पूछने पर महिला को वहां कार्यरत लैब टेक्नीशियन राजेश्वरी ने बताया कि हफ्ते में केवल एक दिन ही सोनोग्राफी सिर्फ गुरुवार को ही होती है । सोनोग्राफी टेक्नीशियन की बात मान कर महिला दर्द से कहारते हुते घर वापस लौट आई और बताए हुए दिन व समय के साथ सिम्स दोबारा सोनोग्राफी कराने सिम्स पहुंच गई। महिला सुबह से खाली पेट गई हुई थी उसकी सोनोग्राफी होते होते लगभग 2 बज गए। और इसका कारण सामने आया कि जो डॉ सोनोग्राफी करती है वो स्वयं 11 बजे ड्यूटी पर आई थी जबकि उनकी ड्यूटी सुबह 9 बजे से शुरू हो जाती है। इस पूरे समय मे किसी का भी ध्यान श्याद इस ओर नही आया होगा कि किसी गर्भवतीमहिला का इतना देर भूखे प्यासे रहना उसके ओर उसके बच्चे के लिए हानिकारक हो सकता है। हम शिर्फ़ आपका ध्यान इस ओर लाना चाहते है कि यदि सिम्स में केवल गुरुवार को हफ्ते में 1 दिन सोनोग्राफी की सुविधा को दिया गया है तो बाकी 5 दिन गरीब कहाँ जाए और क्यों जाककर अपनी जेब ढीली करे जब सरकार ने उन्हें सुविधा उपलब्ध कराने हेतु अस्पताल दे रखा है । या ये मान ले कि इसके पीछे कही कमीशन का कोई लंबा खेल सिम्स के उच्च अधिकारियों द्वारा तो नही खेला जा रहा। बाइट- मामले को लेकर जब सिम्स अधीक्षक डॉ नीरज सिन्धे से बात की गई तो उन्होंने कहा मैंने ऐसा कोई आदेश जारी नही किया है । और राजेश्वरी कौन होती है ये तय करने वाली ना तो वो डॉ है ना किसी ऊँचे पद पर है जिसकी बातों को माना जाए फिर यदि उसने ऐसा कहा है तो मैं उससे बात करूंगा।

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